मंजु महिमा भटनागर

कविता
कुछ पता भी न चला
कैसे बदलेगी यह फ़ितरत ?
ज़िन्दगी के रंग
ठूँठ
नव-वर्ष : जागरण वर्ष. २०१५
बसंत - तांका, हाइकु और हाइगा
बोलो बसन्त! तुम कब आओगे?
माँ के क़रीब
रचना है वर्तमान
होलिका-दहन
समीक्षा
हथेलियों में सूरज
बहुआयामी कविताओं की कवयित्री.........
(डॉ. (प्रो.) दीप्ति गुप्ता, पुणे (महाराष्ट्र)