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| 11.06.2007 |
| दीपावली डॉ. महेंद्र भटनागर |
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जगमग-जगमग करते दीपक
लगते कितने मनहर प्यारे, मानों आज उतर आये हैं अम्बर से धरती पर तारे ! दीपों का त्योहार मनुज के अतंर-तम को दूर करेगा, दीपों का त्योहार मनुज के नयनों में फिर स्नेह भरेगा ! धन आपस में बाँट-बूट कर एक नया नाता जोड़ेंगे, और उमंगों की फुलझड़ियाँ घर-घर में सुख से छोड़ेंगे ! दीपावलि का स्वागत करने आओ हम भी दीप जलाएँ, दीपावलि का स्वागत करने आओ हम भी नाचे गाएँ ! |
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