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| 08.20.2007 |
| प्रेम डगर महावीर शर्मा |
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प्रेम ही सत्यम्, प्रेम शिवम् है, प्रेम ही सुन्दरतम् होगा। प्रेम डगर पर चलते रहना, जहाँ न लुटने का ग़म होगा।। मदमाती पलकों की छाया, मिल जाये यदि तनिक पथिक को, तिमिर, शूल से भरा मार्ग भी आलोकित आनन्द-सम होगा। डगर प्रेम की, आस प्रणय की, उद्वेलित हों भाव हृदय के, अंतरज्योति की लौ में जल कर नष्ट निराशा का तम होगा। बिछड़ गया जब साथ प्रिय का, सिहर उठा पौरुष अन्तर का, जीर्ण वेदना रही सिसकती, प्यार में न कोई बन्धन होगा। अकथ कहानी सजल नयन में, लिये सोचता पथिक राह में, दूर क्षितिज के पार कहीं पर, एक अनोखा संगम होगा। निशा विरह को निगल जायेगी, भोर लिये सन्देश मिलन का, उत्तंग तरंगों पर किरणों का, झूम झूम कर नर्तन होगा।। |
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