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ISSN 2292-9754

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01.29.2016


बाज़ार मैं बैठे मगर

बाज़ार मैं बैठे मगर बिकना नहीं सीखा
हालात के आगे कभी झुकना नहीं सीखा

तन्हाई में जब छू गई यादें मिरे दिल को
फिर आँसुओं ने आँख मैं रुकना नहीं सीखा

फिर आईने को बेवफ़ा के रूबरू रक्खा
मैंने वफ़ा की लाश को ढकना नहीं सीखा

जब चल पड़े मंज़िल की जानिब ये क़दम मेरे
फिर आँधियों के सामने रुकना नहीं सीखा


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