महेश रौतेला

कविता
अरे सुबह, तू उठ आयी है
आपको मेरी रचना पढ़ने की आवश्यकता नहीं
कितने सच्च मुट्ठी में
चुलबुली चिड़िया
जब आँखों से आ रहा था प्यार
तुम्हारी तुलना
तूने तपस्या अपनी तरह की
तेरी यादों का कोहरा
तेरे शरमाने से, खुशी हुआ करती है
दूध सी मेरी बातें
दोस्त, शब्दों के अन्दर हो!
पर कदम-कदम पर गिना गया हूँ
पानी
फिर एक बार कहूँ, मुझे प्यार है
बस, अच्छा लगता है
मैं चमकता सूरज नहीं
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
मैं वहीं ठहर गया हूँ
मैं समय से कह आया हूँ
मैंने सबसे पहले
वर्ष कहाँ चला गया है
सब सुहावना था
हम दौड़ते रहे
हम सोचते हैं
हे कृष्ण जब
कहानी
नानी तुमने कभी प्यार किया था? - १
नानी तुमने कभी प्यार किया था? - २