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ISSN 2292-9754

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05.25.2016


मछली सी मेरी प्यास है

मछली सी मेरी प्यास है
तितली सा मेरा ख़्वाब है

जगती बुझती रहती है नित
जुगनू सी जो ये आस है

आँखों में हैं स्वप्न कई
यह पंछी सी परवाज़ है

दूर नहीं है अब मुझ से तू
हर पल तेरा एहसास है

माज़ी तू मुस्तक़बिल भी तू
"मीत" तू ही मेरा हाल है।


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