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ISSN 2292-9754

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08.24.2016


अरे सुबह, तू उठ आयी है

"अरे सुबह, तू उठ आयी है
अरे शाम, तू चुप बैठी है,
अरे रात , तू अब भी वैसी
अरे समय, तू अब भी अद्भुत।
अरे साथ, तू अब भी भूखा
अरे प्यार,तू अब भी श्यामल
अरे सत्य, तू अब भी अपरिचित
अरे जीवन, तू अब भी प्यासा।"


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