अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
04.01.2015


आजकल इन पहाड़ों के रास्ते

आजकल इन पहाड़ों के रास्ते
शाम को कोहरे से भरे होते हैं
जैसे मेरा मन
तेरी यादों से भरा होता है।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें