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ISSN 2292-9754

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09.14.2014


शोध निबन्ध

1. बुलन्दशहर की बोलियों का ध्वनिग्रामिक अध्ययन: हिन्दुस्तानी, भाग 22, अंक 3-4, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद पृ. 75-92 (1961)
2. हिन्दी संज्ञा: आकारान्त शब्द -पदग्रामिक विश्लेषण एवं वर्गबंधनः नागरी प्रचारिणी पत्रिका, मालवीय शती विशेषांक,वर्ष 66, अंक 2-3-4, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी पृ. 462-472 (1961)
3. ब्रज भाषा के सर्वनाम पदः मध्य भारती, बुलेटिन सं0-1, भाषा एवं शोध संस्थान, जबलपुर पृ. 107-114 (1962)
4. ध्वनिग्राम शास्त्र एवं पदग्राम शास्त्र: हिन्दुस्तानी, भाग 23, अंक 2, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद पृ. 107-112 (1962)
5. खड़ी बोली एवं ब्रज भाषा के संक्रान्ति क्षेत्र की बोलियों का ध्वनिग्रामिक अध्ययन: (भाषा शास्त्र की रूपरेखा-डॉ. उदयनारायण तिवारी), लीडर प्रेस, इलाहाबाद पृ. 231-245 (1963)
6. ब्रज भाषा एवं खड़ी बोली के संक्रान्ति क्षेत्र की बोलियों के विशेषणः मध्य भारती, बुलेटिन सं0 2, अंक 2, भाषा एवं शोध संस्थान, जबलपुर पृ. 182-197 (1963)
7. ब्रज भाषा एवं खड़ी बोली के संक्रान्ति क्षेत्र में उपलब्ध संध्यक्षरों का अध्ययनः भारतीय साहित्य, वर्ष 8, अंक 3, क0मु0 हिन्दी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय, आगरा पृ. 95-99 (1963)
8. ब्रज भाषा एवं खड़ी बोली के संक्रान्ति क्षेत्र की बोलियों का संज्ञा-विभक्तिमय अध्ययनः भाषा, वर्ष 3, अंक 2, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, शिक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली पृ. 56-70 (1963)
9. काव्य भाषा का स्वरूप: कल्पना, नं0-145, सुलतान बाजार, हैदराबाद पृ. 56-70 (1963)
10. महादेव के काव्य की पीड़ा में निहित प्रेम तत्वः महादेवी अभिनन्दन ग्रन्थ, भारती परिषद्, प्रयाग पृ. 159-163 (1964)
11. प्रत्ययः अधुनातम भाषाशास्त्र के संदर्भ में: हिन्दुस्तानी, भाग 25, अंक 1-4, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद पृ. 363-364 (जनवरी-दिसम्बर, 1964)
12. हिन्दी सीखने में तमिल भाषियों की कठिनाइयाँ: गवेषणा, वर्ष 2, अंक 3, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा पृ. 31-44 (मार्च, 1964)
13. कामायनी में भाव एवं रस योजना: विचार, दृष्टिकोण एवं संकेतः विनोद पुस्तक मंदिर, आगरा पृ. 232-240 (1965)
14. नाट्य परम्परायें एवं प्रसाद के नाटकों का वस्तु एवं शिल्प स्तर: विचार, दृष्टिकोण एवं संकेतः विनोद पुस्तक मंदिर,आगरा पृ. 301-311 (1965)
15. भाषिक भूगोल एवं बोली विज्ञान: विचार, दृष्टिकोण एवं संकेत: विनोद पुस्तक मंदिर, आगरा पृ. 510-518 (1965)
16. हिन्दी अक्षरः मध्य भारती, बुलेटिन सं0 3, नं0 3, भाषा एवं शोध संस्थान, जबलपुर पृ. 175-192 (1965)
17. भारतवर्ष में अन्य भाषा शिक्षण का महत्व: भारतीय शिक्षा, अष्टम अंक, प्रथम वर्ष, भारतीय शिक्षक संघ, कानपुर पृ. 48-51 (अक्टूबर,1965)
18. भारतवर्ष में अन्य भाषा शिक्षण की समस्यायें: जन शिक्षण, वर्ष 30, अंक 10-11, विद्या भवन सोसाइटी, उदयपुर पृ. 8-27 (अक्टूबर-नवम्बर, 1965)
19. भाषा का प्रश्न और भारत की एकताः कुछ प्रश्न एवं दिशा बोध: आलोचना, पूर्णांक 35, नवांक 9, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली पृ. 137-142 (जनवरी, 1966)
20. ध्वनि विज्ञान एवं हिन्दी ध्वनियों का अध्ययन: क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित (1966)
21. अन्य भाषा शिक्षण में व्याकरण एवं अनुवाद पद्धति का उपयोग: नया शिक्षक, भाषा शिक्षण विशेषांक, वर्ष 9, अंक 2-3, शिक्षा विभाग, राजस्थान, बीकानेर पृ. 170-175 (अक्टूबर, 1966-जनवरी,67)
22. नव्यतर आर्य भाषाओं एवं द्रविड़ भाषाओं के मध्य भाषात्मक समानताएँ: माध्यम, वर्ष 3, अंक 10, हिन्दी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद पृ.-56-58 (फरवरी,1967)
23. अन्य भाषा शिक्षण तथा ध्वनि विज्ञान: भाषा शिक्षण तथा भाषा विज्ञान, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा पृ. 43-47 (1969)
24. Gender in Hindi Language: Bulletin of Centre for Advanced Study in Education, University of Baroda (Restricted Publication) (1970)
25. हिन्दी संज्ञा वाक्यांशः केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा द्वारा साइक्लोस्टाइल्ड (1971)
26. हिन्दी के उपवाक्य % Report of Language Workshop, National Academy of Administration, Govt. of India, Mussoorie (Restricted publication) (1972)
27. हिन्दी संज्ञाः भाषा (हिन्दी भाषाविज्ञान विशेषांक), केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार, नई दिल्ली पृष्ठ 142 – 152 (1973)
28. हिन्दी के स्वर ध्वनिग्राम % Jabalpur University Research Journal, Vol.I, No. I, pp. 13-28 (June, 1973)
29. हिन्दी की उपवाक्य संरचना % Journal of LBS National Academy of Administration, Vol. XIX, pp. 87 - 92 (1974)
30. तुलसीदास और रामचरितमानसः माय मराठी, मानस चतुः शताब्दी विशेषांक, वर्ष 40, अंक 8, वृहत् महाराष्ट्र मण्डल, नई दिल्ली, पृष्ठ 43 - 47 (अगस्त, 1974)
31. जैन दर्शन की आधारभित्ति-अनेकांतावाद एवं स्याद्वादः The Vikram : Journal of Vikram University, Ujjain, महावीर विशेषांक, Vol. XVIII, No. 2 & 4, पृष्ठ 53 – 61 (May & Nov., 1974)
32. भगवान महावीर का संदेश एवं आधुनिक जीवन संदर्भ: महाराष्ट्र मानस, भगवान महावीर विशेषांक, महाराष्ट्र सरकार, बम्बई, पृ. 55-71 (1975)
33. अन्य भाषा के रूप में हिन्दी का शिक्षण: भाषा, वर्ष 14, अंक 3-4, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, पृ. 162-172 (1975)
34. हिन्दीः स्वरूप एवं वर्तनी: प्रकाशित मन, वर्ष 2, अंक 2, दिल्ली पृ. 11-14 (जुलाई, 1975),
35. भाषा और साहित्य: वीणा, वर्ष 49, अंक 4, इन्दौर, पृ. 17-24 (अप्रेल, 1976)
36. हिन्दी भाषा के रूप: दिनमान, टाइम्स ऑफ इण्डिया प्रकाशन, दिल्ली, पृ. 11-13 (अगस्त, 1976)
37. हिन्दी ब्रिज कोर्स परियोजना: जबलपुर विश्वविद्यालय, जबलपुर (11 सितम्बर, 1976)
38. प्राकृत एवं अपभ्रन्शः संस्कृत-प्राकृत जैन व्याकरण और कोश की परम्परा-आचार्य श्री कालूगणी स्मृति ग्रन्थ, छापर (राजस्थान), पृ. 287-302 (फरवरी, 1977)
39. प्राकृत एवं अपभ्रन्श का आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं पर प्रभाव: The Vikram : Journal of Vikram University, Ujjain, Vol. XXI, No. 2 & 4, pp. 73-88 (May & Nov., 1977)
40. अनुसंधान की अनेकांतवादी दृष्टिः संभावना, हिन्दी शोध और समीक्षा की अन्तर्राष्ट्रीय दृष्टियुक्त अर्द्ध वार्षिकी, शोध-तन्त्र विशेषांक, वर्ष 3, अंक 5-6, हिन्दी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, पृ. 34-36 (1977)
41. महावीर पूर्व जैन धर्म की परम्पराः श्री राजेन्द्र ज्योति, राजेन्द्र सूरीश्वर जन्म सार्ध शताब्दी समिति, मध्यप्रदेश, चतुर्थ खण्ड पृ. 114-117 (1977)
42. देवनागरी लिपि एवं हिन्दी की वर्तनी: नागरी लिपि सम्मेलन स्मारिका, नागरी लिपि परिषद्, राजघाट, नई दिल्ली, पृ. 41-46 (अप्रेल, 1977)
43. आत्मा का परब्रह्मत्व स्वरूप: महावीर जयन्ती स्मारिका, राजस्थान जैन सभा, जयपुर, पृ. 15-23 (1978)
44. हिन्दी शब्दानुशासन का संदर्भ तथा अपनी बात: आचार्य किशोरीदास वाजपेयी अभिनन्दन ग्रन्थ, कनखल, हरिद्वार, पृ. 189-198 (1978)
45. सूरसागर की भावयोजना का आध्यात्मिक आधार: ‘‘सूरदास’’ - मध्यप्रदेश साहित्य परिषद, भोपाल, पृ. 71-87 (1978)
46. समता समाज: श्रमणोपासक, समता विशेषांक, श्री अ0भा0सा0जै0संघ, बीकानेर, पृ. 199-206 (1978)
47. भाषा-परिवर्तन: पत्राचार अध्ययन एवं अनवरत शिक्षा संस्थान, जयपुर विश्वविद्यालय, जयपुर (1978)
48. हिन्दी व्याकरण: पत्राचार पाठ्यक्रम एवं अनुवर्ती शिक्षा विद्यालय दिल्ली विश्वविद्यालय (1978)
49. महावीर की वाणी का मंगलमय क्रान्तिकारी स्वरूप: तीर्थंकर महावीर स्मृति ग्रन्थ, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, पृ. 43-50 (1978)
50. हिन्दी में रूपग्रामिक विश्लेषण की कुछ समस्याएँ: गवेषणा, वर्ष 16, अंक 31, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा, पृष्ठ 63-70 (1978)
51. भगवान महावीर: जीवन दर्शन और सिद्धान्त: (भगवान महावीर के 2500 वें निर्वाण दिवस पर आयोजित भाषण माला के अंश), अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म0प्र0), पृ. 8-33 (1978)
52. तद दो प्रवाह एकः मुनि नथमल जी की रचना दृष्टि: महाप्रज्ञ-व्यक्तित्व एवं कृतित्व, मित्र परिषद्, कलकत्ता-700 073, पृ. 140-142 (जनवरी, 1980)
53. भाषा-सांस्कृतिक चिह्नक: परिषद्-पत्रिका, शोध त्रैमासिक, वर्ष 19, अंक 4, बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना, पृ. 159-160 (जनवरी, 1980)
54. प्रेमचन्द के उपन्यासों की भाषा: शताब्दी चर्चा, प्रेमचन्द जन्मशती विशेषांक, जबलपुर (जुलाई, 1980)।
55. हिन्दी पद रचना: भारतीय साहित्य (डॉ. विश्वनाथ प्रसाद स्मृति विशेषांक), वर्ष 21, अंक 1-4, क0मु0 हिन्दी तथा भाषा विज्ञान विद्यापीठ, आगरा विश्वविद्यालय, आगरा, पृ. 31-42 (फरवरी, 1981)
56. महावीर-वाणी का क्रान्तिकारी स्वरूप: जिनवाणी, वर्ष 38, अंक 4, सम्यज्ञान प्रचारक मण्डल, जयपुर, पृ. 13-19 (अप्रेल, 1981)
57. भाषावैज्ञानिक अनुसंधान-क्षेत्र एवं दिशायें: परिषद् पत्रिका, वर्ष 21, अंक 2, बिहार राष्ट्र भाषा परिषद्, पटना, पृ. 119-124 (जुलाई, 1981)
58. चरित्र निर्माण की आवश्यकता एवं बाल संस्कार: श्रमणोपासक (बाल संस्कार शिक्षा संगोष्ठी विशेषांक), वर्ष 19, अंक 6-7, बीकानेर, पृ. 17-30 (अक्टूबर, 1981)
59. अहिंसा, अपरिग्रह एवं अनेकांतवाद: पार्श्वनाथ नवयुवक मण्डल स्मारिका, जयपुर, पृ. 1-21 (1981)
60. प्रेमचन्द के उपन्यासों की भाषा: The Vikram : Journal of Vikram University, Ujjain, Vol. XXV No. 2 & 4), pp. 85-92 (May & November, 1981)
61. प्रेमचन्द के उपन्यासों में भाषिक प्रयोग: शोध (साहित्य-संस्कृति-गवेषणा- प्रधान पत्रिका), प्रेमचन्द अंक, नागरी प्रचारिणी सभा, आरा (भोजपुर: बिहार), पृष्ठ 54-60 (1981-82)
62. कृष्ण काव्य परम्परा में भक्ति, प्रेम एवं संगीत: संकीर्तनांक-पंचदश वार्षिक बसन्तोत्सव, वर्ष 15, अंक 9, प्रकाशकः श्री श्याम-सरोवर, कलकत्ता (1982)
63. जैन धर्म और दर्शन की प्रासंगिकता: महावीर जयन्ती स्मारिका, अंक 19, द्वितीय खण्ड, राजस्थान जैन सभा, जयपुर, पृष्ठ 21-29 (1982)
64. प्रेमचन्द के उपन्यास: भाषा वैज्ञानिक अध्ययन: प्रज्ञा: प्रेमचन्द स्मृति अंक, अंक 27 (भाग 2) एवं अंक 28 (भाग 1), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, पृष्ठ 143-150 (1982)
65. भाषा के विविध रूप एवं प्रकार: The Vikram : Journal of Vikram University, Ujjain, Vol. XXVII No. 2, pp. 1-16 (May, 1983)
66. भाषा और विचार: The Vikram : Journal of Vikram University, Ujjain, Vol. XXVII No.4, pp. 17-22 (November, 1983)
67. भाषा के विविध रूप एवं प्रकार: भाषा, विश्व हिन्दी सम्मेलन विशेषांक, तृतीय विश्व हिन्दी सम्मेलन, वर्ष 22, अंक 3-4, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, पृष्ठ 221-230 (1983)
68. साठोत्तरी हिन्दी कहानी: पूर्णा, साठोत्तरी हिन्दी कहानी समीक्षा विशेषांक, विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन, नागपुर, पृष्ठ 79-85 (1984)
69. Influenta limbilor Pracrit si Apabhransa asupra limbilor Indo-ariene moderne: ANALELE UNIVERSITATii, BUCURESTI Limba si Literatura Romana Anul XXXVI, pp. 33-43. (1987)
70. विश्वधर्म के रूप में जैन धर्म-दर्शन की प्रासंगिकता:आस्था और चिन्तनः आचार्यरत्न श्री देशभूषण जी महाराज अभिनन्दन ग्रन्थ, तृतीय खण्ड, आचार्यरत्न श्री देशभूषण श्री महाराज अभिनन्दन ग्रन्थ समिति, दरीबा कलां, दिल्ली, पृष्ठ 58-63 (1987)
71. जैन धर्म-दर्शन: श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन सभा हीरक जयन्ती स्मारिका, चिन्तन मनन खण्ड, श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन सभा, कलकत्ता, पृष्ठ 13-19 (1988)
72. आचार्य विद्यासागर प्रणीत महाकाव्य मूकमाटीः णाणसायर (ज्ञानसागर), अंक 3, यमुना विहार, दिल्ली, पृ. 25-48 (मार्च, 1990)
73. मध्ययुगीन संतों का निर्गुण भक्ति-काव्यः सम्भावना (भक्ति काव्य विशेषांक), वर्ष 8, अंक 13-14, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, पृ. 6-9 (मई, 1990)
74. अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना एवं विश्व शान्तिः अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी प्रचार एवं प्रसार समिति, नई दिल्ली,पृष्ठ 89-97 (मई, 1990)
75. विश्वशान्ति एवं अहिंसाः अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी प्रचार एवं प्रसार समिति, नई दिल्ली, (अक्टूबर, 1990), पृष्ठ 261-268 (अक्टूबर, 1990)
76. हिन्दी-उर्दू का सवाल तथा पाकिस्तानी राजदूत से मुलाकातः ‘‘मधुमती’’- राजस्थान साहित्य अकादमी की पत्रिका, वर्ष 30, अंक 6, उदयपुर, पृष्ठ 10-22 (जुलाई, 1991)
77. हिन्दी भाषा के विविध रूप: श्री जैन विद्यालय, हीरक जयन्ती स्मारिका (विद्वत् खण्ड), कलकत्ता-700001, पृष्ठ 2-5 (1994)
78. भाषा विज्ञान एवं मानव विज्ञान: गवेषणा, रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव स्मृति अंक, वर्ष 31, अंक 63-64, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा, पृष्ठ 169-189 (1994)
79. हिन्दी भाषा के उपभाषिक रूप: हिन्दी साहित्य परिषद्, बुलन्दशहर की स्वर्ण जयन्ती स्मारिका (1995)
80. विदेशों में हिन्दी भाषा और साहित्य का शिक्षण: गवेषणा, विश्व भाषा हिन्दी विशेषांक, वर्ष 33, अंक 65-66, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा, पृष्ठ 13-36 (1995)
81. हिन्दी भाषा: राष्ट्रभाषा, वर्ष 53, अंक 5-6, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा, पृष्ठ 15-18 (1995)
82. हिन्दी भाषा का बदलता स्वरूप: क्षितिज, भाषा-संस्कृति विशेषांक, अंक-8, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बम्बई, पृष्ठ 15-19 (1996)
83. विदेशों में हिन्दी भाषा और साहित्य: विदेश मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली की स्मारिका (पांचवाँ विश्व हिन्दी सम्मेलन), पृष्ठ 39 – 48 (1996)
84. हिन्दी भाषा क्षेत्र: विकल्प, राजभाषा विशेषांक, वर्ष 5, संयुक्त अंक-अक्टूबर 1995 से मार्च 1996, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून-248005, पृ. 24-28 (1996)
85. विश्व यात्री की महायात्रा: इस्पात भाषा भारती, वर्ष 17, पूर्णांक- 50, स्टील अथॉरिटी ऑफ इण्डिया लिमिटेड, नई दिल्ली-110 002, पृष्ठ 36-39 (1996)
86. राजभाषा हिन्दी: राजतरंगिणी, अंक-15, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क/सीमा शुल्क आयुक्तालय, इन्दौर-452001, पृष्ठ 12-14 (1996)
87. हिन्दी की विश्व यात्रा: पंचम विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर प्रवासी भारतीय समाज द्वारा प्रकाशित स्मारिका, पृष्ठ 129-145 (1996)
88. श्री शंकर दयाल सिंहः समन्वय, अंक 37, वर्ष 37, पृ. 85-90 (1996)
89. हिन्दी भाषा का बदलता स्वरूप: युमशकैश, अंक 158, मणिपुरी हिन्दी शिक्षक संघ, इम्फाल - 795001, पृष्ठ 4-12 (1996)
90. राजभाषा हिन्दी की भूमिका: राजभाषा पुष्पमाला, वर्ष 8, अंक 100, राजभाषा विभाग, गृह मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली-110 003, पृष्ठ 2-4 (1996)
91. विदेशों में हिन्दी भाषा और साहित्य: राजभाषा पुष्पमाला, वर्ष 9, अंक 108, राजभाषा विभाग, गृह मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली-110003, पृष्ठ 2-9 (1997)
92. अनुवादः प्रकृति, सिद्धान्त एवं समस्याएँ: विकल्प, अनुवाद विशेषांक, वर्ष 6, संयुक्तांक-अक्टूबर, 1996 से मार्च 1997, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून-248005,पृष्ठ 55-56 (1996 – 1997)
93. विदेशों में हिन्दीः The Administrator, Vol. XL III (Special Issue on Language, Literature & Culture), Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, MUSSORIE, pp. 141 - 165 (1998)
94. भाषाविज्ञान एवं मानवविज्ञान (डॉ. उदय नारायण तिवारी स्मृति व्याख्यान का संशोधित रूप) % The Research Journal of the Hindi Science Academy, Vol. 42, No.4, Allahabad, pp. 215 - 237 (October, 1999)
95. हिन्दी का भूमंडलीकरणः संकल्प, अंक-6, कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की शोध पत्रिका, पृ. 48-78 (1999)
96. विदेशों में हिन्दी: नया मानदण्ड, वर्ष 7, अंक-13, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल साहित्य शोध संस्थान, वाराणसी, पृ. 30-44 (1999)
97. भाषा विज्ञान एवं मानव विज्ञान: हिन्दुस्तानी, भाग 60, अंक 4, हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद, पृ. 64-86 (1999)
98. हिन्दी भाषा-दशा और दिशाः अजंता वार्षिकी, अंक 7, हिन्दी प्रचार सभा, हैदराबाद, पृ. 13-15 (2000-2001)
99. The Infuences of Prakrit and Apbhransha languages on modern Indo-aryan languages: ऋषिकल्प डॉ. हीरालाल जैन स्मृति ग्रन्थ, डॉ. हीरालाल जैन जन्म शताब्दी समारोह समिति, जबलपुर, पृ. 120-139 (2001)
100. हिन्दी की अन्तरक्षेत्रीय एवं अन्तर्देशीय भूमिकाः आत्म सम्भवा (त्रैमासिक), अंक 2-4, विश्वविद्यालय परिसर, वर्धमान (पश्चिम बंगाल), पृ. 48-51 (2001-2002)
101. प्रज्ञा पुरुष मोटूरि सत्य नारायण (प्रयोजन मूलक हिन्दी के विशेष संदर्भ में): स्रवंति, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा-आन्ध्र, हैदराबाद, पृ. 90-93 (2002-2003)
102. हिन्दी की अन्तर क्षेत्रीय, अन्तर्देशीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय भूमिका: सातवां विश्व हिन्दी सम्मेलन स्मारिका, भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली, पृ. 13-23 (जून, 2003)
103. विश्व हिन्दी न्यास के तृतीय वार्षिक अधिवेशन का मुख्य व्याख्यानः हिन्दी जगत, वर्ष 5, अंक 1, विश्व हिन्दी न्यास, 54, पैरी हिल रोड, न्यूयार्क (यू0एस0ए0), पृ. 42-43 (2004)
104. विश्व में हिन्दी की स्थिति: राष्ट्रभाषा, वर्ष 49, अंक 4, रा0भा0प्र0स0, वर्धा, पृ. 4-6 (2004)
105. हिन्दी भाषा: सूचना भारती, अंक 3, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, पृ० 4 – 8 (2004 - 2005)
106. दशलक्षण धर्मः शुभकल्याणिका, वर्ष 6, अंक 2, श्री कल्याण सेवा आश्रम, पृ. 47-49 (2005)
107. विदेशी विद्वानों द्वारा हिन्दी वाड.मीमांसापरक अघ्ययन: राजभाषा भारती, वर्ष 27, अंक 108, राजभाषा विभाग,गृह मंत्रालय , भारत सरकार , नई दिल्ली, पृ. 23-33 (जनवरी-मार्च , 2005)
108. संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दी: गगनांचल, वर्ष 28, अंक-4,भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद्, नई दिल्ली, पृ. 43-46 ( 2005)
109. हिन्दी संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा हो: बहुवचन, वर्ष 7, अंक 3, महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा,, पृ० 88 - 93 ( अक्टूबर- दिसम्बर, 2005)
110. Substance Of Dharma: Individual And Social Levels: (08.09.2006)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=cd7697 Jain, Dr. Mahavir Saran : Substance Of Dharma: Individual And Social Levels

111. हिन्दी भाषा के प्रयोक्ताओं की संख्या: हिन्दी जगत, वर्ष 7, अंक 1, विश्व हिन्दी न्यास, 54, पैरी हिल रोड, न्यूयार्क (यू0एस0ए0), पृ. 31-33 (2006)
112. प्रज्ञा पुरुष मोटूरि सत्य नारायण एवं प्रयोजनमूलक हिन्दी: विकल्प, प्रयोजनमूलक हिन्दी विशेषांक, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून, पृष्ठ 45-46 (जुलाई - सितम्बर, 2006)
113. डॉ० उदय नारायण तिवारी: बहुवचन, वर्ष 8, अंक 4, महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, पृ० 32 - 38 (जनवरी - मार्च, 2006)
114. मध्ययुगीन संतों का निर्गुण भक्ति काव्यः कुछ प्रश्न: संकल्य, वर्ष 35, अंक 1, हिन्दी अकादमी, हैदराबाद, पृ० 35 – 38 (जनवरी - मार्च, 2007)
115. संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दीः साहित्य अमृत, वर्ष 12, अंक 12, नई दिल्ली, पृ० 18 – 21 (जुलाई, 2007)
116. हिन्दी - उर्दू का अद्वैत: संस्कृति, अंक 13 - 14, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली, पृ० 21 – 30 (2007)
http://indiaculture.nic.in/hindi/Sanskriti-pdf/Sanskriti-Issue-13-14%20(2007).pdf
117. संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दीः (सृजनगाथा, 01 अगस्त, 2007)
http://www.srijangatha.com/HindiWishwa2_Aug2k7

118. भविष्य का धर्म एवं दर्शनः स्वरूप एवं प्रतिमान , (सृजनगाथा, 01 अप्रैल, 2008)http://www.srijangatha.com/Vichaarveathee1_Apr2k8

119. रामधारी सिंह “दिनकर” का काव्य: राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्तिः संकल्य, वर्ष 36, अंक 2, हिन्दी अकादमी, हैदराबाद, पृ० 30 - 33 ( अप्रैल-जून, 2008)
120. Antiquity of Jainism (24.09.2008)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=65998 Jain, Dr. Mahavir Saran : Antiquity of Jainism

121. विज्ञान और प्रोद्योगिकी का विकास एवं हिन्दीः (सृजनगाथा, 01 अक्टूबर, 2008)
http://www.srijangatha.com/HindiWishwa2_Oct2k8
122. गाँधी की प्रासंगिकता (हिन्दी वेब दुनिया, 30 जनवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/.../गाँधी-की-प्रासंगिकता-1090130017_1. Htm
123. डॉ. उदयनारायण तिवारीः व्यक्तित्व एवं भाषावैज्ञानिक चिंतन (सृजनगाथा, 01 फरवरी, 2009)
http://www.srijangatha.com/Hastakshar_Feb2k9
124. रामधारी सिंह 'दिनकर' का काव्य (हिन्दी वेब दुनिया, 03 फरवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/.../रामधारी-सिंह-दिनकर-का-काव्य- 1090203056_1.htm
125. भविष्य का धर्म एवं दर्शन – भाग – 1 (हिन्दी वेब दुनिया, 07 फरवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/religion/religion/article/.../1090207049_1.htm
126. भविष्य का धर्म एवं दर्शन – भाग – 2 (हिन्दी वेब दुनिया, 10 फरवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/religion/religion/article/.../1090210032_1.htm
127. धर्म – दर्शन एवं विज्ञान (हिन्दी वेब दुनिया, 13 फरवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/.../धर्म-दर्शन-एवं-विज्ञान-1090213061_1. htm
128. धर्म – दर्शन एवं लोकतंत्र (हिन्दी वेब दुनिया, 18 फरवरी, 2009)
hindi.webdunia.com/.../धर्म-दर्शन-एवं-लोकतंत्र-1090218027_1. Htm
129. The Concept of Embodied Soul And Liberated Soul In Jain Philosophy (10.03.2009)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=67938 Jain, Dr. Mahavir Saran : The Concept Of Embodied Soul And Liberated Soul In Jain Philosophy
130. Concept of Physical Substance (Pudgala) in Jain Philosophy (19.03.2009)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=68030 Jain, Dr. Mahavir Saran : Concept of Physical Substance (Pudgala) in Jain Philosophy
131. भगवान महावीर एवं जैन दर्शन (हिन्दी वेब दुनिया, 06, अप्रेल, 2009)
hindi.webdunia.com/religion/occasion/.../06/1090406061_1.htm
132. भविष्य का धर्म (रचनाकार, 26 मई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/05/blog-post_26.html

133. भारत की भाषाएँ (रचनाकार, 26 मई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/05/blog-post_9270.html
134. संयुक्त राष्ट्र संघ की आधारिक भाषाएँ एवं हिन्दी (रचनाकार, 26 मई, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/05/blog-post_5569.html
135. रामधारी सिंह दिनकर का काव्यः काव्य के माध्यम से राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति (रचनाकार, 27 मई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/05/blog-post_1993.html
136. सर्व धर्म समभाव (रचनाकार, 31 मई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/05/blog-post_4379.html
137. राम साध्य हैं; साधन नहीं (रचनाकार, 02 जून, 2009)
www.rachanakar.org/2009/06/blog-post_02.html
138. बच्चन के काव्य में निहित मानवीय दृष्टि एवं सामाजिक चेतना (रचनाकार, 03 जुलाई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/07/blog-post_03.html
139. प्रयोजनमूलक हिन्दी की संकल्पना के प्रवर्तक मोटूरि सत्यनारायण (रचनाकार, 17 जुलाई, 2009)
www.rachanakar.org/2009/07/blog-post_17.html

140. संसार के भाषा- परिवार (रचनाकार, 25 अगस्त, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/08/blog-post_25.html
141. अध्यात्म एवं विज्ञान (रचनाकार, 07 सितम्बर, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/09/blog-post_5417.html
142. विदेशी विद्वानों द्वारा हिन्दी वाड्.मीमांसापरक अध्ययन (फिलॉलाजिकल स्टडीज़) (सन् 1940 ईस्वी तक) (रचनाकार, 12 सितम्बर, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/09/blog-post_176.html
143. मध्ययुगीन संतों का निर्गुण-भक्ति-काव्य (रचनाकार, 04 अक्टूबर, 2009)
www.rachanakar.org/2009/10/blog-post_1347.html
144. भारत की बहुभाषिकता और भाषिक एकता (रचनाकार, 14 अक्टूबर, 2009)
www.rachanakar.org/2009/09/blog-post_20.html
145. विदेशों में हिन्दी शिक्षणः समस्याएँ और समाधान (हिन्दी वेब दुनिया, 28 अक्टूबर, 2009)
hindi.webdunia.com/.../विदेशों-में-हिन्दी-शिक्षण- समस्याएँ-और-समाधान-1091028028_1.htm
146. कबीर की साधना (रचनाकार, 17 नवम्बर, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/11/blog-post_17.html
147. आत्मा एवं परमात्मा का भेद तात्त्विक नहीं है; भाषिक है (रचनाकार, 25 नवम्बर, 2009)
http://www.rachanakar.org/2009/11/blog-post_25.html
148. सोलह कलाओं के अवतार श्री कृष्णः (रचनाकार, 03 जनवरी, 2010)
www.rachanakar.org/2010/01/blog-post_03.html
149. भगवान महावीर (रचनाकार, 28 मार्च, 2010)
www.rachanakar.org/2010/03/blog-post_3876.html
150. हिन्दी भाषा का क्षेत्र एवं हिन्दी के क्षेत्रगत रूपः (रचनाकार, 05 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/1.html
151. हिन्दी एवं उर्दू का अद्वैतः (रचनाकार, 06 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/2.html
152. हिन्दी की अन्तरदेशीय भूमिकाः रूपः (रचनाकार, 06 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/3.html
153. विदेशी विद्वानों द्वारा हिन्दी वाङ्मीमांसापरक अध्ययनः (फिलॉलाजिकल स्टडीज) (सन् 1940 ईस्वी तक) रूपः (रचनाकार, 06 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/4.html
154. विदेशों में हिन्दी शिक्षण : समस्याएँ और समाधान (रचनाकार, 06 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/5.html
155. द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् विदेशों में हिन्दी भाषापरक अध्ययनः (रचनाकार, 06 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/6.html
156. द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् विदेशों में हिन्दी साहित्य सृजन एवं साहित्य समीक्षाः (रचनाकार, 07 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/7.html
157. द्वितीय महायुद्ध के पश्चात् हिन्दी की साहित्यिक कृतियों का विदेशी भाषा में तथा विदेशी साहित्यिक कृतियों/लोककथाओं का हिंदी में अनुवादः (रचनाकार, 07 जुलाई, 2010)
http://www.rachanakar.org/2010/07/8_07.html
158. संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषाएँ एवं हिन्दीः विश्व हिन्दी पत्रिका, विश्व हिन्दी सचिवालय, मॉरीशस, पृष्ठ 17 – 22
(2011)
http://vishwahindi.com/hi/downloads/vhp/vhp2011.pdf
159. गाँधी दर्शन (रचनाकार, 05 अक्टूबर, 2012)
www.rachanakar.org/2012/10/blog-post_1635.html
160. हिन्दी भाषा के विविध रूप (रचनाकार, 14 सितम्बर, 2012)
www.rachanakar.org/2012/09/blog-post_3077.html
161. भाखा बहता नीरः साहित्य अमृत, प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली, (अक्टूबर, 2012)
162. हिन्दी में वैज्ञानिक लेखन एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए करणीयः विचारार्थ कुछ विचार (रचनाकार, 12 फरवरी, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/02/blog-post_9501.html
163. भगवान शिव एवं शैव दर्शनः (रचनाकार, 05 अप्रैल, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_3823.html
164. भारत में प्राचीन काल में नारी की स्थितिः (रचनाकार, 12 अप्रैल, 2013)
www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_12.html
165. भारोपीय भाषा- परिवारः (रचनाकार, 30 अप्रैल, 2013)http://www.rachanakar.org/2013/04/blog-post_4978.html
166. भाषा-परिवार एवं विश्व- भाषाएः (प्रवक्ता, 04 मई, 20130
http://www.pravakta.com/language-family-and-world-languages
167. भारत की भाषाओं के अध्ययन की रूपरेखा एवं भाषाओं के विवरण के आधारः (प्रवक्ता, 17 मई, 2013)
http://www.pravakta.com/study-design-of-indian-languages-and-description-of-the languages

168. संस्कृत भाषा काल में विभिन्न समसामयिक अन्य लोकभाषाओं / जनभाषाओं का व्यवहारः (रचनाकार, 25 मई, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/05/blog-post_5218.html
169. पालि भाषाः व्युत्पत्ति, भाषा-क्षेत्र एवं भाषिक प्रवृत्तियाँ (रचनाकार, 30 मई, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/05/blog-post_8285.html
170. मध्य भारतीय आर्य-भाषाओं का प्रथम विकास-कालः अभिधान एवं काल-सीमा (रचनाकार, 03 जून, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_5248.html
171. साहित्यिक प्राकृतों (शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी, अर्ध-मागधी, पैशाची) को भिन्न भाषाएँ मानने की परम्परागत मान्यताः पुनर्विचार (रचनाकार, 07 जून, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_1496.html
172. स्वाधीनता संग्राम के युग में दक्षिण-भारत में हिन्दी का प्रचार-प्रसार (रचनाकार, 28 जुलाई, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/07/blog-post_4027.html
173. भारोपीय परिवार की भारतीय आर्य भाषाएँ : (प्रवक्ता, 01 अगस्त, 2013)
http://www.pravakta.com/indian-aryan-languages-of-the-indo-european-family
174. प्रेमचन्द का कथा-साहित्यः भावगत और भाषिक प्रदेयः (रचनाकार, 01 अगस्त, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post.html
175. तुलसीदास के रामः (रचनाकार, 13 अगस्त, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_7677.html
176. स्वामी विवेकानन्दः मानव सेवा एवं सर्व धर्म समभाव (रचनाकार, 30 अगस्त, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/08/blog-post_9241.html
177. भवानी प्रसाद मिश्रः सामान्य से दिखने वाले असाधारण कवि (रचनाकार, 02 सितम्बर, 2013)
http://www.rachanakar.org/2013/09/blog-post_2.html
178. हिन्दी-उर्दू का अद्वैतः अभिनव इमरोज़, वर्ष – 3, अंक – 17, सभ्या प्रकाशन, नई दिल्ली, पृष्ठ 34 – 43 (जनवरी, 2014)
180. The Doctrine of Karma in Jain Philosophy (Posted: 09.03.2014)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=98354
181. Meaning of Karma in Jain Philosophy (Posted: 10.03.2014)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=98355
182. The bondage from point of view of karmic-flow in Jain Philosophy (Posted: 11.03.2014)
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183. How an abstract and spiritual be related with concrete and material (Posted: 11.03.2014)
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184. How the effects of concrete karmas are possible on abstract soul (Posted: 11.03.2014) http://www.herenow4u.net/index.php?id=98387
185. Types of karma in Jain Philosophy (Posted: 12.03.2014)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=98388
186. The process of attachment of Karma matter with the soul (Posted: 13.03.2014)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=98389
187. The Scientific and Psychological study of the doctrine of karma (Posted: 14.03.2014)
http://www.herenow4u.net/index.php?id=98391
188. The root causes of the influx and bondage of the karma in Jain Philosophy (Posted: 15.03.2014) http://www.herenow4u.net/index.php?id=983921
189. Types of bondage in Jain Philosophy (Posted: 16.03.2014) http://www.herenow4u.net/index.php?id=98393
190. Sayog Kevali Jin or an Arhanta (Posted: 17.03.2014) http://www.herenow4u.net/index.php?id=98394
191. द्रविड़ परिवार की भारतीय भाषाएँ (प्रवक्ता, 24 मार्च, 2014)
http://www.pravakta.com/the-dravidian-family-of-indic-languages
192. आग्नेय परिवार (आस्‍ट्रो-एशियाटिक) की भारतीय भाषाएँ (रचनाकार, 28 मार्च 2014)
http://www.rachanakar.org/2014/03/blog-post_28.html
193. तिब्बत-बर्मी परिवार की भारतीय भाषाएँ (रचनाकार, 05 अप्रैल, 2014)
http://www.rachanakar.org/2014/04/blog-post_8211.html
194. अपभ्रंश एवं आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं के संक्रमण-काल की रचनाएँ (प्रवक्ता, 03 अप्रैल, 2014)
http://www.pravakta.com/apabhra%E1%B9%83sa-modern-indian-aryan-languages-transition-period-of-compositions#comment-46629
195. आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में उपलब्ध प्रथम साहित्यिक रचना-कृति (रचनाकार, 13 अप्रैल, 2014)
http://www.rachanakar.org/2014/04/blog-post_6900.html#l


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