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| 03.11.2009 |
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कैसे उसको छोड़ूँ कैसे पाऊँ मैं |
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कैसे उसको छोड़ूँ कैसे पाऊँ मैं आँखें क्यों भीगी-भीगी-सी रहती हैं मेरे भीतर इक नन्हा-सा बच्चा है सीपी शंख नदी तितली औ‘ फूलों के एक तिलस्मी जंगल उसकी आँखों में मेरे पाँव बँधे हैं भूलों के पत्थर मेरा पागलपन तो कहता है मुझसे |
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