| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 05.31.2008 |
| सारी दुनिया के सवालों से बचा लूँ तुमको ममता किरण |
|
सारी दुनिया के सवालों से बचा लूँ तुमको
अपने दिल के किसी कोने में छुपा लूँ तुमको एक निर्णय भी नहीं हाथ में मेरे बेटी कोख मेरी है मगर कैसे बचा लूँ तुमको जब भी ग़मगीन हो दिल अश्क बहे आँखों से पोटली खोल के यादों की निकालूँ तुमको मेरे सुख दुख के हर आँसू में बहे तू संग-संग आँख में अपनी मैं काजल सा बसा लूँ तुमको तूने खुशियों के भरे रंग मेरे जीवन में माँग में अपनी सितारों सा सजा लूँ तुमको । |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|