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ISSN 2292-9754

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01.23.2016


मोबाईल

तुम्हारे बारे में सोचते हुए
आदतन, बार-बार
मोबाईल को जेब से निकाल कर
देख लिया करता था

यह सोच करके कि
कंही तुम्हारा कोई ‘काल’
मैं ‘मिस’ ना कर दूँ

हँसी आती है
यह सोच के कि
मैं कितना ‘मिस’ करता था।


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