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| 05.02.2008 |
| पर्दा हटाया ही कहाँ है? महावीर शर्मा |
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ज़िन्दगी में प्यार का वादा निभाया ही कहाँ है
नाम लेकर प्यार से मुझ को बुलाया ही कहाँ है? टूट कर मेरा बिखरना, दर्द की हद से गुज़रना दिल के आईने में ये मञ्ज़र दिखाया ही कहाँ है? शीशा-ए-दिल तोड़ना है तेरे संगे-आसतां पर तेरे दामन पे लहू दिल का गिराया ही कहाँ है? ख़त लिखे थे ख़ून से जो आँसुओं से मिट गये वो जो लिखा दिल के सफ़े पर, वो मिटाया ही कहाँ है? जो बनाई है तिरे काजल से तस्वीरे-मुहब्बत पर अभी तो प्यार के रंग से सजाया ही कहाँ है? देखता है वो मुझे, पर दुश्मनों की ही नज़र से दुश्मनी में भी मगर दिल से भुलाया ही कहाँ है? ग़ैर की बाहें गले में, उफ़ न थी मेरी ज़ुबां पर संग दिल तू ने अभी तो आज़माया ही कहाँ है? जाम टूटेंगे अभी तो, सर कटेंगे सैंकड़ों ही उसके चेहरे से अभी पर्दा हटाया ही कहाँ है? उन के आने की ख़ुशी में दिल की धड़कन थम ना जाये रुक ज़रा, उनका अभी पैग़ाम आया ही कहाँ है? |
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