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ISSN 2292-9754

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05.13.2015


विश्व की महान औपन्यासिक कृति ‘वार एंड पीस‘ (युद्ध और शांति)

विश्व कथा साहित्य में रूसी कथा साहित्य का विशेष एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है। टॉल्स्टाय, दस्तोव्स्की, गोर्की, चेखव, तुर्गनेव आदि रूसी कथाकारों ने मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति को विशिष्ट राजनीतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक भाव बोध के धरातल पर प्रतिष्ठित किया। विश्व कथासाहित्य में उपर्युक्त कथाकारों का स्थान अतिविशिष्ट है। इन कथाकारों ने विश्व साहित्य को अपनी कालजयी कृतियों से अमरत्व प्रदान किया। वार एंड पीस (युद्ध और शांति), अन्ना केरेनीना, क्राईम एंड पनिशमेंट (अपराध और दंड), माँ (द मदर) आदि उपन्यास अपने महाकाव्यात्मक कलेवर और कल्पनातीत विस्तृत फ़लक के लिए जाने जाते हैं। विश्व उपन्यास साहित्य के इतिहास में ‘लियो टॉल्स्टाय’ (1828-1910) द्वारा रचित ‘वार एंड पीस’ (युद्ध और शांति) व्यापक फ़लक पर रचित वृहदाकार ऐतिहासिक-सामाजिक उपन्यास है जो रूस के एक समूचे कालखंड के इतिहास को तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक उत्कर्ष और अपकर्ष के संदर्भ में प्रस्तुत करता है। विश्व साहित्य में ‘वार एंड पीस‘ सर्वकालिक महानतम रचना के रूप में स्वीकृत है। रूसी भाषा में 1225 पृष्ठों में रचित इस वृहत महाकाव्यात्मक उपन्यास में लेखक ने 580 पात्र गढ़े हैं। यह उपन्यास 19वीं सदी के रूसी अभिजात वर्ग के अंतर्विरोधों और अंतरसंघर्षों को विस्तार से प्रस्तुत करता है। एक प्रकार से यह तत्कालीन रूस का सामाजिक इतिहास है जिसकी पृष्ठभूमि में नेपोलियन बोनापार्ट का रूस पर आक्रमण और मास्को पर उसके आधिपत्य की कथा विद्यमान है। रूसी ज़ारशाही अभिजात-वर्गीय समाज पर नेपोलियन के प्रभाव को टॉल्स्टाय ने प्रस्तुत किया है। उपन्यास का प्रथम संस्करण आंशिक रूप से 1865 से 1867 के मध्य रूस के ‘द रशियन मेसेंजर’ नामक पत्रिका में धारावाहिक प्रकाशित हुआ। ‘वार एंड पीस‘ पूर्ण रूप में सन् 1869 में पहली बार प्रकाशित हुआ। टॉल्स्टाय ने अपनी इस प्रतिष्ठात्मक रचना को पारंपरिक ढंग का उपन्यास नहीं माना और न ही उन्होंने इसे काव्य अथवा कोई ऐतिहासिक दस्तावेज़ की ही मान्यता दी। इसकी तुलना में वे ‘अन्ना केरेनीना‘(1873-1877) को अपनी प्रथम औपन्यासिक कृति मानते हैं। टॉल्स्टाय ने इस उपन्यास का शीर्षक 1861 के एक फ्रेंच उपन्यास से लिया जिसका कथानक युद्ध की पृष्ठभूमि में लिखा गया था। टॉल्स्टाय ने रूसी सेना में अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं और वे क्रीमिया युद्ध में लड़े थे। इसी कारण वे युद्ध-विषयक कहानी और उपन्यास लिखने में विशेष पटुता रखते हैं। युद्ध भूमि के अनुभवों के आधार पर उन्होंने विपुल मात्रा में युद्ध-विषयक कथा साहित्य की रचना की। युद्ध कालीन रूस की सामाजिक और राजनीतिक अस्त-व्यस्तता पर केन्द्रित प्रस्तुत रचना के लिए उन्होंने इसीलिए ‘युद्ध और शांति‘ (वार एंड पीस) शीर्षक चुना।

टॉल्स्टाय ने इस उपन्यास का पूर्वार्ध ‘1805’ शीर्षक से अपने रियासती आवास (यास्नाया पोल्याना) में अपने विवाह के तत्काल पश्चात लिखना शुरू किया। किन्तु इसके उत्तरार्ध को लिखने के लिए उन्होंने इतिहास और दर्शन ग्रन्थों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने शॉपनहावर को अपना प्रेरक स्वीकार किया है। उन्होंने स्वाध्याय से इतिहास और दर्शन के गूढ़ मर्म को आत्मसात कर मौलिक निष्कर्ष निकाले। वार एंड पीस इतिहास और कल्पना का अद्भुत सामंजस्य है। फ्रांसीसी अधिपति नेपोलियन का शासन काल और उसके रूस पर आक्रमण के काल के इतिहास का विषाद अध्ययन कर लेखक ने उपन्यास को प्रामाणिक सिद्ध किया है। रूस के इतिहास के साथ टॉल्स्टाय ने काल्पनिक कथावस्तु और पात्रों को गढ़कर एक महान क्लासिक कृति का निर्माण किया। उपन्यास में नेपोलियन का आक्रमण सत्य है और शेष कल्पना।

‘वार एंड पीस’ का प्रथम प्रारूप 1863 में तैयार हुआ। सन् 1865 में ही इसका पहला खंड ‘1805’ शीर्षक से ‘रुसकी वेस्टनिक‘ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ। इसके शेष हिस्से भी इसी शीर्षक से 1867 तक छपते रहे किन्तु टॉल्स्टाय को इससे संतोष नहीं हुआ। उन्होंने 1866 से 1869 तक समूचे उपन्यास को दुबारा लिखा। टॉल्स्टाय की पत्नी ‘सोफिया टॉल्स्टाया‘ ने पति द्वारा लिखित प्रारूप का सात बार पुनर्लेखन कर उसकी स्वच्छ प्रति बनाकर दी, तभी टॉल्स्टाय संतुष्ट हुए और उसे प्रकाशन योग्य माना। इससे पूर्व ‘रुसकी वेस्टनीक‘ में प्रकाशित उपन्यास का अंत, 1869 में प्रकाशित संशोधित ‘वार एंड पीस‘ के कथानक के अंत से भिन्न है। इस नवीन और संशोधित उपन्यास का शीर्षक ‘वोयना ई मीर‘ (अंग्रेजी में ‘वार एंड पीस’) रखा गया। ‘वार एंड पीस‘ के नवीन संस्करण के रूसी भाषा में प्रकाशित होते ही इस उपन्यास ने बहुत तेजी से लोकप्रियता हासिल की। रूसी से अन्य भाषाओं में इस उपन्यास के अनूदित संस्करण सभी देशों में उपलब्ध होने लगे। इस उपन्यास को आलोचकों ने ऐतिहासिक कथा साहित्य की श्रेणी में रखा है। इस कृति ने साहित्य की पारंपरिक विधाओं की सीमाओं का अतिक्रमण कर एक विशिष्ट विधात्मक श्रेणी का निर्माण कर डाला। टॉल्स्टाय ने अपनी इस रचना से उपन्यास-कला और शिल्प को नए रूप में परिभाषित किया। पाठकों में इस उपन्यास की ऐतिहासिकता के प्रति भिन्न प्रकार की पाठकीय संवेदना जागृत हुई। इस उपन्यास में पात्रों की बड़ी संख्या के बावजूद, प्रत्येक पात्र के चरित्र को गढ़ने में टॉल्स्टाय ने अभूतपूर्व कल्पनाशीलता का परिचय दिया है। टॉल्स्टाय की महानता उपन्यास के परिवेश और घटनाओं को दृश्य एवं चाक्षुष बिंबों में परिवर्तित करने की कला में निहित है। लेखक की औपन्यासिक कला कथावस्तु के दृश्यरूपों में प्रस्तुत करने की क्षमता में निहित है। पाठक के सम्मुख उपन्यास नाटक के दृश्यों के रूप में देखाई देता है। इस प्रकार की दृश्यांकन शैली उस काल की औपन्यासिक रचनाओं के लिए सर्वथा भिन्न और नवीन थी।

वार एंड पीस (युद्ध और शांति) उपन्यास के लिए टॉल्स्टाय ने बहुत गहन और व्यापक स्तर पर इतिहास और समाजशास्त्र का शोधपरक अध्ययन किया। चूंकि वे सैनिक के रूप में क्रीमिया के युद्ध में हताहत सैनिकों और रक्तरंजित रणभूमि को देख चुके थे इसलिए मानवीय धरातल पर युद्ध के राजनीतिक कारणों और उसके औचित्य के प्रति टॉल्स्टाय में गहरी संवेदना मौजूद थी। वे अपने समय के युद्ध-इतिहास से असंतुष्ट और असहमत थे, इसीलिए उन्होंने अपनी इस कृति में नेपोलियन के रूसी आक्रमण से संबंधित तथ्यों और ऐतिहासिक घटनाओं की पड़ताल नए सिरे से की। प्रस्तुत कृति में वे अपने समय के उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों का विश्लेषण गंभीरता से करते हैं। रूसी समाज के लिए उनकी यह कृति एक बहुत बड़ी सौगात बनकर उभरी। इतिहासलेखन के प्रति उनकी दृष्टि यथार्थवादी थी। वे सच्चाई तक पहुँचने के लिए कथा और इतिहास के बीच के अंतर को कम कर देना चाहते थे जिसका उल्लेख उन्होंने ‘वार एंड पीस‘ में किया है। वार एंड पीस उपन्यास में वर्णित घटनाएँ सन् 1812 में घटित घटनाएँ हैं जो नेपोलियन के रूस पर आधिपत्य के दौरान रूसी वर्ग चेतना को प्रस्तुत करता है। उपन्यास में नेपोलियन के चरित्र-चित्रण के लिए टॉल्स्टाय ने दर्जनों जीवनियाँ और आत्मकथाओं के साथ साथ इतिहास संबंधी दस्तावेजों तथा उपलब्ध पत्र-साहित्य का विशद अध्ययन किया। उल्लेखनीय तथ्य है कि उपन्यास में लगभग 160 वास्तविक पात्रों के चरित्र प्राप्त होते हैं। वार एंड पीस की भाषा मूलत: रूसी ही है किन्तु इसमें काफी संवाद फ्रेंच भाषा में भी रचे गए। उपन्यास का प्रारम्भ भी फ्रेंच में ही होता है और कई पात्र फ्रेंच और रूसी दोनों भाषाओं का प्रयोग करते हैं। यह 19वीं सदी की रूसी सामंती और अभिजात वर्ग की भाषिक संस्कृति का प्रतीक है जिसे टॉल्स्टाय ने यथावत चित्रित किया है। तत्कालीन रूसी अभिजात वर्ग के लिए फ्रेंच भाषा का प्रयोग प्रतिष्ठा सूचक हुआ करता था, इससे उस समय ‘फ्रेंच’ भाषा का दबदबा और रूसी समाज के संभ्रांत वर्ग में उसका वर्चस्व स्पष्ट हो जाता है। उन दिनों रूसी अभिजात समाज में फ्रेंच को रूसी से अधिक सभ्य और परिनिष्ठित भाषा होने का गौरव प्राप्त था। टॉल्स्टाय ने फ्रेंच भाषा को कृत्रिमता, छल और कपट के प्रसंगों के वर्णन के लिए उपयुक्त मानकर इस्तेमाल किया है। वे रूसी भाषा को सच्चाई, ईमानदारी और सच्चरित्रता के प्रसंगों के वर्णन के अनुकूल सिद्ध करते हैं। यह टॉल्स्टाय के रूसी भाषा प्रेम का प्रमाण है। यह गौरतलब है कि उपन्यास के कतिपय प्रसंगों में ‘पीयर’ और अन्य पात्रों के द्वारा फ्रेंच मुहावरों का प्रयोग व्यंग्य के लिए किया जाता है। नेपोलियन के विरुद्ध भी व्यंग्यात्मक अभिव्यक्तियों के लिए फ्रेंच का प्रयोग किया गया है। फ्रेंच का प्रयोग कथानक के उत्तरोत्तर विकास के साथ क्रमश: कम होता जाता है।

टॉल्स्टाय ने इस उपन्यास के माध्यम से रूस के उच्चवर्गीय समाज में व्याप्त फ्रांसीसी भाषा मोह को चित्रित किया है जो कि अभिजात वर्ग की पहचान बन चुका था। यह मोह नेपोलियन के आक्रमण तथा उसके परिणामों से समाप्त हो जाता है क्योंकि तब वह शत्रुओं की भाषा हो गई। लेखक ने उपन्यास के कथानक को ऐसे बुना है कि फ्रांस जिसकी सभ्यता और संस्कृति रूसी समाज को अत्यंत्त प्रिय थी वह इस आक्रमण से नफ़रत में बदल जाती है। उपन्यास के विकास क्रम में टॉल्स्टाय ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि आक्रमण के बाद फ्रांस के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए रूसी सामंत समाज फ्रेंच को त्यागकर रूसी भाषा सीखना शुरू कर देता है।

वार एंड पीस, उपन्यास का प्रारम्भ रूस की सन् 1805 की राजनीतिक परिस्थितियों के चित्रण से होता है। रूस में ज़ार अलेक्ज़ेंडर प्रथम का शासन काल नेपोलियन के आक्रमण तक अर्थात 1812 तक कायम रहता है। इससे पूर्व रूस में महारानी कैथरीन महान (1762-1796) के युग में पेरिस पश्चिमी यूरोपीय सभ्यता और संस्कृति का केंद्र था। इसी कारण महारानी कैथरीन को फ्रेंच भाषा एवं संस्कृति से विशेष लगाव था। वह रूस को भी फ्रांस की तरह एक महान यूरोपीय राष्ट्र के रूप में विकसित करना चाहती थी। इसलिए उसने फ्रेंच को अपने राजदरबार की भाषा घोषित कर दिया। तत्कालीन रूसी राजघराने और सामंती वर्ग ने फ्रेंच भाषा तथा संस्कृति को अभिजात वर्ग के प्रतीक के रूप में अपना लिया। रूसी अभिजात वर्ग के इस फ्रेंच मोह का स्वरूप उपन्यास में प्रतिबिंबित हुआ है।

टॉल्स्टाय ने इस उपन्यास के लेखन, पुनर्लेखन तथा शोध में कई वर्ष बिताए। इस पुस्तक की सामग्री जुटाने के लिए उसने प्राथमिक स्रोतों (ऐतिहासिक दस्तावेज़ और साक्षात्कार आदि) के अतिरिक्त इतिहास और दर्शन ग्रन्थों एवं ऐतिहासिक उपन्यासों का अध्ययन किया। अपने क्रीमिया युद्ध के अनुभवों को लेखक ने युद्ध के वर्णन में व्यापक रूप से उपयोग किया। रूसी सैन्य व्यवस्था की बारीकियों से वे अभिज्ञ थे। मूल उपन्यास ‘वार एंड पीस’ रूसी भाषा में चार जिल्दों (खंडों) और 15 भागों में विभाजित है। इस उपन्यास का एक अंग्रेज़ी संस्करण 25 अध्यायों में विभक्त 1315 पृष्ठों में उपलब्ध है। उपन्यास का पूर्वार्ध कथात्मक चरित्रों से युक्त है और उत्तरार्ध युद्ध दर्शन और इतिहास बोध संबंधी वैचारिकता से अनुप्राणित है। टॉल्स्टाय ने इतिहास, समाजशास्त्र और दर्शन को कथानक में कलात्मक निपुणता के साथ विलय कर दिया। इस महाकाय उपन्यास के अनेकों संक्षिप्त संस्करण टॉल्स्टाय के जीवन काल में ही लोकप्रिय हो चुके थे।

कथानक के प्रमुख पात्रों से पाठक का साक्षात्कार उपन्यास के प्रथम खंड में हो जाता है। इनमें से अनेक पात्र जैसे नेपोलियन और अलेक्ज़ेंडर प्रथम, वास्तविक (ऐतिहासिक) पात्र हैं। उपन्यास में चित्रित अनेक पात्र ऐसे थे जो टॉल्स्टाय के इर्दगिर्द मौजूद थे, जिन्हें व्यक्तिगत रूप से वे जानते थे। टॉल्स्टाय के दादा एवं अन्य परिचित लोगों की छवि उपन्यास के अनेक पात्रों में रूपायित हुई है।

‘वार एंड पीस‘ तत्कालीन रूसी समाज के पाँच प्रतिष्ठित अभिजात घरानों की कहानी है। बेज़ुखोव, बोकोन्सकी, रोस्टोव, कुरगिन और ड्रबेस्कोय नामक इन घरानों के सामाजिक और राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव और उथल-पुथल को लेखक ने विलक्षण कौशल के साथ गुंफित किया है। इन परिवारों के पात्रों के बनते बिगड़ते अंतरसंबंधों को तत्कालीन ऐतिहासिक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में सशक्त कथाशिल्प के साथ टॉल्स्टाय ने प्रस्तुत किया है। यह उपन्यास अपने वृहद आकार में रूस के युगीन सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को सघनता से समेटे हुए है। इसका नेरेटिव बहुत ही प्रखर और गंभीर है। इसमें पात्रों की परिवेश के प्रति सजगता को विशेष रूप से उभारा गया है। उपर्युक्त पाँचों परिवारों के पात्रों का जीवन 1805 और 1813 के काल की राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होता है। रूसी समाज फ्रांसीसी आक्रमण के समय जिस तरह एकजुट होकर संघर्ष करता है, इसका यथार्थ वर्णन टॉल्स्टाय ने किया है। उपन्यास में पाँच सौ से अधिक पात्र हैं जिनमें सामंत, ज़मींदार, सैनिक, श्रमिक, वर्ग के पात्र मुख्य हैं।

बेज़ुखोव परिवार सुसंपन्न है किन्तु इसके गृहप्रमुख वयोवृद्ध काऊंट किरिल व्लाडीमिरोविच ने स्त्री लोलुप चरित्र और कई स्त्रियों से अवैध संबंधों के परिणामस्वरूप बहुतेरे अवैध संतान पैदा किए। बोकोन्स्की घराना ‘बाल्ड हिल्स’ में अकूत संपदा के बसा हुआ है। इस परिवार के बूढ़े प्रिंस बोकोन्स्की और निकोलाई एन्ड्रीविच, महारानी कैथरीन की सेना में जनरल थे। मॉस्को में स्थित रोस्टोव परिवार के पास जागीरें तो बहुत हैं किन्तु नकद राशि का अभाव उन्हें चिंतित करता है। आर्थिक अभाव के बावजूद इस परिवार में प्रेम और आत्मीयता और परोपकार का सौमनस्यपूर्ण वातावरण सदैव मौजूद रहता है। कुरगिन परिवार में तीन संतान हैं जिनका चरित्र संदिग्ध है। ड्रबेस्कोय परिवार में बूढ़ी माँ का बेटा ‘बोरिस’ है जिसके सुनिश्चित भविष्य की उसे चिंता बूढ़ी माँ को है।

‘वार एंड पीस‘ उपन्यास के कथानक के दो पक्ष हैं, पहला त्रिकोणीय प्रेम कहानी और दूसरा नेलपोलियन के आक्रमण का है। प्रेम की यह त्रिकोणीय कहानी काऊंट प्योटर किरीलोविच बेज़ुखोव (पीयर), प्रिंस एंड्रे निकोलाइविच बोकोन्स्की (एंड्री) और काऊंटेस नटाल्या इलीनीना रोस्टोवा (नताशा) के बीच घटित होती है। इस उपन्यास का सामाजिक परिवेश संभ्रांत अभिजात वर्गीय वैभव एवं शालीनता से संपन्न है। उपन्यास में युगीन रूसी सामंती वैभव का अनूठा चित्रांकन लेखक ने किया है। ये सभी घराने अपने अपने जीवन शैलियों में एक विशेष सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को निर्मित करते हैं। नेपोलियन के आक्रमण से पूर्व और पश्चात की स्थितियों को यथार्थ रूप में चित्रित करने में लेखक ने अपनी अनूठी सृजनात्मकता को सिद्ध किया है।

उपन्यास का प्रारम्भ 1805 के रूसी परिवेश में होता है। सेंट पीटर्सबर्ग में राजमाता मारिया फियोडोरोव्ना की सुसंपन्न विश्वासपात्र सेविका ‘अन्ना पाव्लोव्ना शेरर‘ द्वारा आयोजित आलीशान भोज में आमंत्रित सभी प्रमुख पात्रों से पाठकों का परिचय हो जाता है। ‘पीयर बेज़ुखोव’ जो की अपने बूढ़े धनी सामंत पिता का अवैध पुत्र है, वह रुग्ण पिता की असमय मृत्यु से, पिता की सम्पूर्ण संपत्ति का उत्तराधिकारी बन जाता है। वह अकस्मात संपन्न जागीरदार बन जाता है। ‘पीयर‘ की परवरिश उसकी माँ ने विदेश में उच्च शिक्षा दिलाई थी। किन्तु पीयर की कोमलता और दयालु स्वभाव सेंट पीटर्सबर्ग के कुलीन चरित्र से भिन्न होने के कारण वह उस समाज में स्वयं को नहीं स्थापित कर पाता। पीयर, अन्ना पाव्लोव्ना शेरर के भोज में उपस्थित होता है। वहाँ पीयर का मित्र प्रिंस एंड्रे निकोलायविच बोकोन्स्की ख़ूबसूरत पत्नी लिज़ के साथ दिखाई देता है। प्रिंस एंड्रे अपने विवाह के खोखलेपन और ऊब से दूर रहना के लिए वह रूसी सेना में प्रिंस मिखाइल कुटुज़ोव का सैन्य सहायक बनकर नेपोलियन के विरुद्ध रूस के सैन्य अभियान में शामिल हो जाता है।

रूस की प्राचीन राजधानी मास्को का सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य, वैभवशाली सामंती संस्कृति से सुसंपन्न सेंट पीटर्सबर्ग से भिन्न है। मास्को के अभिजात समाज में रोस्टोव परिवार का विशेष स्थान है। इस परिवार में काऊंट इलिया एन्ड्रिएविच रोस्टोव की चार युवा संतान हैं। तेरह वर्षीय नताशा (नटालिया इलिनिना) को भ्रम है कि उसे ‘बोरिस ड्राबेस्कोय‘ से प्रेम हो गया है। ‘बोरिस‘ एक अनुशासनप्रिय विनयशील युवक है जो कि रूसी सेना में अफसर बनने जा रहा है। उपन्यास की नायिका नताशा एक चंचल, द्वन्द्वग्रस्त, अस्थिर मानसिकता वाली त्यागमय चारित्रिक गुणों से युक्त सुंदर स्त्री पात्र है। रोस्टोव परिवार के प्रमुख काऊंट इलिया रोस्टोव और काउंटेस नटाल्या रोस्टोवा आत्मीय और सहृदय स्वभाव वाले दंपति हैं जिन्हें हमेशा परिवार की बिखरी आर्थिक स्थिति की चिंता लगी रहती है। बोकोन्स्की के बाल्ड हिल्स स्थित जागीर में प्रिंस एंड्रे गर्भवती पत्नी ‘लिज़‘ को अपने सनकी पिता प्रिंस निकोलाई एन्ड्रे कोएविच बोकोन्स्की और अपनी स्नेहमयी बहन मारिया बोकोन्स्की की देखरेख में छोड़कर युद्ध में शामिल होने के लिए निकल पड़ता है। मारिया अपने पिता की सेवा के उद्देश्य से ऊँचे घराने के विवाह प्रस्तावों को अस्वीकार कर देती है।

रूस में नेपोलियन के आक्रमण की खबरें दिन पर दिन ज़ोर पकड़ती जाती हैं। जनरल मिखाइल इलारिनोविच कुटुज़ोव के नेतृत्व में रूसी सेना नेपोलियन से रणभूमि में मुठभेड़ की तैयारियों में लग जाती है। रूसी समाज के हर वर्ग के युवक नेपोलियन का सामना करने के लिए सेना में शामिल होना शुरू कर देते हैं। रोस्टोव परिवार से निकोलाई रोस्टोव (नताशा का भाई) युद्ध में शामिल होता है जहाँ उसका परिचय प्रिंस एंड्रे से होता है। निकोलाई रोस्टोव अपने पारिवारिक वर्चस्व के घमंड में प्रिंस एंड्रे बोकोन्स्की को अपमानित करता है। सेना में निकोलाई, डेनिसोव नामक जुआड़ी सैनिक से दोस्ती करता है। रोस्टोव, प्रिंस एंड्रे और डेनिसोव तीनों ऑस्टेर्लिट्ज़ के युद्ध में लड़ते हैं जिसमें प्रिंस एंड्रे घायल होकर युद्धभूमि से लौट आता है। निकोलाई रोस्टोव भी कुछ दिनों की छुट्टी पर मास्को स्थित अपने पैतृक प्रासाद में लौट आता है। रोस्टोव परिवार कठिन आर्थिक संकट से जूझता हुआ दिखाई देता है। निकोलाई मित्र डेनिसोव के संग अपने ही गृह-प्रासाद में सर्दियों को गुज़ारता है। रोस्टोव परिवार की ख़ूबसूरत नताशा यौवन में प्रवेश करती है। नताशा की सुंदरता से आकर्षित होकर डेनिसोव उससे प्रेम करने लगता है और वह नताशा के सम्मुख विवाह का प्रस्ताव रखता है जिसे वह ठुकरा देती है।

कथानक के अन्य मोड़ पर पीयर बेज़ुखोव जिसे अकस्मात बेशुमार संपत्ति प्राप्त होती है वह आकर्षक विवाह योग्य युवक के रूप में समूचे रूसी अभिजात समाज में चर्चा का विषय बन जाता है। उसे कुरगीन परिवार की एलीना से विवाह करने के लिए लुभाया जाता है और पीयर क्षणिक आवेग में ‘एलीना‘ से विवाह कर लेता है। विवाह के बाद उसे एलीना की चरित्रहीनता और अवैध प्रेम प्रसंगों का पता चलता है जिससे वह क्षुब्ध हो जाता है। एलीना अपने ही भाई अनातोली से भी प्रेम संबंध बनाए रखती है जो चर्चा का विषय बन चुकी थी। एलीना और डोलोखोव नामक व्यक्ति के विवाहेतर अनैतिक संबंध जब पति पीयर के सम्मुख उद्घाटित होते हैं तो डोलोखोव पीयर की खिल्ली उड़ाकर अपमानित करता है। पीयर गुस्से से डोलोखोव को द्वंद्व के लिए चुनौती देता है जिसमें पीयर, डोलोखोव पर गोली चलाकर उसे घायल कर देता है। एलीना, डोलोखोव से अपने संबंधों का निराकरण करती है किन्तु पीयर उसे स्वीकार नहीं करता। वह एलीना के प्रति हिंसात्मक हो जाता है और वह एलीना को छोड़कर चला जाता है।

एलीना को त्यागकर पीयर, नैतिक मूल्यों और आत्मिक संतोष की खोज में भटकता रहता है। वह उद्विग्नता का शिकार होकर अध्यात्मिकता की ओर मुड़ जाता है। वह फ्रीमेसन नामक एक गुप्त अध्यात्मिक संगठन का सदस्य बनकर उनकी गतिविधियों में व्यस्त हो जाता है। पीयर की अशांत मनोदशा उसे विचलित कर देती है। वह और उसके मनोभावों में अंतर्विरोध की जटिलता का वर्णन, टॉल्स्टाय ने बहुत ही मनोयोग से किया है। पीयर बेज़ुखोव बेहतर मनुष्य बनकर समाज के सम्मुख प्रकट होता है। वह अपने पूर्ववर्ती जीवन को पीछे छोड़ आता है। इस अनैतिक संसार में नैतिकता की सीमाओं में रहकर जीवन बिताने का लक्ष्य निर्धारित कर लेता है। मनुष्य के जीवन में नैतिक-अनैतिक का प्रश्न उसे निरंतर उद्वेलित करता रहता है। आलोचकों ने पीयर के चरित्र में टॉल्स्टाय के व्यक्तित्व और विचारों को प्रतिबिंबित होते देखा है। वह इन प्रश्नों का समाधान प्राप्त करने के प्रयास करता है किन्तु उसे अनेक प्रश्नों का समाधान नहीं प्राप्त होता।

प्रिंस एंड्रे शून्यवादी दर्शनिकता के प्रभाव से मोहभंग की मानसिकता में स्वयं को घिरा हुआ पाता है। वह असंतुष्ट दांपत्य जीवन और मानसिक अशांति से संत्रस्त होकर पुन: युद्ध के बारे में सोचना शुरू कर देता है। वह अपने प्रासाद में ही रहकर युद्ध में रूसी सेना की क्षति के कारणों को जानने के लिए रूसी सैन्य व्यवस्था का अध्ययन करता है।

इन्हीं दिनों उससे भेंट करने के लिए पीयर आता है। वह प्रिंस एंड्रे से अपने प्रश्नों का समाधान चाहता है। वह प्रिंस एंड्रे से सवाल करता है की इस अनैतिक संसार में ईश्वर कहाँ है? वह वैश्विक स्तर पर नास्तिकतावाद का समर्थन करने की इच्छा व्यक्त करता है और पुनर्जीवन की संभावना की ओर संकेत करता है। पीयर की विरक्त पत्नी एलीना उससे अपने अनैतिक आचरण के लिए क्षमा मांगकर प्रायश्चित्त करना चाहती है। पीयर उसे अपने फ्रीमेसन (एक अध्यात्मिक संस्था) संसद के नियमों के अनुसार माफ़ कर देता है किन्तु उसे जीवन में स्वीकार नहीं करता। एलीना पीटर्सबर्ग समाज में प्रभावशाली विलासी महिला बनकर जीवन गुज़ारती है।

प्रिंस एंड्रे सैन्य संचालन संबंधी अपने निष्कर्षों को लिखकर रूस के महाराजा और अपने सैनिक मित्रों को भेंट करने के लिए पीटरबर्ग पहुँचता है। सुंदर नताशा भी उन्हीं दिनों पीटरबर्ग के अभिजात नृत्य समारोह (ग्रैंड बॉल) में भाग लेने के लिए साज-सिंगार को चुनने के उत्साह में मग्न रहती है। इसी ग्रैंड बॉल में उसकी भेंट प्रिंस एंड्रे से होती है। नताशा के प्रफुल्लित, जोशीले चित्ताकर्षक सौंदर्य को देखकर प्रिंस एंड्रे में नई ऊर्जा और स्फूर्ति का संचरण होता है। उसे महसूस होता कि उसके जीवन का उद्देश्य उसे मिल गया। प्रिंस एंड्रे के गंभीर और शालीन व्यक्तित्व से नताशा भी प्रभावित होती है और उसका हृदय पुलकित हो उठता है। इसके बाद प्रिंस एंड्रे रोस्टोव परिवार से घनिष्टता बढ़ाकर नताशा से विवाह का प्रस्ताव करता है। नताशा भी प्रिंस एंड्रे के प्रेम में गहरे डूबी हुई थी, वह एंड्रे के प्रेम को स्वीकार कर लेती है। किन्तु एंड्रे के पिता रोस्टोव परिवार को पसंद नहीं करते इसलिए वे इसका विरोध करते हैं और एंड्रे के प्रेम को परखने के लिए एक वर्ष तक विवाह को टालने की सलाह देते हैं। प्रिंस एंड्रे पिता के प्रति सम्मान की रक्षा के लिए दुःखी विक्षुब्ध मानसिकता लिए नताशा को बिना बताए, पुन: युद्ध में शामिल होने के लिए प्रस्थान कर जाता है। एंड्रे के इस तरह अचानक चले जाने से नताशा गहरी उदासी में डूब जाती है। नताशा की निराशा और उदासी को दूर करने के लिए पिता काऊंट रोस्टोव उसे लेकर मास्को में अपने एक मित्र के पास कुछ समय के लिए चले जाते हैं। नताशा की चंचल और जीवंत उल्लासमय प्रवृत्ति उसे बहुत जल्द एंड्रे के दुःख से उबारकर सामान्य कर देती है।

ऐसी स्थितियों में मास्को के एक ओपेरा (नृत्य नाटक) थियेटर में नताशा की भेंट एलीना के चरित्रहीन भाई अनातोली से होती है। अनातोली पहले ही पोलैंड की एक स्त्री से विवाह कर उसे वहीं छोड़ आया था। उसकी कामुक दृष्टि नताशा पर पड़ती है और वह नाताशा की ओर आकर्षित होता है। वह नताशा को अपने जाल में फंसाकर यौन शोषण करने की ठान लेता है। अनातोली और एलीना दोनों इस षडयंत्र को अंजाम देने के लिए एकजुट हो जाते हैं। अनातोली, नताशा को प्रेम पत्र लिखकर उसे आकर्षित करता है। नताशा का चंचल अस्थिर मन अनातोली की चाल में फंस जाता है। अनातोली नताशा के साथ पलायन की योजना बनाता है। नताशा भी अनातोली के प्रेम को स्वीकार कर पत्र द्वारा प्रिंस एंड्रे की बहन प्रिंसेस मारिया को एंड्रे के साथ अपने रिश्ते को समाप्त घोषित कर देती है। इस बीच रोस्टोव परिवार की ‘सोनिया‘ को आखिरी क्षणों में नताशा और अनातोली के पलायन का पता चल जाता है। वह अनातोली की असलियत उद्घाटित कर नताशा को बचाने में सफल होती है। पीयर को नताशा के इस व्यवहार का जब पता चलता है तो उसे नताशा की नादानी पर दुःखी होता है। इसी क्षण से नताशा के प्रति उसके हृदय में अंकुरित प्रेम का आभास होने लगता है।

प्रिंस एंड्रे के नताशा के निर्णय से आहत हो जाता है। वह निस्संग और निस्पृह भाव से नताशा को अपने मन से निकाल देता है। इस संदर्भ में वह पीयर से कहता है कि उसका स्वाभिमान इस रिश्ते को दुबारा जोड़ने के लिए तैयार नहीं होगा। उधर नताशा शर्मिंदगी से आत्महत्या के विफल प्रयास में गंभीर रूप से बीमार पड़ जाती है। किन्तु वह अपने परिवार और सोनिया के स्नेहिल उपचार से धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक पीड़ा से उबरने लगती है। उसकी धार्मिक प्रवृत्ति भी उसके सामान्य होने में सहायक होती है। इस बीच समूचा रूस नेपोलियन और रूस की सेनाओं के संभावित मुठभेड़ के लिए तैयारियाँ शुरू कर देता है। पीयर अपनी धार्मिक प्रवृत्ति के अनुरूप नेपोलियन को ईसा-विरोधी दुष्ट घोषित कर देता है।

उपन्यास के परवर्ती भाग का नायक नेपोलियन है। लेखक ने नेपोलियन के चरित्र को विस्तार से प्रस्तुत किया है। वह एक कुशल रणनीतिकार, योद्धा और सख्त अनुशासनप्रिय सेना नायक था। वह श्रेष्ठ सैन्य व्यूह संयोजक, हठी और निर्भीक विचारक तथा विशाल सेना का चमत्कारी नायक था। ग्रीष्म ऋतु के अंत में उसकी सैन्य वाहिनी चार लाख साहसी सैनिकों के साथ रूस के सीमावर्ती गाँवों से होते हुए रूस के स्मोल्नेस्क नगर पहुँच जाती है। पीयर मास्को से निकलकर नेपोलियन और रूसी सेनाओं के मध्य छिड़े संग्राम को प्रत्यक्ष देखने के लिए बोरोडीनो के युद्ध क्षेत्र में पहुँच जाता है। वह एक रूसी तोपखाने के निकट तोपचियों के समूह में अपना स्थान निश्चित कर युद्ध के घातक विध्वंसात्मक घटनाओं को भयभीत होकर देखता रहता है। वहीं पर मोर्चे पर डटे अपने सैनिकों को वह कारतूस और गोला बारूद मुहैया कराने के काम में जुट जाता है। युद्ध में हताहत होते सैनिक और तोप के गोलों के गगन भेदी विस्फोट में ज़ख़्मी सैनिकों के लहूलुहान शरीर और मृत सैनिकों के शवों के अंबार को देखकर पीयर का हृदय द्रवित हो उठता है। वह ज़ख़्मी सैनिकों को उठाकर निकट के चिकित्सा शिविरों में पहुँचाने लगता है। नेपोलियन की पैदल घुड़सवार सेना और तोपखाना रूसी सेना पर भीषण हमले करती जाती है, जिसका सामना रूसी सेना नहीं कर पाती। फ्रांसीसी सेना के भीषण गोलाबारी से रूसी सेना ध्वस्त होकर बिखर जाती है। फ्रांसीसी सेना को भी भारी क्षति होती है। दोनों सेनाओं में हज़ारों की संख्या में सैनिक क्षति होती है। नेपोलियन की सेना भी अंत में मारकाट से थककर शिथिल पड़ जाती है। रूसी सेना जनरल कुटज़ोव के आदेश पर पीछे हटने लगती है और अपने शिविरों की ओर प्रस्थान करती है।

युद्ध में हताहत सैनिकों की सूची में प्रिंस एंड्रे और अनातोली का नाम भी शामिल हो जाता है। अनातोली अपना एक पैर खो देता है और एंड्रे एक हथगोले के विस्फोट में बुरी तरह ज़ख़्मी हो जाता है। दोनों को मृत घोषित कर दिया जाता है। किन्तु यह समाचार युद्धकालीन अराजक स्थितियों के कारण उनके परिवार को नहीं मिल पाता। फ्रांसीसी सेना रूसी सेना को पीछे खदेड़ते हुए मास्को पहुँचने में कामयाब हो जाती है। नेपोलियन सेना सहित मास्को में प्रवेश करता है। मास्को नगर युद्ध से प्रभावित होकर अस्तव्यस्त हो जाता है। मास्को-वासी नेपोलियन की सेना द्वारा मास्को पर आधिपत्य के अनुमान से नगर को खाली करके घरेलू सामान को गाड़ियों पर लादकर नगर छोड़कर निकल पड़ते हैं। रोस्टोव परिवार भी अंत तक प्रतीक्षा करके रूसी जनरल कुटुज़ोव की शहर छोड़ देने की घोषणा के बाद ही वे भी मास्को छोड़ने की तैयारी में जुट जाते हैं। जनरल कुटुज़ोव मास्को को जला देने की आज्ञा दे देता है। नगरवासी मास्को की संपदा, कला और संस्कृति की बहुमूल्य वस्तुएँ नेपोलियन की सेना के हाथों नहीं लगाने देना चाहते। इसलिए पहले वे नगर खाली कर देते हैं और शहर को आग लगा देते हैं। रोस्टोव परिवार भी सामान समेत निकल पड़ता है। घोड़ा गाड़ियों पर घरेलू सामान को लादते समय, नताशा अपनी गाड़ियों में घर के महंगे साजो-सामान के बदले ज़ख़्मी सैनिकों को ले जाने का निर्णय करती है। उनकी गाड़ियों में पनाह लिए हुए ज़ख़्मी सैनिकों में प्रिंस एंड्रे भी मौत से जूझता हुआ गंभीर हालत में पड़ा था जिसकी खबर नताशा को नहीं थी।

जब नेपोलियन की विशाल सेना (ग्रेंड आर्मी) परित्यक्त, जले और उजड़े मास्को को अपने अधीन कर लेती है तो पीयर नेपोलियन की हत्या के महती उद्देश्य को पूरा करने के लिए कमर कस लेता है।वह साधारण रूसी किसान की वेषभूषा धारण कर सड़कों पर निकल पड़ता है। किन्तु एक मोड़ पर मास्को छोड़ते हुए नताशा उसे पहचान लेती है और एक एक अर्थ भरी मुस्कान से अपने हृदय के भाव को व्यक्त करती है। पीयर उस मुस्कान में अपने लिए प्रेम को देखता है।

पीयर मास्को की सड़क पर छिड़े दंगों से एक फ्रेंच सैनिक अफ़सर की जान बचाता है। वह नेपोलियन की हत्या के लिए राजमहल की ओर जाते हुए एक रूसी औरत को बलात्कारी फ्रांसीसी सैनिकों से छुड़ाता है। तभी उसे फ्रांसीसी सैनिक गिरफ्तार कर लेते हैं और विद्रोही बंदियों के गिरोह में उसे मृत्युदंड के लिए सैनिकों के हवाले कर देते हैं। उस गिरोह में उसकी दोस्ती एक संत गुण वाले प्लेटन कराटेव नामक एक बंदी से होती है। पीयर को प्लेटन की धार्मिक प्रवृत्ति आकर्षित करती है। प्लेटन कराटेव का निराडंबर और सरल स्वभाव और ईसा भक्ति, पीयर को जीवन की सार्थकता का बोध कराती है। मास्को की शेष संपत्ति को लूटने और रूसी नागरिकों पर अत्याचार का कहर बरसाने के बाद थककर, रूसी राजतंत्र से संधि या आत्मसमर्पण कराने में विफल होकर आक्रोशपूर्ण निराशा स्थिति में फ्रांसीसी सेनाएँ मास्को छोड़कर स्वदेश लौटने के लिए विवश हो जाती हैं। नेपोलियन अपनी विशाल सैन्यहवाहिनी के साथ मरणान्तक रूसी बर्फीली सर्दी में परिवाहक प्रांत के जंगलों में भूख और ठंड में फंस जाते हैं। रूह को कंपकंपाने वाली सर्द हवाएँ और भीषण ठंड से भूखे पैदल सैनिक रास्ते में दम तोड़ने लगते हैं। उनके साथ बंदी बनाए गए जंजीरों में जकड़े रूसी बंदी भी कतार में चलते चलते भूख और ठंड से बर्फीली ज़मीन पर लुढ़कने लगते हैं। उन भूखे और क्षीणकाय लोगों में प्लेटन भी पीयर के साथ फ्रांसीसी सेना का बंदी होकर घिसट रहा था। एक दिन प्लेटन की साँस उखाड़ जाती है और वह पीयर के सामने ही अंतिम प्रार्थना कर गिरकर मर जाता है। प्लेटन की मृत्यु से पीयर टूट जाता है। पीयर इन अमानवीय क्रूर दृश्यों से विचलित हो उठता है।

उसी जंगल में एक छोटे से रूसी सैनिक शिविर में नताशा का छोटा भाई पेट्या-रोस्टोव जो पहले ही रूसी सेना में भर्ती हो गया था, वह फ्रांसीसी सेना से रूसी बंदियों को छुड़ाने के संघर्ष में मारा जाता है लेकिन इस मुठभेड़ में पीयर फ्रांसीसी सैनिकों की गिरफ्त से छूट निकलता है।

इसी दौरान मास्को में ज़ख़्मी और मरणासन्न प्रिंस एंड्रे को रोस्टोव परिवार अपने संरक्षण में ले लेता है। युद्ध के ख़त्म होने से पहले, एंड्रे फिर एक बार नताशा और बहन मारिया के आत्मीय अनुरागपूर्ण संस्पर्श का अनुभव करता है। किन्तु उसमें जीने की इच्छा समाप्त होने लगती है। वह धीरे धीरे मृत्यु के निकट होता जाता है। मरने से पहले वह नताशा को माफ कर देता है। नताशा प्रिंस एंड्रे की उदारता और उसके निश्छल प्रेम से अभिभूत हो उठती है लेकिन वह उसे बचा नहीं पाती। नताशा के ही सम्मुख वह अपने नन्हें से बेटे को बहन मारिया को सौंपकर अंतिम साँस लेता है। नताशा का हृदय एंड्रे के प्रति समर्पण और आदर से नतमस्तक हो जाता है।

उपन्यास के अंतिम पड़ाव में पीयर की पत्नी एलीना गर्भपात की दवा के अधिक मात्रा में सेवन से मृत्यु हो जाती है। रूसी सेनाएँ आत्मसम्मान के साथ मास्को के पुनर्निमाण में जुट जाती हैं। नताशा पीयर से एंड्रे की दुखद मृत्यु की घटना को सुनाती है और पीयर भी फ्रांसीसी सेना के गिरफ्त में अपने दोस्त प्लेटन काराटेवा की करुण मृत्यु की घटना को नताशा को सुनाता है। आत्मीय जनों का विछोह दोनों को प्रेम के सूत्र में बाँध देता है, इसका आभास दोनों को होता है। प्रिंसेस मारिया की पहल से आखिर पीयर, नताशा के प्रति अपने चिरप्रतीक्षित प्रेम को व्यक्त कर देता है जिसे नताशा स्वीकार कर लेती है। पीयर बेज़ुखोव और नटाल्या रोस्टोवा (नाताशा) विवाह सूत्र में बंध जाते हैं।

कथानक के इस पड़ाव पर मूल उपन्यास समाप्त हो जाता है। टॉल्स्टाय ने उपसंहार के रूप में दो अतिरिक्त अध्यायों की रचना की है। प्रथम भाग के प्रारम्भ में 1813 में नताशा और पीयर के विवाह का वर्णन है। इस विवाह से रोस्टोव परिवार में खुशी लौट आती है। नताशा के पिता की मृत्यु हो जाती है। नताशा का बड़ा भाई निकोलाई प्रिंस एंड्रे की सुसंपन्न मारिया बोकोन्स्की से विवाह कर लेता है। इस विवाह और पीयर की संपत्ति से रोस्टोव परिवार सुखी और समृद्ध जीवन शुरू कर देता है।

उपसंहार का दूसरा अध्याय टॉल्स्टाय ने अपने इतिहास दर्शन संबंधी विचारों को व्याख्यायित किया है। टॉल्स्टाय ने अपनी राजनीतिक और इतिहास संबंधी अपने सिद्धांतों और मान्यताओं के संदर्भ में ‘वार एंड पीस‘ की रचनात्मकता के आधार पर इतिहास की निर्मिति के संबंध में महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं।

उपन्यास के संबंध में प्रतिक्रियाएँ :

इवान गोंचारोव नामक टॉल्स्टाय साहित्य के प्रख्यात आलोचक ने टॉल्स्टाय को सही अर्थ में रूसी साहित्य का मृगराज (सिंह) कहा है। तत्कालीन रूसी प्रेस इसके विराट स्वरूप को देखकर हतप्रभ हो गया। उस समय के एक रूसी समाचार पत्र ‘गोलोस‘ (अप्रैल 1865) ने इस कृति की विधा पर सवाल किया कि "यह किस विधा की रचना है? इसमें कथानक कहाँ है और क्या यह इतिहास है?" अर्थात इस महाकाव्यात्मक उपन्यास ने साहित्यिक विधाओं की सारी परिभाषाओं को ध्वस्त कर दिया और एक नई विधा को गढ़ दिया जो कि साहित्य की सीमाओं से परे है। अन्य आलोचकों ने इसे वर्तमान सदी (19वीं) के आरंभ का राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्यसहित, समाज के बहुत बड़े हिस्से का एक सांस्कृतिक इतिहास माना है।

ईवान तुर्गनेव ने इसे एक महाकाव्य, इतिहास-उपन्यास, समूचे राष्ट्र का विराट चित्र, कहा। उस समय के सभी रूसी साहित्यकारों और समालोचकों ने ‘वार एंड पीस’ को रूसी साहित्य की सार्वकालिक महान रचना माना। इसे रूसी भाषा का ‘इलियड‘ कहा गया। इसे रूसी इतिहास का ‘महा-आख्यान’ कहा गया।

महान रूसी कथाकार दास्तोव्स्की के अनुसार – "यह ज़मींदारी साहित्य के अंतिम शब्द हैं जो कि विलक्षण हैं।" एक अन्य पत्र में दास्तोव्स्की ने लिखा कि – "मेरी दृढ़ धारणा है कि कथा लेखक को कला के काव्यात्मक पक्ष के साथ-साथ अपने कथ्य की यथार्थता, ऐतिहासिकता और समकालीन संदर्भ का बोध होना चाहिए। यह जैसा कि मैं देखता हूँ, केवल एक ही लेखक इन चीज़ों में अद्वितीय है, वह है काऊंट लेव टॉल्स्टाय।"

टॉल्स्टाय के काल से ही विश्व के सुप्रसिद्ध लेखकों ने ‘वार एंड पीस‘ को विश्व साहित्य की अत्युत्तम कृति (मास्टरपीस) के रूप में सराहा है। गुस्ताव फ्लाबेयर ने तुर्गनेव को लिखे एक पत्र में लिखा कि – "यह एक प्रथम दर्जे की रचना है! कितना महान कलाकार है यह और कितना विलक्षण मनोवैज्ञानिक!"

सुप्रसिद्ध फ्रेंच साहित्यकार रोम्याँ रोलां ने इस उपन्यास को पढ़कर लिखा कि – "यह रचना जीवन की तरह है जिसका कि न आरंभ है और न ही अंत!"

थॉमस मान ने वार एंड पीस को’ साहित्य के इतिहास में ’महानतम युद्ध उपन्यास‘ कहा।

अर्नेस्ट हेमिंग्वे ने स्वीकार किया कि "वह टॉल्स्टाय से ही प्रतिबद्ध, वस्तुनिष्ठ, बेबाक और यथार्थवादी युद्ध साहित्य के लेखन के लिए शिक्षा लेते रहे। मैं नहीं जानता कि टॉल्स्टाय के अतिरिक्त कोई अन्य लेखक युद्ध पर टॉल्स्टाय से बेहतर लिख सकता हो!"

रूपान्तरण : (adaptation)

‘वार एंड पीस’ का सर्वप्रथम फिल्मी रूपान्तरण रूसी भाषा में सन् 1915 में ‘वोयना ई मीर‘ (voyna i mir) किया गया। जिसका निर्देशन व्लाडीमीर गार्डिन ने किया था। इसे काफी ख्याति और लोकप्रियता हासिल हुई। जापान में सन् 1947 में इसका फिल्मी रूपान्तरण किया गया। रूस में ‘वार एंड पीस’ उपन्यास पर आधारित दर्जनों फिल्में और टीवी धारावाहिक हर युग में बनाते रहे हैं और यह रूसी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।

सन् 1956 में हॉलीवुड ने इस उपन्यास को महान और बहुचर्चित, कालजयी फिल्म में रूपांतरित किया। यह फिल्म आज तक हॉलीवुड की महान फिल्म परंपरा में बहुत सम्मानजनक स्थान रखती है और लोकप्रियता की दृष्टि से यह आज भी दर्शकों की पसंद है। ‘वार एंड पीस’ की साहित्यिक विराटता को फिल माध्यम में रूपांतरित करना फ़िल्मकारों के लिए असंभव सी कल्पना थी। किन्तु हॉलीवुड में ऐसे प्रयोग किए जाते रहे हैं जिससे कि कालजयी साहित्यिक कृतियों को सिनेमा के रूप में प्रस्तुत कर कृति के साहित्यिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रयोजन को विश्वजनीन बनाया जा सके। वार एंड पीस का फिल्मांकन भी चुनौती भरा है। सर्वप्रथम अमेरिका के ‘डीनो डि लॉरेंटिस और इटली के कार्लो पोंटी ने संयुक्त रूप से इस वृहत फिल्मांकन योजना को साकार करने का संकल्प किया। ‘किंग विडोर‘ नामक हॉलीवुड के सुप्रसिद्ध निर्देशक ने इस फिल्म के निर्देशन का दायित्व स्वीकार किया।

‘वार एंड पीस‘ (1956) फिल्म के लिए उपन्यास के मुखी कथानक को ही चुना गया और संक्षिप्त स्वरूप को ही फिल्माया गया क्योंकि समूचे उपन्यास को यथावत फिल्माना संभव नहीं है। फिल्म की मूल कथा पीयर, एंड्रे और नताशा के बनते-बिगड़ते संबंधों की संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है। उपन्यासों में वर्णित पाँचों सामंती घराने के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को परिचयात्मक रूप में समेटकर उपन्यास में वर्णित परिवेश को यथावत चित्रांकित किया गया है जो कि बहुत ही आकर्षक है। उपन्यास में वर्णित रूसी अभिजात और सामंती जीवन शैली और वैभव का चित्रण फिल्म को विशेष भव्यता प्रदान करता है। नताशा, एंड्रे और पीयर पात्रों के साथ फिल्म में प्रतिनायक के रूप में फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष और महान सेनानायक नेपोलियन के व्यक्तित्व को टॉल्स्टाय की कल्पना के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है। हॉलीवुड के प्रतिभावान और अति विशिष्ट कलाकारों ने अपने विलक्षण अभिनय कौशल के द्वारा उपन्यास के पात्रों को फिल्म में जीवंत कर दिया। उस युग की महान अभिनेत्री ऑड्री हेप्बर्न - नताशा रोस्टोवा की भूमिका को मौलिकता और यथार्थता प्रदान की है। उसी तरह हेनरी फोंडा – काऊंट पीयर बेज़ुखोव, मेल फेरर – प्रिंस एंड्रे बोकोन्स्की और हरबर्ट लॉम – नेपोलियन के पात्रों को जीवित कर दिया। इनके अतिरिक्त अन्य सभी अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने अपने अभिनय से इस फिल्म को चिरस्मरणीय बना दिया।

चंचल स्वभाव की अस्थिर चित्त वाली प्रारम्भ में अबोध किन्तु शनै: शनै: जिस मानसिक प्रौढ़ता को नताशा प्राप्त करती है और जो परिवर्तन उसके चरित्र में अंत तक पहुँचते-पहुँचते होता है यह दर्शकों को अवर्णनीय अनुभूति से भर देता है। नताशा का अंतर्द्वंद्व और उसके अनिर्णय की मानसिकता को भी अभिनेत्री ऑड्री हेप्बर्न ने ख़ूबसूरती से प्रदर्शित किया है। घायल मरणासन्न प्रिंस एंड्रे के सम्मुख नताशा जिस ग्लानि का अनुभव करती है और जिस अदारता से प्रिंस एंड्रे नताशा की नादानी को क्षमा कर देता है, यह दृश्य और प्रसंग उपन्यास और फिल्म का चरम बिन्दु है जो दर्शक पर अमिट छाप छोड़ जाता है। पात्र के विपरीत मनोभावों का चित्रण जिस कलात्मकता के साथ टॉल्स्टाय ने चित्रित किया है उसी अनुपात में फिल्म में भी पात्रों के मनोभाव उसी सघनता के साथ व्यक्त हुए हैं।

इस फिल्म का मुख्य आकर्षण सन् 1812 मे घटित रूसी और नेपोलियन की सेनाओं के मध्य युद्ध के दृश्य हैं। नेपोलियन का सेना समेत मास्को प्रवेश और मास्कोवासियों का नगर को आगजनी से तबाह कर उजड़े मास्को को छोड़कर इतर प्रदेशों में जा बसना परिणामस्वरूप जिस खीज और क्रोध से नेपोलियन को मास्को छोड़ना पड़ता है, यह प्रकरण फिल्म में उपन्यास को सजीव रूप मे प्रस्तुत करता है। इस फिल्म की अवधि साढ़े तीन घंटे है। टॉल्स्टाय की महानता इस फिल्म द्वारा सिद्ध होती है। उपन्यास जितना अद्भुत है फिल्म भी उतनी ही विलक्षण है। इस फिल्म की पटकथा विभिन्न प्रकरणों के लिए आठ लेखकों ने बहुत ही सावधानी से तैयार की है । उपन्यास के प्रत्येक वर्ण्य विषय को बारीकी से प्रस्तुत किया गया है। उपन्यास में टॉल्स्टाय द्वारा प्रयुक्त फ्रेंच भाषा के प्रसंगों को अंग्रेजी में बादल दिया गया है। इस फिल्म की विशेषता इसका छायांकन (सिनेमाटोग्राफी) है। फिल्म का अंत युद्ध के उपरांत, नेपोलियन के मास्को से प्रस्थान के पश्चात उजड़े हुए मास्को नगर में रोस्टोव के ध्वस्त प्रासाद में नताशा और पीयर के मिलन से होता है। फिल्म में उपन्यास में रचित उपसंहार को शामिल नहीं किया गया है। ‘वार एंड पीस’ फिल्म टॉल्स्टाय के इतिहासबोध, दार्शनिकता और राजनैतिक चिंतन को स्पष्ट करने में कामयाब हुआ है। 19वीं शताब्दी की रूसी सामंतवादी सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने में पूर्णत: सफल हुई है। जिस तरह वार एंड पीस का पाठक इस उपन्यास को स्वयं जीता है उसी प्रकार फिल्म भी दर्शक यही अनुभव कराती है। ‘वार एंड पीस’ निर्विवाद रूप से एक क्लासिक है तथा एक चिरस्मरणीय महान फिल्म भी।


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