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ISSN 2292-9754

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05.20.2016


इंग्लैंड के महान उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस की अमर कृति "ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स"

चार्ल्स डिकेंस (1812-1870) इंग्लैंड के विक्टोरियन युग के महान उपन्यासकार हैं जिनके उपन्यास पिकविक पेपर्स, डेविड कॉपरफील्ड, ऑलीवर ट्विस्ट, ए टेल ऑफ टू सिटीज़ आदि विश्व कथा साहित्य में अपना विशेष स्थान रखते हैं। उन्नीसवीं शताब्दी का प्रारभिक काल इंग्लैंड में औपन्यासिक रचना का सुवर्ण काल था। इस युग में अंग्रेज़ी के एक से बढ़कर एक महान उपन्यासकार इंग्लैंड में पैदा हुए। हेनरी फील्डिंग, वाल्टर स्कॉट, ऑलीवर गोल्डस्मिथ, थॉमस हार्डी, एमिली और शार्लेट ब्रांटे, जेन ऑस्टिन आदि कालजयी उपन्यासकारों ने इसी युग में इंग्लैंड के कथा साहित्य को कलात्मक शिखर पर स्थापित किया। इनकी रचनाएँ कालजयी साहित्य के रूप में विश्व साहित्य जगत में सुस्थिर हो गईं। विश्व साहित्य में उपन्यास विधा आधुनिक काल में विकसित एक अत्याधुनिक नवीन साहित्यिक विधा है जिसका प्रारम्भ सर्वप्रथम फ्रांस में हुआ। तदुपरान्त यह यूरोप की अन्य भाषाओं में विकसित और सुसंपन्न होकर भारत में उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में बँगला भाषा से अन्य भारतीय भाषाओं में विकसित हुआ। भारतीय उपन्यास साहित्य पर अंग्रेज़ी, फ्रांसीसी और रूसी कथाकारों एवं उनकी रचनाओं का गहरा प्रभाव पड़ा। चार्ल्स डिकेंस अंग्रेज़ी के ऐसे ही महान उपन्यासकार हैं जिनका प्रभाव भारतीय कथाकारों पर आज भी देखा जा सकता है। इंग्लैंड के उन्नीसवीं सदी के प्रारम्भिक दौर की सामाजिक और राजनीतिक स्थितियाँ डिकेंस के उपन्यासों के केंद्र में यथार्थवादी शैली में उद्घाटित होती हैं। डिकेंस ने अपने उपन्यासों के माध्यम से तत्कालीन अंग्रेज़ी समाज की समाजशास्त्रीय आलोचना प्रस्तुत की है। इनके समकालीन साहित्यकारों ने डिकेंस के रचना कौशल, सामाजिक दृष्टि और राजनीतिक चेतना की खुलकर प्रशंसा की है।

"ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स" उपन्यास डिकेंस द्वारा संपादित "ऑल द इयर राउण्ड" नामक एक साप्ताहिक साहित्यिक पत्रिका में सर्वप्रथम धारावाहिक रूप में सन् 1860 में प्रकाशित हुआ। तदुपरान्त सन् 1861 में तीन खंडों में (544 पृष्ठ) यह पुस्तकाकार में इंग्लैंड के चैपमैन और हॉल नामक प्रकाशन संस्था ने प्रकाशित किया। धारावाहिक रूप में ही इस उपन्यास ने अंग्रेज़ी साहित्य प्रेमियों में अपार लोकप्रियता हासिल कर चुकी थी। डिकेंस को इंग्लैंड के निम्न वर्गीय सामाजिक परिवेश के चित्रण में विशेष रुचि थी। इंग्लैंड के देहाती और क़स्बाई वातावरण में पल रहे निर्धन और वंचित सामाजिक वर्ग के जीवन के यथार्थपूर्ण चित्रण में डिकेंस सिद्धहस्त थे। उनके उपन्यासों का प्रमुख आकर्षण, पारिवारिक और सामाजिक उपेक्षा, अपमान और यातनाग्रस्त बाल्य जीवन का मार्मिक वर्णन रहा है। डेविड कॉपरफील्ड, ओलिवर ट्विस्ट और ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स के कथानक इसी संवेदना और सामाजिक परिवेश की पृष्ठभूमि में रूपायित हुए हैं। डिकेंस भी थॉमस हार्डी की भाँति मनुष्य के जीवन में उत्थान और पतन के लिए प्रकृति और नियति को ही स्वीकार करते हैं।

"ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स" अर्थात मनुष्य की महान आकांक्षाएँ तथा उन आकांक्षाओं की पूर्ति की संभावनाएँ उसे नियति प्रदान करती है। नियति का खेल निराला होता है जिसमें जीवन के किसी भी अनचाहे मोड़ पर कोई ऐसा राही मिल जाता है जो किसी के भाग्य को दरिद्रता से संपन्नता में बदल जाता है। ऐसी चमत्कारी घटनाएँ मनुष्य के जीवन में घटित होती हैं, डिकेंस के "ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स" की कहानी इसी नियतिचक्र के फेर को दर्शाती है। इंग्लैंड की बर्फ़ीली वर्षा में डूबी, दलदलों में बसे "केन्ट" क़स्बे के एक निर्धन गंवार लोहार परिवार के अनाथ बालक "फिलिप पिरिप" उर्फ़ "पिप" के जीवन की रोमांचक कहानी है। आत्मकथात्मक शैली में कथा वाचन इस उपन्यास की विशेषता है। आदि से अंत तक कथानायक "पिप" अपने जीवन की कथा स्वयं सुनाता है।

इस कहानी में लेखक ने ग़रीबी और अमीरी दोनों की चरम स्थितियों का वर्णन अपनी विशेष कलात्मक शैली में चित्रित किया है जो इसे अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। उपन्यास में अभिजात धनिक वर्ग की "मिस हैविशम" नामक प्रेम में धोखा खाई हुई सनकी और अहंवादी आत्मकेंद्रित उम्रदराज सह-नायिका है जो अपने असफल प्रेम का बदला नई पीढ़ी के प्रेमियों से लेना चाहती है। एक तरह से उपन्यास की कहानी को मिस हैविशम ही नियंत्रित करती है और इसे अंत तक पहुँचाती है। मिस हैविशम का जीवन उपन्यास में कई अनबूझी पहेलियों को जन्म देता है जिसे सुलझाने के प्रयत्न में उपन्यास का नायक "पिप" उलझकर रह जाता है। इन दोनों के बीच उपन्यास की नायिका, "पिप" की बाल सखी "एस्टेला" है जिससे पिप बचपन से ही प्यार करता है किन्तु अपने प्रेम को इसलिए व्यक्त करने से डरता है क्योंकि उन दोनों के बीच अमीरी और ग़रीबी की गहरी खाई है जिसे भरना पिप के लिए असंभव था। बालिका एस्टेला, मिस हैविशम के संरक्षण में पलकर बड़ी होती है। उसके स्वभाव में मिस हैविशम निम्न वर्ग के समाज के प्रति नफ़रत के भाव भरती जाती है जिससे उसके मन में बालक पिप के प्रति विशेष प्रकार का तिरस्कार और नफ़रत का भाव पैदा होता है जो उसके जीवन के अंत तक उसे जकड़े रहता है। ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास उलझी हुई प्रेम कहानी के परिप्रेक्ष्य में तद्युगीन विक्टोरियन युग के इंग्लैंड के उच्च एवं निम्न वर्ग के बीच की वर्ग चेतना से उभरे एक सामाजिक एवं आर्थिक संघर्ष, नैतिक मूल्यों के टकराहट को प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत उपन्यास, साहित्य के अध्येताओं के साथ साथ साधारण पाठक वर्ग में भी अत्यंत लोकप्रिय हुआ। ग्रेट एक्सपेकटेशन का विश्व की अनेकों भाषाओं में अनुवाद हुआ और विश्व साहित्य में इसे एक क्लासिक का दर्जा हासिल है। अपने प्रकाशन काल से ही इसे वैश्विक पहचान और प्रसिद्धि प्राप्त हुई। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने इस उपन्यास के कथानक, प्रस्तुति और शिल्प की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे सुंदर, चित्ताकर्षक और विलक्षण उपन्यास कहा।

ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास का कथानक, सन् 1812 के इंग्लैंड की सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित है।

सन् 1812 के क्रिसमस की ठंडी बर्फ़ीली धुँधली पूर्व संध्या में सात साल का अनाथ बालक "पिप" जब गाँव के चर्च के कोने में स्थिति अपनी माँ की कब्र पर फूल चढ़ाने जाता है तो वहाँ उसका सामना जेल से भागे हुए एक कुरूप और भयावह सूरत वाले लिए एक क़ैदी से हो जाता है। वह क़ैदी "पिप" को दबोचकर उसका नाम और पता पूछता है। जब उसे पता चलता है की पिप एक लोहार परिवार में अपनी बहन के साथ रहता है तो वह उससे कुछ खाना और हथकड़ियाँ काटने के लिए आरी की माँग करता है। पिप अपनी ग़ुस्सैल बहन और उसके लोहार पति "जो गार्जेरी" से छिपाकर उस भगोड़े क़ैदी के लिए गरम कोट, खाने के लिए रोटी थोड़ी सी शराब के साथ और एक आरी ले जाकर उस क़ैदी को दे आता है। दूसरे दिन पता चलता है कि वह क़ैदी अपने एक अन्य साथी के साथ पकड़ा गया और कारागार भेज दिया गया।

उस गाँव में "मिस हैविशम" नामक एक विचित्र सी अधेड़ उम्र की धनी अविवाहित महिला, दुल्हन की पुरानी पोशाक हमेशा पहने अपनी खंडहरनुमा हवेली, "सैटिस हाउस" में रहा करती है। इस हवेली में हमेशा अंधकार छाया रहता है। इसके विशाल शयन कक्ष में मिस हैविशम एक आलीशान आसन पर सदैव मादक मुद्रा में बैठी दिखाई देती है। उसे अपनी सेवा के लिए एक बाल-सेवक की तलाश रहती है। पिप के मामा उसे हैविशम के पास लेकर जाते हैं। वहाँ "सैटिस हाउस" हवेली के प्रांगण में पिप, मिस हैविशम की गोद ली हुई लड़की "एस्टेला" को देखता है। पिप पहली ही नज़र में एस्टेला की सुंदरता से प्रभावित होकर उससे प्रेम करने लग जाता है। किन्तु एस्टेला घमंडी और रौबदार स्वभाव की लड़की थी, वह पिप को अपमान और उपेक्षा की दृष्टि से ही देखा करती है। बालिका एस्टेला को पिप की दीनता और ग़रीबी से नफ़रत थी। हैविशम की तीखी नज़रें एस्टेला के प्रति पिप के मन में पनपने वाले प्रेम को पहचान लेती हैं। वह पिप को आगाह करती है की एस्टेला एक महत्वाकांक्षी लड़की है, इसलिए उसे एस्टेला से सतर्क रहना चाहिए। किन्तु पिप के मन में एस्टेला के लिए प्यार बढ़ता जाता है। लेडी हैविशम की कोठी में एक दुबला-पतला क्षीणकाय लड़का हर्बर्ट, पिप को छेड़ा करता है। दोनों कभी-कभी बॉक्सिंग करते हैं जिसमें अक्सर पिप, हर्बर्ट को बुरी तरह पीट देता था। एस्टेला इन दोनों की प्रतिस्पर्धा को देखती रहती है। कुछ समय बाद एस्टेला पढ़ाई के लिए लंदन चली जाती है। पिप भी अपनी आजीविका के लिए मिस हैविशम की सलाह पर अपने जीजा "जो गार्जेरी" के लोहारी के पेशे को अपनाने के लिए काम सीखना शुरू कर देता है। इस तरह चार वर्ष बीत जाते हैं।

अकस्मात एक दिन मिस्टर जागर्स नामक एक वकील पिप के द्वार पर आ खड़ा होता है। वह पिप के भाग्य का द्वार खोल देता है। वह किसी गुप्त उपकारी धनी व्यक्ति की ओर से पिप को अपने भविष्य निर्माण के लिए एक बड़ी धन राशि उपलब्ध कराने के लिए आता है। वह उपकारी व्यक्ति मिस्टर जागर्स को पिप का संरक्षक नियुक्त करता है। पिप, मिस हैविशम को ही इस सहायता का कारक मानता है। वह लंदन जाने से पहले मिस हैविशम से भेंट कर एक नए जीवन की शुरूआत के लिए विदा होता है।

लंदन में पिप का जीवन एक नई दिशा में चल पड़ता है। लंदन में पिप, अपने बाल मित्र हर्बर्ट पॉकेट के साथ मिलकर "बर्नार्ड इन" में भद्र जीवन बिताना शुरू कर देता है। यहाँ आकर उसे हर्बर्ट पॉकेट से मिस हैविशम के जीवन के बारे में बहुत सारे तथ्य जानने को मिलते हैं। पिप को हर्बर्ट से पता चलता है कि मिस हैविशम अपने प्रेमी के छल का शिकार होती है । उसका प्रेमी, विवाह के दिन उसे धोखा देकर भाग जाता है, जिससे हैविशम विक्षिप्त होकर परपीड़न की मनोदशा में पहुँच जाती है । वह पुरुषों से नफ़रत करती है। वह स्वयं को पुरुष समाज से दूर अपनी हवेली की चारदीवारी में बंद कर लेती है। वह अपने असफल प्रेम का बदला हर पुरुष से लेना चाहती है।

पिप, हर्बर्ट पॉकेट के पिता मिस्टर मेथ्यू पॉकेट से शिक्षा प्राप्त करता है। उसका संरक्षक मिस्टर जागर्स पिप की शिक्षा और लंदन में रहने के लिए गुप्त उपकारी की ओर से आवश्यक धन राशि उपलब्ध कराता रहता है।

एक लंबे समय के बाद"जो गार्जेरी" पिप को देखने और उसे हैवीशम का एक संदेश देने लंदन आता है। वह "बर्नार्ड इन" में पिप के अभिजात रहन-सहन को देखकर ख़ुश होता है। पिप को संदेश मिलता है कि हैविशम ने उसे सैटिस हाउस में एस्टेला से मिलने के लिए बुलाया है। इतने दिनों में पिप, हर्बर्ट से एस्टेला के प्रति अपने प्रेम से अवगत करा देता है।

इस बीच गाँव में पिप की बहन की मृत्यु हो जाती है तब पिप गाँव जाता है। उन्हीं दिनों वह सैटिस हाउस जाता है जहाँ वह एस्टेला से मिलता है। पिप के प्रति एस्टेला का ठंडापन और उदासीनता बरसों बाद भी उसी तरह क़ायम रहती है। युवावस्था में एस्टेला की सुंदरता को देखकर पिप चकित रह जाता है। वह लंदन लौट आता है। हर्बर्ट और पिप दोनों मिलकर जागर्स के दिए हुए धन का इतना दुरुपयोग करते हैं कि पिप भारी कर्ज़ में डूब जाता है। तभी उसे जागर्स सूचित करता है कि उसके हितकारी व्यक्ति ने उसके लिए सालाना पाँच सौ पाउंड की राशि तय कर दी है। भाग्य एक बार फिर पिप का साथ देता है। वह अपने आर्थिक संकट से उबरने का प्रयास करता है। उसे लंदन के अभिजात उच्च वर्गीय समाज में अक्सर एस्टेला दिखाई देती रहती है। ऐसे ही एक बार वह रिचमंड के असेंबली बॉल में एस्टेला को बेन्ट्ले ड्रमल नामक नवयुवक के साथ नृत्य करते हुए देखता है। पिप को मालूम था कि बेन्ट्ले अत्यंत क्रूर और नीच स्वभाव का लोभी युवक है। एस्टेला और बेन्ट्ले की नज़दीकियाँ बढ़ती जाती हैं।

पिप को तेईस वर्ष की उम्र में उसके गुप्त हितकारी व्यक्ति की जानकारी मिलती है। वह गुप्त व्यक्ति एबेल मैगविच नामक वही क़ैदी था जिसकी बरसों पहले पिप ने मदद की थी। एबेल मैगविच न्यू साऊथ वेल्स में अपनी सज़ा काटने के बाद एक धनी व्यक्ति बनता है। उसे कारागार से छूट तो जाता है किन्तु उसे इंग्लैंड में प्रवेश करने की आज़ादी नहीं थी। फिर भी वह इतने बरसों बाद पिप से मिलने के लिए कानून का उल्लंघन करने का जोखिम लेकर लंदन आता है। पिप उसके लिए प्रेरणा स्रोत बन गया था। वह पिप के उस अहसान को नहीं भूलता। पिप का हृदय एबेल मैगविच के प्रति कृतज्ञता की भावना से द्रवित हो जाता है। पिप और हर्बर्ट दोनों एबेल मैगविच को किसी तरह सतर्कता से समुद्र के रास्ते इंग्लैंड से बाहर निकालने की योजना बनाते हैं।

इसी दौरान पिप को पता चलता है कि एस्टेला, बेन्ट्ले ड्रमल से विवाह करने जा रही है। पिप अपने प्रेम को एस्टेला के सम्मुख व्यक्त करता है किन्तु एस्टेला उसे ठुकरा देती है। वह स्वयं पिप अपने विवाह के प्रस्ताव को पिप को बताती है। एस्टेला के इस बर्ताव से पिप आहत होकर हैविशम के पास पहुँचता है और अपने रोष और असंतोष को व्यक्त करता है। तभी वह हैविशम के परपीड़न स्वभाव को जान पाता है। वह चाहती थी कि एस्टेला, पिप के प्रेम को ठुकराकर उसे आहत करे। इसीलिए जब एस्टेला पिप का तिरस्कार कर उसके प्रेम को अपमानित करती है तो हैविशम की आत्मा संतुष्ट होती है। वह किसी के प्रेम को सफल होते नहीं देख सकती थी इसीलिए वह पिप को एस्टेला से प्रेम करने के लिए प्रोत्साहित तो करती है किन्तु दूसरी ओर वह एस्टेला को विपरीत दिशा में प्रेरित करती है। उसी अवसर पर हैविशम पिप को बताती है कि वास्तव में एस्टेला उसकी बेटी नहीं थी, उसे जागर्स ने दो वर्ष की आयु में कहीं से लाकर दिया था। पिप, मन में भयानक अशांति और आक्रोश के साथ हैविशम की हवेली से बाहर निकाल आता है। तभी अचानक हैविशम की पोशाक में जलते हुए चिराग से आग लग जाती है। वही आग समूची हवेली को जला डालती है। हैविशम आग की लपटों में घिर जाती है। उस आग में से हैविशम को बचाने की कोशिश में पिप बुरी तरह ज़ख़्मी हो जाता है। वह मिस हैविशम को आग से बाहर निकालता है किन्तु उसे बचा नहीं पाता, हैविशम आग से झुलस कर मर जाती है। इसके साथ ही मिस हैविशम की कहानी खत्म हो जाती है। तभी एबेल मैगविच का वकील मिस्टर जागर्स, जो कि मिस हैवीशैम के संपत्ति का भी सलाहकार था, वह इस रहस्य का उद्घाटन करता है कि एस्टेला वास्तव में एबेल मैगविच की बेटी है जिसे शैशवावस्था में वह मिस हैविशम को सौंपता है।

पिप और हर्बर्ट, मैगविच को पुलिस के घेरे से बचाकर समुद्री रास्ते से इंग्लैंड से बाहर निकालने के प्रयत्न में जुट जाते हैं। किन्तु मैगविच के एक साथी क़ैदी के द्वारा पुलिस को मैगविच के इंग्लैंड में मौजूदगी की ख़बर दिए जाने से नाव पर सवार मैगविच पर पुलिस गोलियाँ चलाती है। मैगविच पुलिस की गोलियों से घायल होकर पकड़ा जाता है। पुलिस की निगरानी में अस्पताल में मरणासन्न अवस्था में पड़ा रहता है। पिप अपने वकील जागर्स से मैगविच को किसी भी तरह से बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता है, लेकिन मैगविच अस्पताल में दम तोड़ देता है। अंतिम क्षणों में पिप उसे उसकी बेटी एस्टेला के जीवित रहने की ख़बर दे देता है। मैगविच के द्वारा पिप को दी गई सारी संपत्ति पिप के कर्ज़ के एवज़ में अदलात ज़ब्त कर लेती है जिससे पिप कंगाल हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह पुलिस की गिरफ़्त में आ जाता है। तभी उसके जीजा "जो" उसके सारे कर्ज़ चुकाकर उसे ऋणमुक्त कर देते हैं। नियति के इस खेल में पिप के सनक्त काल में उसका जीजा "जो गार्जेरी" उसकी सहायता करता है। पिप अपने व्यवहार के लिए पश्चाताप करता हुआ"जो" से माफी मांगता है। वह "जो" को उसके सारे पैसे लौटाने का वचन देकर हर्बर्ट की कंपनी में काम करने के लिए इंग्लैंड छोड़कर "कैरो" चला जाता है।

इस प्रकरण के ग्यारह वर्ष बाद पिप इंग्लैंड लौटकर अपने गाँव में लौटता है और जर्जर अवस्था में खड़ी सैटिस हाउस हवेली में प्रवेश करता है। उसे अँधेरे में लेडी हैविशम के आसन पर बैठी हुई, अत्याचारी "बेंट्ले ड्रमल" की विधवा एस्टेला श्रीविहीन मुद्रा में दिखाई देती है। एस्टेला अपने बीते जीवन के लिए प्रायश्चित्त करने की इच्छा व्यक्त करती है। वह पिप से अपने दुर्व्यवहार के लिए क्षमा याचना करती है। पिप, एस्टेला का हाथ थाम कर "सैटिस हाउस से बाहर निकलता है। वे दोनों लेडी हैवीशैम की मनहूस यादों से दूर चले जाते हैं।

ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास में मिस हैविशम बहुत ही जटिल पात्र है जिसके चरित्र चित्रण में डिकेंस की औपन्यासिक कला अद्भुत रूप से उद्घाटित हुई है।

चार्ल्स डिकेंस के "ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स" (1861) और फ्रांस के विक्टर ह्यूगो के "ले मिजरेबल्स" (1962) उपन्यासों का रचना काल लगभग एक ही है। डिकेंस की कर्मभूमि इंगलैंड और ह्यूगो की फ्रांस थी। "ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स" के "एबेल मैगविच" और "ले मिसरेब्ल्स" के "ज्यां वालज्यां", में समानता है। दोनों सजायाफ़्ता क़ैदी पात्र हैं किन्तु दोनों अद्भुत किस्म के परोपकारी हैं। जिनके जीवन का लक्ष्य वंचितों और निर्धनों की सहायता करना है। मैगविच और ज्यां वालज्यां दोनों ही कथा के मूल आधार हैं। दोनों ही उपन्यास मानव मूल्यों के पक्षधर हैं। यह एक विचित्र संयोग है कि दोनों ही रचनाएँ क्लासिक के रूप में विश्व साहित्य की अनमोल धरोहर हैं।

ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स एक संवेदनाप्रधान उपन्यास है। डिकेंस ने इस उपन्यास के माध्यम से मनुष्य के जीवन को अपार संभावनाओं से भरा हुआ दर्शाया है। नियति भी मनुष्य के जीवन को संचालित करती है। मानव जीवन परिस्थितियों का शिकार होता है। इंग्लैंड में ऐसी कहानियाँ उन दिनों काफ़ी प्रचलित हुआ करती थीं। शहरी सभ्यता से दूर इंग्लैंड के दलदली इलाकों में निर्मित ऐसी मध्ययुगीन हवेलियों, कोठियों और इमारतों में ऐसी ही विफल प्रेम की अनगिनत कहानियाँ पसरी पड़ी हैं जिन्हें अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के लेखकों ने उपन्यासों में विशेष कलात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है। डिकेंस ने अपने जीवन काल में ही एक विलक्षण नैरेटर तथा सशक्त मनोवैज्ञानिक कथाकार के रूप में ख्याति प्राप्त की। डिकेंस के ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स ने परवर्ती काल के अनेकों उपन्यासकारों को इसी विषयवस्तु पर ऐसे ही उपन्यास लेखन के लिए प्रेरित किया।

चार्ल्स डिकेंस कृत ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास पर सिनेमा और टीवी के लिए अनेकों बार फिल्में बनीं। सन् 1917 से लेकर 2016 तक लगभग 19 फिल्में आज तक बनीं हैं जो कि इस उपन्यास की लोकप्रियता को सिद्ध करती हैं। सन् 1917 और 1922 में हॉलीवुड में इसी नाम से मूक फिल्में बनीं। सन् 1934 में पहली बार हॉलीवुड के ही निर्माताओं ने इस उपन्यास को सवाक फ़िल्म के रूप में निर्मित किया। सन् 1946 में हॉलीवुड में निर्मित ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स फ़िल्म आज तक चर्चित फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। यह फ़िल्म हॉलीवुड के सुप्रसिद्ध निर्देशक डेविड लीन (ब्रिटिश मूल) के निर्देशन में श्वेत-श्याम प्रारूप में बनी थी। इसमें मुख्य भूमिकाओं में पिप के पात्र के लिए जॉन मिल्स, हर्बर्ट की भूमिका में युवा अभिनेता एलेक गिनिस, जो आगे चलकर हॉलीवुड के महान अभिनेता कहलाए, मेरिटीना हंट ने हैविशम के पात्र को जीवित कर दिया, वेलेरिक हॉब्सन एस्टेला की भूमिका में अपनी सुंदरता से दर्शकों का मन मोह लिया। दर्शक इसी फिल्मी संस्करण को आज भी देखना पसंद करते हैं। फ़िल्म का श्वेत-श्याम प्रारूप इस कहानी के परिवेश के लिए उपयुक्त सिद्ध हुआ और उस काल के लंदन और आसपास के परिवेश को जीवंत दर्शाने के लिए इस फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी प्रशंसनीय है। यह फ़िल्म एक संवाद प्रधान फ़िल्म है जिसमें "पिप" की ज़ुबानी सारी फ़िल्म की कथा खुलती जाती है। सन् 1998 में निर्मित फ़िल्म की एक विशेषता यह रही कि इसमें उपन्यास की कथा के परिवेश और पृष्ठभूमि को इंग्लैंड की पृष्ठभूमि से अलग करके समूची कहानी को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में घटित होते हुए रंगीन प्रारूप में फिल्माया गया। इसकी पटकथा में मूल उपन्यास की कहानी से काफ़ी फेर बदल किए गए। एस्टेला की भूमिका में ग्विनेथ पेल्ट्रो मौजूद हैं जो अपनी कृशकाय ख़ूबसूरती के लिए इन दिनों प्रसिद्ध हैं। इसे समकालीन फ़िल्मी रूपान्तरण कहा गया। इसका निर्देशन एलेन्सो क्यूरॉन ने किया है। इसमें "पिप" को "फिन" बना दिया गया और इसके लिए ईथन हॉक ने अभिनय किया है। मिस हैवीशैम का नामकरण नोरा डिंसमूर किया गया। इस फ़िल्म ने भी बहुत ख्याति अर्जित की। इसमें आज के हॉलीवुड के महान कलाकार रॉबर्ट डिनेरो ने एबेल मैगविच की भूमिका अदा की। इसमें कथा नायक "फिन" एक ख्यातिप्राप्त चित्रकार बनता है जो एस्टेला के ही चित्र बनाता है। इसे आज के अमेरिकी परिवेश में फ़िल्मया गया है इस कारण इसमें एस्टेला और फिन के रोमांस का चित्रीकरण भी काफ़ी खुलकर किया गया। इसके विपरीत सन् 2012 में एक बार फिर ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास हॉलीवुड के फ़िल्म निर्माताओं खूबसूरत रंगों में निर्मित की गई। इस बार इसे पूरी तरह इंग्लैंड के वास्तविक परिवेश में ही डिकेंस के वर्णन के अनुरूप इसे उपन्यास के अति निकट रखा गया। इसकी कहानी और पटकथा मेन मूल कथा से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। इस फ़िल्म का निर्देशन हॉलीवुड के निर्देशक माईक नेवेल ने किया, पिप की भूमिका जेरिमी इरविन और मैगविच की भूमिका में मशहूर रेल्फ फीनिस दिखाई देते हैं।

2016 में हाल ही में इस महान उपन्यास को "फितूर" के नाम से हिंदी में रूपांतरित किया गया। इसके लिए फ़िल्म की कहानी में बहुत अधिक फेर बदल कर दिया गया। फ़िल्म का अंत उपन्यास के अंत से पूरी तरह भिन्न है। इस फ़िल्म का निर्देशन अभिषेक कपूर ने किया। इसमें बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्री कैटरीना कैफ ने फिरदौस (एस्टेला) की और आदित्यराय कपूर ने नूर (पिप) और तब्बू ने बेग़म (हैविशम) की भूमिका निभाई है। फ़िल्म की कहानी की पृष्ठभूमि के लिए निर्माता निर्देशक ने कश्मीर को चुना है। उपन्यास की मूल कथा में फेर-बदल के कारण फ़िल्म पूरी तरह से विपरीत दिशा की ओर मुड़ गई। एक तरह से फ़िल्म ने उपन्यास की आत्मा को कुचल कर रख दिया। अनावश्यक गीत संगीत और कहानी की धीमी गति फ़िल्म में ऊब पैदा करती है। बेगम (मिस हैविशम) का चरित्र पूरी फ़िल्म पर हावी हो जाता है जो कि मूल उपन्यास से कोसों दूर है। कश्मीर कि बर्फ़ीली वादियाँ, दल झील में तैरती नौकाएँ बेहद ख़ूबसूरत बन पड़ी हैं किन्तु फ़िल्म में रोचकता का अभाव है।

उपर्युक्त फिल्मों के अतिरिक्त ग्रेट एक्सपेक्टेश्न्स उपन्यास का नाट्य रूपान्तरण भी सन् 1939 से ही निरंतर होता रहा है। विशेषकर इंग्लैंड के नाट्यागारों में यह उपन्यास नाटक के रूप में बहुत लोकप्रिय है तथा आज भी इसके सारे प्रदर्शन दर्शकों और थियेटर प्रेमियों की पहली पसंद हैं। चार्ल्स डिकेंस कृत ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स उपन्यास आज भी एक कालजयी उपन्यास के रूप में विश्व साहित्य में समादृत है।


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