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| 01.16.2009 |
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बिन बरसा इक बादल-सा |
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बिन बरसा इक बादल-सा अबके वो रोया ऐसे आँखे छल-छल करती हैं ज़िद करता है बच्चों-सी जब भी मिलता हूँ उससे बाबा जब तक घर में थे |
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