मनोहर पुरी

लघु कथा
तूलिका
मास्टर शंभुनाथ
यूँ ही कह दिया होगा 
वैध हो मानव अंगों का व्यापार (जिन्दगी और जुगाड़ के अंश)
व्यंग्य
इक बंगला बने न्यारा
कम्प्यूटर का कमाल
कुछ तो सस्ता भी होता है
कौन है आम आदमी
क्यों करे इंडिया को भारत
गरम है जूतों का बाज़ार
ग़रीबी मौहे प्यारी लागै
जनमत संग्रह तो बहाना है
बलात्कार मंजूर विवाह नहीं
जी.डी.पी. का अद्भुत विस्तार
जूठन ही सत्य है
यह ताज़ा पानी क्या है? 
सरकार की लाडली बेटी है महँगाई
बाल-साहित्य
कंघी और ब्रश की संधि
जंगल के दोस्त
देवदूतों का मटका
मधु मक्खियों के छत्ते
कहानी
आलेख
कितनी सार्थक होती हैं दूरदर्शन पर होने वाली बहस
मातृ भाषा नहीं राष्ट्र भाषा है हिन्दी
समरसता का दूसरा नाम है होली
ज़िन्दगी और जुगाड़ : परिचय