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| 03.11.2009 |
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एक टूटी छत लिए बरसात का स्वागत करूँ |
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एक टूटी छत लिए बरसात का स्वागत करूँ अपना घर जलने के ग़म को भूल भी जाऊँ, मातहत होने का यह तो अर्थ हो सकता नहीं बाप हूँ, ये सच है, लेकिन इसका मतलब नहीं हाथ मेरा, तेरे हाथों में जो रह पाए यूँ ही जब खुलें नींदें मेरी तेरे नयन की भोर हो |
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