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| 03.11.2009 |
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कुछ वो पागल है कुछ दिवाना भी |
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कुछ वो पागल है कुछ दिवाना भी यूँ तो हर शै में सिर्फ़ वो ही वो उसके अहसास को जीना हरपल उससे मिलना, उसी का हो जाना भूल की थी, सज़ा मिली कैसी? आज पलकों पे होंठ रख ही दो |
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