अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
09.30.2014


मैं वहीं ठहर गया हूँ

मैं वहीं ठहर गया हूँ
जहाँ तुम हो,
तुम्हारी जिज्ञासा है,
अद्भुत आत्मा है,
आँखों की आदतें हैं,
प्यार का मिजाज है।

मैं वहीं ठहर गया हूँ
जहाँ गणित के प्रश्न हैं,
भूगोल के नक्शे हैं,
इतिहास का रोना है,
कंठस्थ कविता है,
मौसम का आनन्द है,
वर्षों का लालित्य है,
पानी का आचमन है,
पगडण्डियों का भुलावा है,
सड़कों का सारांश है,
मन का मंतव्य है
मैं वहीं ठहर गया हूँ।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें