अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
05.03.2012
 
नव-वर्ष
डॉ. महेंद्र भटनागर

नूतन वर्ष आया है!
मधुर बंधुत्व का विस्तार लाया है!

आतंक के माहौल से अब मुक्त होंगे हम,
ऐसा घना अब और छाएगा नहीं भ्रम-तम,
नूतन वर्ष आया है!
अमन का; चैन का उपहार लाया है!

सौगन्ध है — जन-जन सदा जाग्रत रहेगा अब,
संकल्प है — रक्षित सदा भारत रहेगा अब,
नूतन वर्ष आया है!
सुरक्षा का सुदृढ़ आधार लाया है!

अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें