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ISSN 2292-9754

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04.13.2017


पंख फैलाओ अगर

पंख फैलाओ अगर पास आसमान रहे।
ऊँचा पहुँचोगे तुम साथ गर उड़ान रहे।

मखौल मेरा बनाओ तो बना लो लेकिन,
तीर मुझपर चलाओ तो चला लो लेकिन।
कुछ तो ऐसा करो पास में ईमान रहे॥

हर एक पल उसे बस बात इक सताती है,
चैन की नींद भी तो एक पल न आती है।
घर में जब उसके बेटी कोई जवान रहे॥

अब जो गुज़रे तो फिर न लौट पायेंगे हम,
हमे यकीं है उस वक़्त याद आएँगे हम।
उम्र के दौर में जब आपके ढलान रहे।

एक औरत सँवार देती है दुनिया सारी,
ज़िन्दगी लगने लगे जैसे बगिया प्यारी।
घर वो हो जाये जो पास इक मकान रहे॥

पंख फैलाओ अगर पास आसमान रहे।
ऊँचा पहुँचोगे तुम साथ गर उड़ान रहे॥


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