फागुन का महीना है, मचा है फाग होली छाक छाई है; सरस रँग-राग ! बालों में गुछे दाने, सुनहरे खेत चारों ओर झर-झर झूमते समवेत ! पुरवा प्यार बरसा कर, रही है डोल सरसों रूप सरसा कर, खड़ी मुख खोल ! रे, हर गाँव बजते डफ मँजीरे ढोल देते साथ मादक नव सुरीले बोल ! चाँदी की पहन पायल सखी री नाच आया मन पिया चंचल सखी री नाच !