मनोहर शर्मा ‘साग़र’ पालमपुरी


दीवान

अपने ही परिवेश से अंजान है
एक वो तेरी याद का लम्हा
छोड़े हुए गो उसको हुए है...
मालूम नहीं उनको ये ..
वो महफ़िलें, वो शाम सुहानी ..
हर सम्त एक भीड़ - से ..