डॉ. मनीषकुमार सी. मिश्रा

कहानी
नक़लधाम
वो पहली मुलाक़ात
वो लड़की
कविता
आज अचानक हुई बारिश में
आजकल इन पहाड़ों के रास्ते
इन पहाड़ों मेँ आकर
इन रास्तों का अकेलापन
उसने कहा
एक वैसी ही लड़की
काश तुम मिलती तो बताता
चाय का कप
जब कोई किसी को याद करता है
जीवन के तीस बसंत के बाद
तेरी उदासी का सबब जानता हूँ
नए साल से कह दो कि
नेल पालिश
तुमसे बात करना
बनारस - चार कविताएँ
1. बनारस के घाट
2. बनारस साधारण तरीके का असाधारण शहर
3. यह जो बनारस है
4. काशी में शिव संग
ब्रूउट्स यू टू
मैंने कुछ गालियाँ सीखी हैं
मोबाईल
वो मौसम
शिकायत सब से है लेकिन
आलेख
बनारस के बुनकरों की वर्तमान स्थिति
काशी : सकल-सुमंगलरासी
संत रविदास : सामाजिक परिप्रेक्ष्य में एक विवेचना