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ISSN 2292-9754

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01.30.2016


पहले सपने

ऐ मेरी आँख के पहले सपने
मुझको इक बार ज़रा चैन से सो लेने दे
फिर न जाने मुझे नींद
आये के न आये कभी।

वो जो रूठेगा तो
मैं उसको माना लाऊँगी,
मैं जो रूठी तो वो मुझको
मनाये की न मनाए कभी।

उसकी बातों पे यक़ीं
मुझको बहुत है लेकिन
अपनी तक़दीर का क्या
मुस्कुराये की न मुस्कुराये कभी।

ऐ मेरी आँख के पहले सपने
मुझको इतना तू परेशान न कर
जाने ये वक़्त मुझे उससे
मिलाये की न मिलाये कभी

ऐ मेरी आँख के पहले सपने
मुझको इक बार ज़रा चैन से सो लेने दे।


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