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| 02.15.2009 |
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अपने आप से लड़ता मैं |
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अपने आप से लड़ता मैं वो बोला-नादानी थी जाने कैसा जज़्बा था साथ उगा था सूरज के वो भी कुछ अनजाना-सा झूठ का खोल उतारा तो |
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