महावीर शर्मा


दीवान

करवट
क्यों?
खून से मेंहदी रचाते हैं
ज़िन्दगी से दूर
पर्दा हटाया ही कहाँ है?
यादों के नग़मे
वो लम्हे !

कविता

प्रेम डगर
विरह की अगन जलाये रे!
दो फूल
कविता
हूक उठी दिल में. . .

कहानी

वसीयत
शीत लहर

आलेख

हिमालय अदृष्य हो गया
दिल की गीता