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ISSN 2292-9754

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02.06.2015


बसंत - तांका, हाइकु और हाइगा

तांका -

महका गेंदा,
गदराई सरसों,
आया बसंत।
बाँधे पीली पगड़ी,
होके हवा-सवार॥
*************
हाइकु

1
मुस्काए फूल,
हवा लगी बौराने,
देख बसंत
2
धरती ओढ़े,
बासंती बूटी कढ़ी
धानी चूनर
3
ऋतुराज ने,
बाँधी पीली पगड़ी,
रीझी धरती
4
अमलतास
तपता देता पर,
रंग बासंती
5
मन भंवरा
कली बनी फुलवा
निहारे हौले
6
ओढ़े बसंत
धूप का उत्तरीय
मोहित धरा

हाइगा-


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