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05.31.2008
 
सारी दुनिया के सवालों से बचा लूँ तुमको
ममता किरण

सारी दुनिया के सवालों से बचा लूँ तुमको
अपने दिल के किसी कोने में छुपा लूँ तुमको

एक निर्णय भी नहीं हाथ में मेरे बेटी
कोख मेरी है मगर कैसे बचा लूँ तुमको

जब भी ग़मगीन हो दिल अश्क बहे आँखों से
पोटली खोल के यादों की निकालूँ तुमको

मेरे सुख दुख के हर आँसू में बहे तू संग-संग
आँख में अपनी मैं काजल सा बसा लूँ तुमको

तूने खुशियों के भरे रंग मेरे जीवन में
माँग में अपनी सितारों सा सजा लूँ तुमको ।

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