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ISSN 2292-9754

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07.31.2014


'गॉन विथ द विद' - एक कालजयी उपन्यास और सिनेमा
(गॉन विथ द विंड, उपन्यास की रचना के 78 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में)

विश्व साहित्य और विश्व सिनेमा में ऐसी चमत्कारी, रोमांचक और ऐतिहासिक घटनाएँ बहुत कम घटी हैं, जब कि कोई विरली साहित्यिक कृति सर्वकालीन महान सिनेमा के रूप में विश्व के सम्मुख आ जाए और दोनों ही अमर हो जाएँ। अमेरिकी उपन्यास साहित्य में एक ऐसी कालजयी घटना जून 1936 में घटित हुई थी, जिसने संसार भर के साहित्य जगत में हलचल मचा दी। 'मार्गरेट मिशेल' नामक एक अपरिचित नवलेखिका ने 'गॉन विथ द विंड' नामक उपन्यास लिखकर विश्व साहित्य के प्रांगण में प्रवेश किया। लेखिका ने यह शीर्षक ब्रिटिश कवि अर्नेस्ट डॉसन की कविता की पंक्ति से लिया था। 'गॉन विथ द विंड' उपन्यास की आज तक तीस से पैंतीस करोड़ प्रतियाँ बिक चुकी हैं। अमेरिका से लेकर जापान तक इस उपन्यास की लोकप्रियता ने विश्व कथा साहित्य की लोकप्रियता के सारे कीर्तिमान तोड़ डाले। दुनिया भर में इस अंग्रेजी (अमेरिकी) उपन्यास की प्रतियाँ प्राय: हर पुस्तक विक्रेता के पास उपलब्ध होंगी। पिछले 78 वर्षों से यह अभिजात औपन्यासिक कलाकृति पाठकों के मन-मस्तिष्क पर छायी हुई है। यह 1037 पृष्ठों का वृहत्काय उपन्यास है जिसे पढ़ने के लिए एक विशेष प्रकार की मानसिकता की आवश्यकता होती है । इसके वृहदाकार स्वरूप के बावजूद यह उपन्यास साहित्य प्रेमियों की पहली पसंद बन गई और पीढ़ी दर पीढ़ी इस उपन्यास के पाठक बढ़ते ही जा रहे हैं। 'गॉन विथ द विंड' उपन्यास का कथानक बहुत ही विशाल फ़लक पर परिकल्पित है। इस उपन्यास की नायिका 'स्कार्लेट ओ हारा ' की तरह निरंतर संकटों से जूझने वाली थी इसकी लेखिका 'मार्गरेट मिशेल'।

मार्गरेट मिशेल का जन्म 8 नवंबर 1900 को अटलांटा शहर में हुआ था। उसका परिवार प्रगतिशील विचारों का प्रचारक था, माता अटलांटा शहर के उग्रवादी आंदोलन की सक्रिय अध्यक्ष थी। मार्गरेट के पिता यूजीन मिशेल इतिहास के विद्वान थे। उपन्यास में नायिका 'स्कार्लेट ओ हारा' के पिता के पात्र को लेखिका ने अपने पिता के व्यक्तित्व के सदृश ही गढ़ा है। मार्गरेट ने अपने उपन्यास 'गॉन विथ द विंड' के प्रमुख पात्रों को अपने जीवन से ही चुनकर गढ़ा था। उस समय अमेरिका में स्त्री-आंदोलन ज़ोरों पर था। उन्हीं दिनों महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला था। मार्गरेट ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी अभियान में उसे अपने उपन्यास का नायक 'रेट बटलर' मिला था। मार्गरेट का एक साथी 'रेड आप्शा' नामक एक आकर्षक और सुदर्शन देहयष्टि वाला कद्दावर पुरुष, छ: फुट दो इंच का नवयुवक, गहरे हरे रंग की आँखों वाला, ताँबे की तरह बालों वाला राजकुमार था। मार्गरेट को यह हरी आँखों वाला, प्रभावशाली व्यक्ति अत्यधिक प्रिय था। इसीलिए लेखिका ने अपने उपन्यास 'गॉन विथ द विंड ' के नायक 'रेट बटलर' की परिकल्पना इसी हरी आँखों वाले मतवाले पुरुष के रूप में करने से अपने आप को रोक न सकी। मार्गरेट मिशेल ने सन् 1926 में इस वृहत उपन्यास को लिखना प्रारम्भ किया। उपन्यास की मूल कथा अमेरिका में मौजूद दास प्रथा और दक्षिणी प्रान्तों में कपास के खेतों के धनी मालिकों के आभिजात्य संस्कृति पर केन्द्रित है। इसी काल में अमेरिका में गृह युद्ध छिड़ता है; जो कि इस उपन्यास के कथानक की सशक्त पृष्ठभूमि का निर्माण करती है। उस काल के आभिजात्य परिवारों में विवाह और प्रेम की जटिलताओं को स्त्री-पुरुष संबंधों के संदर्भ में लेखिका ने बहुत ही कौशल के साथ प्रस्तुत किया है। इस उपन्यास के फ़लक की विशालता में मूल कथा के साथ अनेक अंतर्कथाओं की बुनावट लेखिका मार्गरेट मिशेल की विलक्षण कलात्मक अभिव्यक्ति को प्रमाणित करता है।

सन् 1860 में अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर आसीन होते हैं। उस समय अमेरिका रंगभेद और दास प्रथा से उत्पन्न संकट से जूझ रहा था। रंग भेद और दास प्रथा को समाप्त करने की तीव्र आवाज देश के अनेक हिस्सों में उठ रही थी लेकिन अमेरिका के धनी व्यापारी और सामंती अभिजात वर्ग इस विरोध को स्वीकार नहीं करना चाहते थे। इस कारण 1904 से लागू गुलाम निषेध कानून बे-असर साबित हो गया था। इसीलिए राष्ट्रपति लिंकन ने 1865 में दास प्रथा के सम्पूर्ण उन्मूलन के लिए सशक्त कानून पारित कराया। इस कानून ने नीग्रो जाति के गुलामों को बहुत हद तक आज़ादी दिलाई। उपन्यास में इसी दौर को दर्शाया गया है। उपरोक्त कानून के बनने से पूर्व देश में गृह युद्ध की स्थितियाँ पैदा हो गई थीं और अमेरिका के दक्षिणी भूभाग में नीग्रो और गोरे मालिकों के बीच घमासान युद्ध छिड़ चुका था। इस संग्राम का विस्तृत वर्णन 'गॉन विथ द विंड' उपन्यास का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। दास प्रथा के निषेध के बावजूद भी दक्षिण के सात प्रान्तों के कपास के खेतों के मालिकों ने अपना एक संगठन (कनफेडरेशन) बनाकर इस गुलामी निषेध कानून का विरोध किया। यह संगठन गुलामी निषेध कानून को नहीं मानता था, क्योंकि धनी मालिकों के कपास के खेतों में काम करने के लिए इन नीग्रो गुलामों की बहुत मांग थी।

उपन्यास का प्रारम्भ 1861 के अमेरिका के गृहयुद्ध की पृष्ठभूमि में होता है। उपन्यास की नायिका 'स्कार्लेट ओ हारा' अपनी पैतृक हवेली 'टारा' में निवास करती है। उसकी पारिवारिक संपत्ति जॉर्जिया में स्थित कपास की कृषि भूमि है जिसमें बड़ी संख्या में नीग्रो गुलाम काम करते हैं। 'स्कार्लेट ओ हारा' का व्यक्तित्व अनेक विरोधाभासों से युक्त ज़िद्दी स्वभाव का है। वह अभिजात पुरुषों को लुभाने वाली चंचल सुंदरता से लैस एक महत्वाकांक्षी नायिका है। उसकी नटखट और चंचल प्रवृत्ति उसमें एक विशेष आकर्षण पैदा करती है। स्कार्लेट ओ हारा अपनी देशयष्टि और सुंदरता के प्रति बहुत सजग रहती है। उपन्यास में स्कार्लेट ओ हारा के अस्थिर प्रेम और उलझे हुए संबंधों को सुलझाने के प्रयास उसे एक के बाद एक मुसीबत में डालते जाते हैं। स्कार्लेट ओ हारा के बालसुलभ उच्छृंखल व्यवहार को नियंत्रित कर सकने की क्षमता केवल 'रेट बटलर' में ही दिखाई देती है। रेट बटलर उपन्यास का नायक है जो स्कार्लेट के मन और मस्तिष्क को अच्छी तरह पहचानता है। रेट बटलर वास्तव में स्कार्लेट ओ हारा से प्रेम करता है किन्तु स्कार्लेट का ऐशले से प्रेम करती है। ऐशले की सगाई मेलिनी से हो चुकी है और ऐशले भी मेलिनी के प्रेम में आकंठ डूबा हुआ है। स्कार्लेट इस स्थिति को स्वीकार नहीं करना चाहती और अपनी ज़िद से वह ऐशले को प्राप्त करना चाहती है जो की असंभव था। स्कार्लेट के इस व्यवहार को देखकर 'रेट बटलर' प्रारम्भ में उससे दूरी बनाए रखता है। बटलर जानता है की स्कार्लेट किसी दिन बहुत बड़ी मुसीबत में फँसेगी और तब उसे मदद की जरूरत पड़ेगी। स्कार्लेट ओ हारा की हर मुसीबत में वही काम आता है। स्कार्लेट ओ हारा की संपत्ति के नष्ट हो जाने पर रेट बटलर उसकी सहायता करता है। स्कार्लेट उपन्यास में तीन विवाह करती है किन्तु उसकी अनिश्चितता बनी रहती है। अंत में वह 'रेट बटलर' से विवाह करती है। उनके एक सुंदर पुत्री पैदा होती है जिससे रेट अगाध प्यार करता था। परंतु एक हादसे में उस लड़की की मृत्यु हो जाती है।

'रेट' इस दुर्घटना से विक्षिप्त हो जाता है और विचलित होकर स्कार्लेट ओ हारा को छोड़कर निकल पड़ता है। उसके जाने के बाद स्कार्लेट मानो नींद से जागती है। उसे उसकी गलती का अहसास होता है। उस पर 'रेट' से बिछुड़ने का दु;ख इस कदर हावी हो जाता है कि वह और आत्मग्लानि से भर उठती है। उसके जीवन में पुन: संकट के बादल छाने लगे। उसे पूर्ण विश्वास था कि वह अवश्य आएगा। इसी आशा में ज़िद्दी स्कार्लेट पुन: अपनी संपत्ति और हवेली 'टारा' की देखभाल में जुट जाती है। रेट बटलर का प्रस्थान स्कार्लेट ओ हारा को फिर से स्वयं को तलाशने के लिए प्रेरित करता है।

उपन्यास की वृहत कथावस्तु तीन स्थानों पर घटित होती हैं - टारा हवेली, ट्वेलव ओक्स और अटलांटा शहर। इन तीनों स्थानों पर उपन्यास की विस्तृत और अंतर-कथाओं में उलझी हुई कथा वस्तु विस्तार पाती है। उपन्यास में लगभग पच्चीस प्रमुख और गौण पात्र हैं जो कहानी को विस्तार देते हैं। इस उपन्यास की कथा वस्तु, वैयक्तिक, सामाजिक और राजनीतिक तीन धरातलों पर विकसित होती जाती है।

औपन्यासिक कला की दृष्टि से इस उपन्यास का कथानक बहुत ही जटिल संरचनात्मक स्वरूप को लिए हुए है। इस वृहत उपन्यास को पूरा करने में लेखिका को अनेक व्यक्तिगत संकटों से गुजरना पड़ा। सन् 1934 में वह एक घातक कार दुर्घटना का शिकार हो गईं। इस दुर्घटना ने उन्हें शारीरिक रूप से लगभग असहाय और अपंग सा बना दिया। ऐसी विषम परिस्थिति में सारी मानसिक और शारीरक वेदनाएँ सहते हुए मार्गरेट मिशेल ने 'गॉन विथ द विंड' जैसे अप्रतिम उपन्यास को पूरा किया।

10 जून 1936 को 'गॉन विथ द विंड' उपन्यास प्रकाशित हो गया। स्कार्लेट ओ हारा और रेट बटलर अमेरिका के साहित्याकाश पर छा गए। मार्गरेट मिशेल देखते देखते अमेरिका की चहेती उपन्यासकार बन गई। अमेरिका में इसकी लोकप्रियता ने इसे अंग्रेजी कथा साहित्य में विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। मार्ग्रेट मिशेल में औपन्यासिक लेखन की अनूठी प्रतिभा विद्यमान थी और उसमें सृजन का जुनून भी मौजूद था। इस उपन्यास की सफलता ने उसे अपार आत्मविश्वास प्रदान किया।

ऐसी प्रतिभावान और अदम्य साहस से लबालब भरी लेखिका के जीवन का अंत बड़ा ही दु:खद हुआ। उसे जो कीर्ति और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई थी उससे उसमें लेश मात्र भी अहंकार या घमंड पैदा नहीं हुआ। वह स्वयं को साधारण ही समझती रही। 1940 के बाद उसने अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया। उसने गरीबों के लिए स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराईं। द्वितीय महायुद्ध में ध्वस्त गांवों का पुननिर्माण कराया और उपन्यास से अर्जित धन को अधिकाधिक युद्ध पीड़ितों के लिए खर्च किया। विधाता ने उसे बहुत कम उम्र दी थी। 11 अगस्त 1949 को सड़क पार करते समय तेज गति से आने वाली एक टैक्सी ने उसे कुचल डाला। वह वहीं गिर पड़ी। पाँच दिन कोमा में रहने के बाद उसने दम तोड़ दिया। एक महान उपन्यासकार का करुण अंत हो गया। मार्ग्रेट मिशेल केवल एक उपन्यास लिखकर विश्वविख्यात हो गईं। शॉर्लेट ब्रोंटे (वदरिंग हाईट्स) और एमिली ब्रांटे (जेन आयर) भी ऐसी ही दो लेखिकाएँ हुई हैं जो एक एक कालजयी उपन्यास विश्व साहित्य को भेंटकर इसी तरह चल बसीं। उसी शृंखला में मार्ग्रेट मिशेल का भी नाम जुड़ गया। इस उपन्यास के लिए मार्ग्रेट मिशेल को अमेरिका का प्रतिष्ठित पुरस्कार पुलिट्ज़र दिया गया।

'गॉन विथ द विंड' उपन्यास के प्रकाशन से पूर्व ही हॉलीवुड में उसकी चर्चा शुरू हो गई थी। ऐसी वृहत और विशाल परिदृश्य वाले कथानकों पर फिल्म बनाने की परंपरा हॉलीवुड में मौजूद थी। इस उपन्यास पर भी फिल्म बनाने के लिए अधिकार प्राप्त करने की फिल्म निर्माताओं में होड़ लग गई। हॉलीवुड के अनेक विख्यात निर्माता इस उपन्यास को एक भव्य और महान फिल्म में रूपांतरित करने की कल्पना करने लगे। अंतत: उस समय के हॉलीवुड के विश्वविख्यात निर्माता 'डेविड सेल्ज़ेनिक' ने फिल्म बनाने का अधिकार 50 हजार डॉलर की भारी राशि देकर प्राप्त कर लिया। अमेरिका के समाचार पत्रों में इसकी घोषणा 14 जून 1936 को की गई। 'डेविड सेल्ज़ेनिक' को इस तरह के विशालकाय क्लासिक उपन्यासों पर फिल्में बनाने का व्यापक अनुभव था। इससे पहले वे 'डेविड कॉपरफील्ड, अन्ना केरिनीना, और ए टेल ऑफ टू सिटीज़' जैसी बड़ी और सर्वश्रेष्ठ फिल्में बना चुके थे। 'गॉन विथ द विंड' को सिनेमा के पर्दे पर उतारने के लिए विराट स्तर पर तैयारियों की आवश्यकता थी। उपन्यास में भिन्न भिन्न सामाजिक वर्गों के पात्र विभिन्न आंचलिक शैलियों में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं। उपन्यास में पात्रों द्वारा प्रयुक्त भाषा वैविध्य को निर्देशक ने फिल्म में बरकरार रखा। इस फिल्म के लिए हॉलीवुड के कैमरामैन सुविख्यात 'अर्नेस्ट डॉलर' थे। हॉलीवुड में 'गॉन विथ द विंड' फिल्म का निर्माण एक महान ऐतिहासिक घटना बन गई।

इस उपन्यास पर फिल्म बनाने की योजना का पता चलते ही पाठकों ने उपन्यास के नायक 'रेट बटलर' की भूमिका के लिए 'क्लार्क गेबल' को सुझाया। 'क्लार्क गेबल' मार्ग्रेट मिशेल के नायक 'रेट बटलर' की भूमिका के लिए ही बने थे। उनका विशाल और गंभीर व्यक्तित्व 'स्कार्लेट ओ हारा' (नायिका) की चंचल और जिद्दी प्रकृति को नियंत्रित करने वाले पात्र के लिए अनुकूल था। पाठकों को इस बात का आभास हो गया था कि लेखिका ने 'क्लार्क गेबल' को ध्यान में रखकर ही 'रेट बटलर' के पात्र को गढ़ा है। हॉलीवुड के सूत्रों से पता चलता है कि पहले क्लार्क गेबल इस भूमिका के लिए तैयार नहीं थे, उन्हें संदेह था कि वे दर्शकों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाएंगे। किन्तु जब उन्होंने उपन्यास को दूसरी बार पढ़ा तो वे इस भूमिका के लिए तैयार हो गए। मार्ग्रेट जब यह उपन्यास लिख रहीं थीं तब 'गेबल' अमेरिका का सुपर स्टार नहीं था। उस समय वह ओकलहामा के एक तेल मिल में मजदूरी का काम करता था।

लगातार तीन वर्षों तक 'डेविड सेल्ज़ेनिक' के नेतृत्व में इस भव्य फिल्म की तैयारी चलती रही। इस फिल्म के सेट पर जिन वस्तुओं का उपयोग किया गया उनकी संख्या बारह लाख पचास हज़ार बताई जाती है। सैकड़ों सहायक कलाकारों के लिए हजारों कास्ट्यूम्स बनवाए गए। सन् 1937 में फिल्म की पटकथा का पहला भाग लिखा गया। फिल्म का अंतिम दृश्य सन् 1939 में पूरा हुआ। फिल्म के कला निर्देशक ने कुल दो सौ सेटों की योजना बनाई थी। फिल्म की नायिका 'स्कार्लेट ओ हारा' की भूमिका के लिए उपयुक्त अभिनेत्री का चयन एक बड़ी समस्या थी। हरी आँखों वाली, जिसकी कमर 16 इंच हो, चंचला हो, देखने में अद्वितीय सुंदरी हो, परंतु स्वभाव से शरारती, नोंक-झोंक करने की प्रवृत्ति वाली साहसी स्त्री की भूमिका को साकार करने वाली नायिका की खोज, अमेरिका में चर्चा का विषय बन गया। विश्व भर की उस समय की सुंदरतम अभिनेत्रियों में से कोई भी अभिनेत्री 'डेविड सेल्ज़ेनिक' को पसंद नहीं आ रही थी। स्कार्लेट की खोज के लिए निर्देशक 'जॉर्ज कुकर' का एक दल यूरोप भेजा गया। उन्हीं दिनों 'विवियन ली' नामक एक खूबसूरत अभिनेत्री लंदन के नाटकों में अपने अभिनय कौशल के लिए चर्चित हो रही थी। उस समय वह 'गॉन विथ द विंड' उपन्यास पढ़ रही थी। उपन्यास को पढ़ते समय उसे स्वयं में 'स्कार्लेट ओ हारा' के व्यक्तित्व का आभास होने लगा। उसने मित्रों से कहा कि वह हॉलीवुड जाकर स्कार्लेट की भूमिका करेगी। उसकी इस कल्पना पर उसके मित्रों ने उसका खूब मज़ाक उड़ाया। लेकिन विवियन ली यह सपना सचमुच पूरा होने वाला था।

26 जनवरी 1939 को 'गॉन विथ द विंड' फिल्म की शूटिंग शुरू हुई। उसके तीन सप्ताह पहले निर्माता डेविड सेल्ज़ेनिक ने एक कठोर निर्णय लिया। पिछले दो वर्ष से उनके साथ काम करने वाले निर्देशक 'जॉर्ज कुकर' को बर्खास्त कर दिया गया और उसकी जगह 'विक्टर फ्लेमिंग' को निर्देशक के रूप में लिया गया। निर्देशक बनने से पहले विक्टर फ्लेमिंग हॉलीवुड के कैमरामैन के रूप में काम कर चुका था।

13 जनवरी 1939 को अटलांटा के सेट पर डेविड सेल्ज़ेनिक को अपने भाई की मदद से 'विवयन ली' के रूप में फिल्म की नायिका 'स्कार्लेट ओ हारा' मिल गई। गौरतलब है कि विवियन ली का जन्म 5 नवंबर 1913 को भारत (दार्जिलिंग, बंगाल प्रेसीडेंसी) में हुआ था। वह ब्रिटिश रंगमंच की प्रमुख अभिनेत्री थी।

हॉलीवुड पहुँचने से पहले ही उपन्यास पढ़कर वह मानसिक रूप से स्कार्लेट ओ हारा बन चुकी थी। यह चमत्कारी संयोग था कि उसका सपना सच हुआ। स्कार्लेट ओ हारा के जटिल पात्र को विवियन ली अपने असाधारण अभिनय कौशल से जीवंत कर दिया। इसके लिए विवियन ली को उस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ऑस्कर अवार्ड प्राप्त हुआ।

उपन्यास के फिल्मी रूपान्तरण में इस बात का ध्यान रखा गया की फिल्म का कथानक भी उपन्यास के कथानक के अति निकट हो। फिल्म में स्कार्लेट ऐशले के प्रेम में दीवानी थी। उसकी अस्थिर चंचल प्रवृत्ति के कारण वह दो विवाह करती है फिर तलाक लेती है, इस पर भी उसके मन के किसी कोने में ऐशले ही बसा रहता है। रेट बटलर को स्कार्लेट की हर बात का पता था। वह भी स्कार्लेट नामक नटखट सुंदरी को मन ही मन प्यार करता है। स्कार्लेट रेट से तीसरा विवाह करती है फिर भी उसके मन में ऐशले समाया रहता है। इसलिए रेट का स्वाभिमान जाग उठता है और एक रात शराब के नशे में वह स्कार्लेट को धमकाकर कहता है - "मैं तुम्हारा सिर इतने ज़ोर से दबाऊँगा कि पके हुए फल के बीज जिस प्रकार दबाने से बाहर निकल आते हैं, ठीक वैसे ही तुम्हारे दिमाग से ऐशले बाहर निकल जाएगा।" (फिल्म का संवाद)

'गॉन विथ द विंड' फिल्म के पूर्वार्द्ध में अमेरिका में घटित गृह युद्ध और उसमें ध्वस्त हुए गाँव, अकाल का महासंकट, संपूर्ण अटलांटा शहर में लगी भीषण आग जैसी लोमहर्षक घटनाओं का फिल्मांकन बहुत बड़े पैमाने पर अति प्रभाशाली ढंग से किया गया। इस फिल्म ने उपन्यास को दृश्य माध्यम में अप्रतिम भव्यता और यथार्थता के प्रस्तुत किया। इस फिल्म में जो दृश्य विन्यास प्रस्तुत किए गए वे बेजोड़ हैं और तकनीकी दृष्टि से सिनेमा कला को उत्कृष्टता के शिखर पर स्थापित कराते हैं।

उपन्यास के कथानक में चित्रित परस्पर विरोधी स्वभाव के स्कार्लेट और रिट बटलर की प्रस्तुति फिल्म में अधिक रोमांचक और मर्मस्पर्शी बन पड़ी है। उनके आपस की नोंक -झोंक, मेलिनी और ऐशले का दांपत्य, रेट और स्कार्लेट की बेटी 'बनी' - इन सभी पात्रों के अंतरसंबंधों को फिल्म के निर्देशक ने इतने सुंदर ढंग से संवादों और अभिनय के द्वारा प्रस्तुत किया है की उपन्यास के हर पाठक के लिए इस फिल्म को देखना अनिवार्य लगता है। इस उपन्यास को जीतने जुनून से लिखा गया उतने ही जुनून और ईमानदारी से इसे फिल्मी रूप भी प्रदान किया गया। चार घंटे की यह फिल्म दर्शकों को बांधे रखती है। इस फिल्म की खूबसूरती इसमे प्रस्तुत कलापूर्ण दृश्यों में निहित है। कपास के विस्तृत खेतों में फसल के दृश्य, उसमें काम कराते हुए मजदूर, ऊपर आसमान में मौसम के साथ बदलते हुए रंगों की आभा, हर एक दृश्य के लिए कथानुकूल भव्य सेट, स्कार्लेट की हवेली 'टारा' की भव्यता, ट्वेल्व ओके का युवकोत्सव, पात्रों के कलात्मक परिधान, नायक और नायिका की रोमांटिक रूप -सज्जा और उनके भारी भरकम महंगे कास्ट्यूम, प्राकृतिक सुंदरता आदि का मनमोहक फिल्मांकन इस फिल्म को महान और चिर- नवीन बना देता है। मानवीय संवेदनाओं की ऐसी सूक्ष्म अभिव्यक्ति बहुत कम फिल्मों में दिखाई देती है। 'स्कार्लेट ओ हारा' विध्वंस और रोमांस, क्रान्ति और बलात्कार जैसी घटनाओं में से निकलकर एक जिद्दी, दबंग, स्वाभिमानी और संघर्षशील युवती के रूप में विश्व सिनेमा और साहित्य में अपनी विशेष छवि अंकित करती है।

डेविड सेल्ज़ेनिक ने मारग्रेट मिशल के लोकप्रिय उपन्यास 'गॉन विथ द विंड' पर एक भव्य फिल्म बनाई। ऑस्कर अवार्ड से इस फिल्म को नवाजा गया। फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकार क्लार्क गेबल और विवियन ली दोनों ने सिनेमा जगत में धूम मचा दी। सिनेमा के इतिहास में मेट्रो गोल्डविन मेयर स्टुडियो द्वारा निर्मित 'गॉन विथ द विंड' सर्वोत्तम फिल्म मानी जाती है। साहित्य और सिनेमा प्रेमी स्वीकार करते हैं कि 'गॉन विथ द विंड' जैसा उपन्यास दुबारा नहीं लिखा जा सकता है और न ही ऐसी फिल्म दुबारा बन सकती है। इस फिल्म की निर्माण लागत 1939 में 3.85 मिलियन डॉलर थी। फिल्म की अवधि चार घंटे की है। आज भी सिनेमा प्रेमियों की यह खास पसंद है और विश्व भर में आज भी यह फिल्म बड़े चाव से देखी जाती है।


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