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ISSN 2292-9754

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02.29.2016


फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की की अमर औपन्यासिक कृति "ब्रदर्स कारामाज़ोव"

विश्व कथा-साहित्य में रूसी उपन्यासों एवं उनके रचनाकारों का अतिविशिष्ट स्थान है। मानवीय संवेदनाओं, स्त्री-पुरुष संबंधों, वर्ग-वैषम्य और वर्ग-संघर्ष को कलात्मकता के साथ चित्रित करने में रूसी कथाकार अद्वितीय माने जाते हैं। विश्व साहित्य को अनमोल औपन्यासिक कृतियों से समृद्ध करने का श्रेय रूसी कथाकारों को है। लियो टॉल्स्टाय, चेखव, गोर्की, तुर्गनेव, शोलोखोव और फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की रूसी साहित्य के कालजयी कथाकार हैं जिन्होंने विश्व कथा-साहित्य में रूसी यथार्थवाद को पहचान दिलाई। लियो टॉलस्टाय (1828-1910) और फ़्योदोर दास्तोयेव्स्की (1821-1881) दोनों समकालीन थे, इनकी लेखनी से अन्ना केरेनीना, वार एंड पीस तथा क्राईम एंड पनिशमेंट और ब्रदर्स कारामाज़ोव जैसे महाकाव्यात्मक उपन्यास रचे गए। फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की अपने जीवन काल में ही दंतकथा (लिजेंड) बन चुका था। दोस्तोयेव्स्की का जन्म 30 अक्तूबर सन् 1821 में मास्को के एक अस्पताल में हुआ। उसके जन्म की परिस्थितियाँ अत्यंत दयनीय, असुरक्षित और आर्थिक दृष्टि से विपन्न थीं। दोस्तोयेव्स्की को टॉल्स्टाय और तुर्गनेव जैसा सम्पन्न और सुखी बचपन नसीब नहीं हुआ। उसके पिता एक साधारण डॉक्टर थे, सात भाइयों में वह दूसरा था। पिता क्रोधी प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, उनके ही एक खेत मज़दूर ने उनकी हत्या कर दी। दोस्तोयेव्स्की इस घटना से विचलित हो गया और वह इसके प्रभाव से जीवनपर्यंत सदमे में रहा। वह मिरगी रोग का शिकार हो गया। पिता के स्वभाव के विपरीत दोस्तोयेव्स्की की माता भावुक, मृदु और सहिष्णु स्वभाव की महिला थीं, उन्हें साहित्य और संगीत में रुचि थी। परंतु दुर्भाग्य से उनकी मृत्यु दोस्तोयेव्स्की की पंद्रह वर्ष की अवस्था में हो गई। दोस्तोयेव्स्की को बचपन से पुस्तकों से प्रेम था, साहित्यिक कृतियों को पढ़कर वह आनंदित हो जाता इस तरह पुस्तकें ही उसके लिए स्फूर्ति और प्रेरणा का स्रोत बन गईं। दोस्तोयेव्स्की की स्कूली शिक्षा सेंट पीटर्सबर्ग में हुई तत्पश्चात वहीं सन् 1838 में एकेडेमी ऑफ मिलिटरी इंजीनियरिंग में उसने शिक्षा प्राप्त की। किन्तु उसका मन इस विषय में नहीं रमा और वह साहित्य की ओर आकर्षित हुआ। जीवन की विषम परिस्थितियों में उसने होमर, शेक्सपियर, गेटे, स्कॉट, बाल्ज़ाक और विक्टर ह्यूगो की रचनाओं को पढ़ लिया। इस अध्ययन ने उसके जीवन की दिशा बदल दी। सन् 1849 में अट्ठाईस वर्ष की उम्र में वह रूस के एक प्रतिबंधित समाजवादी संगठन "पेट्राशेव्स्की सर्कल" की विद्रोही गतिविधियों में शामिल हो गया। परिणाम स्वरूप राजद्रोह के अपराध में उसे अन्य विद्रोहियों के संग फाँसी की सज़ा सुनाई गई। वह अपने साथियों को फाँसी पर लटकते हुए वह देख रहा था, अंत में उसकी बारी आई। वह बेड़ियों से जकड़े पैरों से धीरे-धीरे रेंगता हुआ फाँसी के तख़्ते की ओर बढ़ने लगा। किन्तु एकाएक अंतिम क्षण में ज़ार निकोलस प्रथम के शाही फ़रमान से शेष राजद्रोहियों की फाँसी की सज़ा निरस्त कर दी गई। उन लोगों कों फाँसी की सज़ा के बदले बर्फ़ीले साइबेरिया के कारागार में कठोर श्रम के लिए भेजने के आदेश ज़ारी किए गए। भाग्य के इस चमत्कार ने भविष्य के एक महान रचनाकार को जीवन दान दिया। दोस्तोयेव्स्की को साइबेरिया में पाँच वर्षों (1849–1854) तक यातनापूर्ण जीवन बिताना पड़ा। साइबेरिया के बर्फ़ीले प्रदेश में स्थित लोमहर्षक कारागार में ग़रीब किसानों, मज़दूरों, लेखकों और सामान्य जनों की यातनाओं को उसने देखा। दोस्तोयेव्स्की के रचना संसार में उसके ये साथी पात्रों के रूप में उभरते हैं। दोस्तोयेव्स्की ने मृत्यु को बहुत निकट से देखा था, साइबेरिया में मरणान्तक यातना को भोगा था, फाँसी के तख़्ते तक पहुँचकर लौट आया था। शायद इसीलिए उसके दोनों प्रमुख उपन्यासों क्राइम एंड पनिशमेंट (1866) और ब्रदर्स कारामाज़ोव (1880) में उसके नायक मृत्युबोध और पितृहंता प्रवृत्तियों से ग्रस्त हैं। दोस्तोयेव्स्की का वैवाहिक जीवन अस्थिरता और असंतोष से भरा था। उसके जीवन में तीन महिलाएँ आईं। 1857 में उसने मारिया दमित्रिवा नामक एक विधवा से प्रथम विवाह किया तदुपरान्त पोलिना सुस्लोवा नामक एक छात्रा के प्रेम में पड़ गया, किन्तु पोलिना ने उससे विवाह करने से इनकार कर दिया। वह निराश होकर वह अपनी सहायक अन्ना स्नितकिना की ओर झुका और अपने प्रेम व्यक्त को करके उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे अन्ना ने स्वीकार कर लिया। दोस्तोयेव्स्की में प्रेम की तीव्र भूख मौजूद थी जो "ब्रदर्स कारामाज़ोव" में दिमित्री के चरित्र में दृष्टव्य है। एकाकी समय में वह जुआड़ी हो गया था। जुआखानों में जुआ खेलने के लिए वह अपने प्रकाशकों से रक़म अग्रिम ले लिया करता था। दोस्तोयेव्स्की ने "द गेंबलर" उपन्यास में अपने जीवन के इन प्रसंगों को प्रस्तुत किया। उसके बिखरे जीवन की झलक ब्रदर्स कारामाज़ोव में दिमित्री में भी दिखाई देती है। दोस्तोयेव्स्की आर्थिक संकट से हमेशा त्रस्त रहा। उसके तीन बेटियाँ शैशव में ही मृत्यु का शिकार हो गईं। उसका पुत्र भी मिरगी रोग से ग्रस्त हो गया। दोस्तोयेव्स्की के जीवन के अंतिम वर्ष ही उसके लिए कुछ सुकून लेकर आए, सही मायने में उसने इन्हीं अंतिम वर्षों में कलात्मक ऊँचाइयाँ हासिल कीं और इसी काल में उसे पर्याप्त आर्थिक लाभ भी हुआ।

दोस्तोयेव्स्की का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास ब्रदर्स कारामाज़ोव उसका अंतिम उपन्यास था जो संसार के सर्वोत्तम उपन्यासों में स्थान पाता है। 28 जून 1881 को दोस्तोयेव्स्की का दु:खद निधन हो गया। दोस्तोयेव्स्की का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास कौन सा है? यह प्रश्न समीक्षकों के लिए एक पहेली ही बना रहा। कुछ लोग क्राइम एंड पनिशमेंट को गुणवत्ता की दृष्टि से श्रेष्ठ मानते हैं तो कुछ लोग ब्रदर्स कारामाज़ोव को।

"ब्रदर्स कारामाज़ोव" दोस्तोयेव्स्की की मृत्यु से एक वर्ष पूर्व प्रकाशित हुआ। प्रस्तुत कृति मनुष्य के अंतर्द्वंद्वों और अंतर्विरोधी तत्वों के संघर्ष की व्याख्या करती है। तत्कालीन पतनशील रूसी समाज में नैतिक-अनैतिक, आस्तिकता-नास्तिकता, शून्यवाद और बुद्धिवाद के बीच ज़ारी बहस को दोस्तोयेव्स्की ने इस उपन्यास के वृहत फ़लक पर प्रस्तुत किया है। यह उन्नीसवीं सदी के रूसी परिप्रेक्ष्य में रचित एक संवेदनशील दार्शनिक उपन्यास है जो ईश्वर के अस्तित्व पर तार्किक सवाल उठाता है। इसके साथ यह मनुष्य के स्वतंत्र चिंतन और नैतिकता से जुड़े अनेक विवादों पर बहस करता है। यह उपन्यास रूसी समाज में व्याप्त घोर अनैतिक जीवन शैली का चित्रण बेबाकी से करता है। लेखक ने आधुनिकता के संक्रमणकालीन भावबोध को उपन्यास में चित्रित किया है। ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास के प्रकाशन को विश्व साहित्य की सर्वोच्च उपलब्धि के रूप में आँका जाता है और इसे विश्व साहित्य की अनमोल धरोहर माना गया है। इस उपन्यास की कथावस्तु सन् 1870 के रूस के एक क़स्बे की सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों के परिप्रेक्ष्य में बुनी गई है। उन दिनों निरंकुश ज़ारशाही शासन का आतंक पूरे रूस में छाया हुआ था। सामंती बूर्जुवा ताक़तें रूसी जन जीवन को आक्रांत कर रहीं थीं। रूसी समाज वर्ग-वैषम्य और वर्ग-संघर्ष में उलझा हुआ था। ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास के अधिकांश प्रसंग दोस्तोयेव्स्की के निजी जीवन से जुड़े हैं। इसे दोस्तोयेव्स्की ने अपनी डायरी में स्वीकारा है। सन् 1878 में उसके मिरगी रोग ग्रस्त तीन वर्षीय पुत्र अल्योशा की मृत्यु हो गई। उपन्यास का एक मुख्य पात्र फ़्योदोरोविच स्मेर्ड्याकोव मिर्गी रोग से ग्रस्त है जो उपन्यास में निर्णायक भूमिका निभाता है।

दोस्तोयेव्सकी ने प्रस्तुत उपन्यास में अनेकों नवीन शिल्पगत प्रयोग किए। लेखक इस उपन्यास में कथावाचक की भूमिका निभाता है। अन्य रूसी उपन्यासों की भाँति ही ब्रदर्स कारामाज़ोव भी विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में अनूदित हुआ। इसका प्रथम अंग्रेज़ी अनुवाद सन् 1912 में कॉन्स्टेंस गार्नेट ने किया, इसके बाद अनेकों अनुवादकों ने इसे अंग्रेज़ी में अनूदित किया। यह महाकाय उपन्यास बारह खंडों और 96 अध्यायों में एक हज़ार से अधिक पृष्ठों में विभिन्न संस्करणों में प्रकाशित हुआ। इसे आद्यंत पढ़ने के लिए धीरज की आवश्यकता है। ब्रदर्स कारामाज़ोव में अनेकों अंतर्कथाएँ गुँथी हुई हैं जो अंत में परस्पर एक दूसरे में समा जाती हैं। ब्रदर्स कारामाज़ोव, कारामाज़ोव परिवार के तीन भाइयों एवं उनके पिता फ़्योदोर पाव्लोविच कारामाज़ोव के आपसी संघर्ष की विस्तृत कहानी है। पाव्लोविच कारामाज़ोव उपन्यास का केंद्रीय पात्र है। इसके तीन पुत्र हैं, पहली पत्नी एडेलैडा इवानोव्ना से दिमित्री फ़्योदोरोविच कारामाज़ोव, दूसरी पत्नी सोफिया इवानोव्ना से इवान फ़्योदोरोविच कारामाज़ोव और एलेक्सी फ़्योदोरोविच कारामाज़ोव। फ़्योदोर पाव्लोविच का एक और पुत्र पावेल फ़्योदोरोविच स्मेर्ड्याकोव है जो पाव्लोविच की अवैध संतान है, जिसे पाव्लोविच ने नौकर बनाकर अपनी सेवा के लिए रखा है। फ़्योदोर पाव्लोविच उपन्यास का वह केंद्र पात्र है जो उपन्यास की कथावस्तु और पात्रों को संचालित करता है।

 

फ़्योदोर पाव्लोविच कारामाज़ोव पचपन वर्ष का एक उन्मुक्त, शराबी, जुआड़ी, वेश्यागामी, ऐयाश व्यक्ति है, जो अपना सारा समय शराब और सुंदर मनचली औरतों के बीच अपनी भोगलिप्सा की संतुष्टि में बिताता है। वह अपने अस्थिर स्वभाव व आचरण पर कोई नियंत्रण नहीं रख सकता, वह लोगों की दृष्टि में उपहास और विद्रूप का विषय है। उसे अपनी चरित्रहीनता पर घमंड है। उसे अपने उच्छृंखल, उन्मुक्त आचरण पर कोई पश्चाताप नहीं है। वह स्वयं को एक विदूषक (बफ़ून) कहता फिरता है। उसे अपने पुत्रों से सख़्त नफ़रत है। सबसे ज़्यादा वह अपने बड़े बेटे दिमित्री से नफ़रत करता है क्योंकि दिमित्री उसे अक्सर अपनी माँ (पाव्लोविच की पहली पत्नी) का वास्ता देकर उससे जुआ खेलने के लिए पैसे वसूलता है। उपन्यास की मुख्य कथावस्तु इन्हीं तीन भाइयों के और पिता के अंतरसंबंधों पर आधारित है इसीलिए इसका शीर्षक ब्रदर्स कारामाज़ोव (कारामाज़ोव बंधु) रखा गया। दिमित्री उपन्यास का नायक है, उसकी धारणा है कि उसका विलासी पिता उसकी माँ की संपत्ति को भोग रहा है, इसलिए वह पिता से माँ की संपत्ति हासिल करना चाहता है। किन्तु पाव्लोविच, दिमित्री की इस धारणा को स्वीकार नहीं करता। उसके मन में दिमित्री के प्रति क्रोध और प्रतिकार की भावना तीव्र होने लगती है। दिमित्री दुर्व्यसनी होने के साथ मैत्री, परोपकार, सहिष्णुता, प्रेम और सद्भावना आदि गुणों से सम्पन्न है। वह साहसी युवक है जो स्त्रियों को स्वाभाविक रूप से आकर्षित कर लेता है। उसके स्वभाव में अपने पिता की कामुकता का अंश भी शामिल है।

दिमित्री का एक भाई चौबीस वर्षीय इवान फ्योदोरोविच कारामाज़ोव है, जिसकी विचारधारा और जीवन शैली दिमित्री से पूरी तरह अलग है। वह एक तर्कवादी विवेकशील नास्तिक युवक है। वह अपने सौतेले भाई दिमित्री से आत्मीयता और प्रेम का भाव रखता है। उसे भी अपने पिता पाव्लोविच का आचरण नहीं भाता है। वह पिता और दिमित्री के बीच सुलह देखना चाहता है।

कारामाज़ोव बंधुओं मे सबसे छोटा बीस वर्षीय एलेक्सी फ़्योदोरोविच कारामाज़ोव है, जो कि इवान का सगा भाई है। कथावाचक उपन्यास के प्रारम्भ में एलेक्सी को प्रधान पात्र के रूप में प्रस्तुत करता है। एलेक्सी का चरित्र उपन्यास में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वही कहानी की सारी गुत्थियों को सुलझाने में मुख्य भूमिका निभाता है। वह पेशे से नवदीक्षित पादरी है, जो दयालु स्वभाव का प्रज्ञावान युवक है। वह अपने भाइयों के बीच सौमनस्यता और सद्भावना को प्रेरित करता है। एलेक्सी अपने बड़े भाई दिमित्री और अराजक पिता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। एलेक्सी के प्रति दिमित्री और इवान दोनों में विशेष प्रेम और बंधुत्व का भाव विद्यमान है।

उपन्यास की नायिका एग्राफेना एलेग्ज़ेंड्रोव्ना स्वेत्लोवा नामक बाईस वर्षीय एक ख़ूबसूरत, चंचल, निर्भीक और आशिक़ मिज़ाज की युवती है जो स्थानीय समाज मे तितली बनकर डोलती रहती है। उसका विलासी जीवन संभ्रांत अमीरों को अपनी ओर आकर्षित करता है। उपन्यास में यह पात्र ग्रुशेंका के नाम से प्रचलित है। ग्रुशेंका का चरित्र जटिलताओं और अनिश्चितताओं से भरा है जो हर क़दम पर स्त्री-पुरुष संबंधों के स्थापित मानदंडों को चुनौती देता है। उसके कई पुरुषों से प्रेम संबंध हैं जो उसके चरित्र को अधिक उलझा देते हैं। सर्वप्रथम ग्रुशेंका और फ़्योदोर पाव्लोविच दोनों धन और भोग विलास की लालसा में परस्पर एक दूसरे के निकट आते हैं। दिमित्री का पिता, ग्रुशेंको के मोहजाल में फँसकर उससे प्रेम करने लगता है। वह ग्रुशेंका को अपने पुत्र के विरुद्ध इस्तेमाल करना चाहता है किन्तु उसका दाँव उल्टा पड़ जाता है। ग्रुशेंका ख़ुद ही दिमित्री से प्रेम करने लग जाती है। ग्रुशेंका के प्रति दिमित्री के प्रेम को जानकार पाव्लोविच अपना आपा खो बैठता है। इस तरह पिता और पुत्र के बीच एक ही प्रेमिका के लिए प्रतिद्वंद्विता उत्पन्न हो जाती है। पिता और पुत्र दोनों प्रतिहिंसा की ज्वाला में जल उठते हैं। यही प्रसंग इस उपन्यास को एक भिन्न धरातल पर स्थापित करता है। दोस्तोयेव्स्की ने अपने रचना कौशल से ग्रुशेंका की चारित्रिक जटिलता को संवेदनशील स्वरूप प्रदान किया है।

दिमित्री के जीवन में प्रवेश करने वाली पहली स्त्री केटेरीना इवानोव्ना वेर्खोव्त्सेवा है जो उपन्यास में काट्या के नाम से भी जानी जाती है। केटेरीना और ग्रूशेंका दोनों में दिमित्री के लिए स्पर्धा चलती है, जो अंत में दिमित्री के जीवन को नष्ट कर देने की स्थिति में पहुँच जाती है। असफल प्रेमिका की प्रतिहिंसात्मक मानसिकता और व्यवहार को प्रस्तुत करने में दास्तोयेव्स्की ने अपने अद्भुत रचना कौशल का प्रदर्शन किया है।

ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास का प्रारम्भ कारामाज़ोव परिवार के परिचय के साथ होता है। पिता पाव्लोविच और उसके ज्येष्ठ पुत्र दिमित्री के बीच छिड़े हुए संपत्ति के विवाद को सुलझाने के लिए पाव्लोविच अपने छोटे पुत्र एलेक्सी की मदद से चर्च के वयोवृद्ध धर्म गुरु जोसिमा को अपने निवास में आमंत्रित करता है। लेकिन दिमित्री के समय पर न पहुँचने के कारण वह सुलह वार्ता भंग हो जाती है जिससे पिता और पुत्र के मध्य तनाव और वैमनस्य उग्र रूप धारण कर लेता है।

दिमित्री अपने पिता से रक़म वसूलने के लिए अपने भाई इवान या एलेक्सी की मदद लेते रहता है। पाव्लोविच हर बार दिमित्री को कर्ज़ के रूप में पैसे देता है। वह उससे रक़म प्राप्ति की रसीद लेकर जमा करता जाता है। उपन्यास के प्रारम्भ में केटेरीना को उसके पिता के कर्ज़ को चुकाने के लिए, दिमित्री उसकी मदद करता है। दिमित्री का परोपकारी और स्नेहपूर्ण स्वभाव से केटेरीना प्रभावित होकर वह दिमित्री से प्रेम करने लगती है। कालांतर में भाग्यवश केटेरीना को विरासत में बहुत बड़ी संपत्ति मिलती है। वह अपनी संपत्तिसहित दिमित्री को अपना प्रेम समर्पित करना चाहती है।

दिमित्री अपने स्वाभिमान और पौरुष से प्रेरित होकर प्रतिदान स्वरूप केटेरीना से किसी भी प्रकार का उपहार स्वीकार करने से बचना चाहता है। केटेरीना, दिमित्री को अपना मंगेतर मानकर उसके आर्थिक संकट को दूर कर देना चाहती है। एक अवसर पर वह दिमित्री को तीन हज़ार रूबल अपने पिता को पहुँचाने के लिए देती है। वास्तव में उसका उद्देश्य दिमित्री को एक बड़ी रक़म मुहैया कराना था, क्योंकि उसे मालूम था कि दिमित्री को पैसों की सख़्त ज़रूरत है। इधर पाव्लोविच को अपने पुत्र दिमित्री और केटेरीना के संबंधों का पता चल जाता है, वह दिमित्री को केटेरीना से विवाह कर उसका कर्ज़ चुकाने की सलाह देता है।

पाव्लोविच, ग्रुशेंका को अपने धन का लालच देकर उससे विवाह का प्रस्ताव करता है जिसे ग्रुशेंका ठुकरा देती है। दिमित्री को पता चलता है कि उसके पिता ने उसके कर्ज़ के कागज़ात ग्रुशेंका को बेच दिया है। इस कारण अब दिमित्री ग्रुशेंका का कर्ज़दार हो जाता है। वह ग्रुशेंका से मिलकर अपनी समस्या सुलझाना चाहता है लेकिन जब वह ग्रुशेंका को देखता है तो उसकी सुंदरता में खो जाता है। वह ग्रुशेंका के व्यक्तिगत जीवन को जानने के लिए उसका पीछा करता है। उसे संदेह होता है कि ग्रुशेंका उसके पिता को रिझाकर उसकी संपत्ति को हथियाना चाहती है। उपन्यास में ग्रुशेंका का व्यक्तित्व बहुत ही आकर्षक है, उसके चरित्र में एक रहस्यमयता और उसके व्यवहार में पुरुषों के लिए विशेष प्रकार का आकर्षण मौजूद था। परंतु उसका भी एक गोपनीय अतीत था जिसे कोई नहीं जानता था। दिमित्री को उसका अंत तक नहीं चलता। वह जितना ही ग्रुशेंका से निकटता बढ़ाकर अपने प्रेम को व्यक्त करना चाहता है, वह उसे उतना ही छलावे में रखती है। वह दिमित्री से छिपकर अपने पुरुष मित्रों से मिलती रहती है। उपन्यास में दिमित्री और ग्रुशेंका के बीच पनप रहे रहस्यमय संबंध का विस्तृत एवं रोमांचक वर्णन मिलता है। दिमित्री को आभास होने लगता है कि ग्रुशेंका को अपने प्रेम के वश में करने के लिए उसे बहुत बड़ी धन राशि का प्रबंध करना पड़ेगा। दूसरी ओर वह केटेरीना के अहसान से मुक्त होना चाहता है जो उस पर बोझ बना हुआ था क्योंकि वह जानता था कि केटेरीना उससे प्रेम करती है और वह उसके और ग्रुशेंका के मध्य पनप रहे प्रेम को कभी स्वीकार नहीं करेगी। केटेरीना ने उसे जो रक़म दी थी उसमें से कुछ रक़म उसने खर्च कर दिया था शेष उसके पास बचा था। उसे केटेरीना को वापस कर उसके और ग्रुशेंका के प्रेम से केटेरीना को अवगत कराने के लिए वह एलेक्सी को केटेरीना के पास भेजता है। किन्तु इस बिन्दु पर कहानी एक नया मोड़ ले लेती है। ग्रुशेंका जो उस समय केटेरीना के घर में मौजूद थी, वह केटेरीना के सम्मुख अपने और दिमित्री के संबंधों को नकार देती है। वह पाव्लोविच के साथ अपने संबंध की ओर इशारा कर निकल जाती है। केटेरीना का मन ग्रुशेंका के प्रति ईर्ष्या से भर जाता है और साथ ही उसमें दिमित्री के प्रति क्रोध और प्रतिकार की भावना पैदा हो जाती है। कारामाज़ोव बंधुओं में ईवान उपन्यास के प्रारम्भ से ही मन ही मन केटेरीना से प्रेम करता है किन्तु वह दिमित्री के प्रति केटेरीना की आसक्ति को जानकर अपने प्रेम को व्यक्त नहीं करता। किन्तु उपन्यास के अंतिम भाग में जैसे ही वह देखता है दिमित्री, केटेरीना के जीवन में शामिल ही नहीं है तो वह केटेरीना के प्रति अपने भीतर विकसित प्रेम को व्यक्त कर देता है जिसे केटेरीना संकोच के साथ, दिमित्री से बदला लेने के लिए स्वीकार कर लेती है।

इस घटनाचक्र के मध्य दिमित्री अपने पिता और ग्रुशेंका के विवाह की कल्पना से चेतना शून्य होने लगता है। वह भयानक मानसिक आवेग से त्रस्त रहता है। वह अपनी कुछ निजी बहुमूल्य वस्तुओं को पड़ोस के क़स्बे में बेचकर उस धन को वह ग्रुशेंका को भेंट कर उससे विवाह का प्रस्ताव करना चाहता है। एक रात वह ग्रुशेंका को उसके घर में न पाकर, इस अनुमान से कि वह उसके पिता के पास होगी, वह पिता की हत्या के इरादे से हाथों में एक छोटा औज़ार लेकर ग्रुशेंका को ढूँढता हुआ क्रोध और आवेश से पिता के घर के अहाते में पहुँचता है। उसे चहारदीवारी की खुली खिड़की से पिता की ग्रुशेंका को पुकारने की आवाज़ सुनाई देती है। क्योंकि पाव्लोविच सचमुच ग्रुशेंका की प्रतीक्षा कर रहा था। जैसे ही पाव्लोविच खिड़की के समीप आता है, रात के अंधेरे में दिमित्री उस पर प्रहार कर मार गिराता है। किन्तु जो व्यक्ति गिरकर मर जाता है वह पाव्लोविच नहीं था। मृत व्यक्ति पाव्लोविच परिवार का विश्वासपात्र नौकर ग्रिगोरी था। दिमित्री दुःखी मन से घटनास्थल से निकल भागता है।

वह रात उसके जीवन की सबसे अंधेरी रात थी। वह अपने साथ ग्रुशेंका के लिए जो धन राशि लाया था उसे लेकर विक्षिप्तावस्था में वह क़स्बे के जुएखाने में पहुँचता है। वहाँ अकस्मात वह ग्रुशेंका को एक अमीर जुआड़ी की संगत में जुआ खेलते हुए दिखाई देती है। दिमित्री विचलित होकर ग्रुशेंका के सम्मुख प्रकट होता है। ग्रुशेंका दिमित्री को वहाँ पाकर उस जुआड़ी से अलग होकर दिमित्री की बाहों में समा जाती है। उस क्षण ग्रुशेंका अपने जीवन का वह रहस्य उजागर करती है जिसे सुनकर दिमित्री उसे अपने संरक्षण में ले लेता है। दरअसल वह जुआड़ी ग्रुशेंका का दुश्चरित्र पति था जो बरसों पहले उसे मुसीबतों में छोड़कर लापता हो गया था। वह उस रात अचानक लौटकर ग्रुशेंका को अपने अधीन कर लेना चाहता था। ग्रुशेंका उसी क्षण दिमित्री से अपना प्रेम निवेदन करती है और उसे अपने प्रेम का विश्वास दिलाती है। वहाँ नाटकीय स्थितियों में दिमित्री और ग्रुशेंका का मिलन होता है। ठीक उसी समय पुलिस वहाँ पहुँचती है और दिमित्री को उसके पिता पाव्लोविच की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार कर लेती है। दिमित्री स्वीकार करता है कि उसके हाथों से ग्रिगोरी की हत्या हुई है। लेकिन पुलिस उसे बताती है कि वास्तव में ग्रिगोरी जीवित है और पाव्लोविच की हत्या हुई है। दिमित्री इस आरोप को नहीं स्वीकार करता, किन्तु उसे पितृहत्या के अपराध में गिरफ़्तार कर अदालत में पेश किया जाता है। उपन्यास का यह भाग अत्यंत रोचक और महत्वपूर्ण है। पाव्लोविच की हत्या होती है किन्तु इस हत्या के असली हत्यारे के बारे में कोई सुराग़ नहीं मिलता। उस रात की सारी घटनाएँ दिमित्री के विरुद्ध सिद्ध होती हैं। सारे गवाह और साक्ष्य उसके ख़िलाफ़ ही अदालत में गवाही देते हैं। अभियोजन पक्ष इस आरोप को सिद्ध करने में सफल हो जाता है कि दिमित्री ने ही अपने पिता की हत्या की है, क्योंकि वह कई बार पिता को जान से मार डालने की धमकी दे चुका था। उन दोनों में संपत्ति के लिए अक्सर झगड़े हुआ करते थे। पाव्लोविच और ग्रुशेंका के संबंधों के कारण भी दिमित्री के पिता से बदला लेने की संभावना पुष्ट हो गई। ये सारे तथ्य दिमित्री को हत्यारा सिद्ध करने में सहायक होते हैं। दिमित्री अपने बचाव में केवल एक ही कथन पर अंत तक क़ायम रहता है कि उसने यह हत्या नहीं की, जो कि सच था। उसने अन्य सारे आरोप स्वीकार कर लिए, उसने यह भी स्वीकारा कि वह चरित्रवान नहीं है, वह हमेशा पिता से लड़ता रहा। उसके भाई ईवान और एलेक्सी भी उसके पक्ष में खड़े होते हैं। एलेक्सी ही दिमित्री का अंतरंग साथी था, जब कि ईवान में कहीं थोड़ी सी प्रतिद्वंद्विता मौजूद थी फिर भी उसे विश्वास था कि दिमित्री पिता का हत्यारा नहीं हो सकता।

अदालत में केटेरीना भी दिमित्री के विरुद्ध ही गवाही देती है और उसे हत्यारा साबित करती है। वह ईवान को अपने जीवन में स्वीकार कर लेती है। केवल ग्रुशेंका ही दिमित्री का साथ देती है और उसके प्रति अपने सच्चे प्रेम को निभाती है। अदलात दिमित्री को दोषी ठहराकर उसे बीस वर्ष की कारावास की सज़ा सुना देता है। उसे इस सज़ा के लिए उसे साइबेरिया भेजने की तैयारियाँ होने लगती हैं।

उपन्यास के उपसंहार में दोस्तोयेव्स्की, असली हत्यारे का पर्दाफ़ाश करते हैं। इस प्रकरण का सनसनीखेज दूसरा पहलू उभर कर सामने आता है। ईवान और स्मेर्ड्याकोव में प्रारम्भ से ही मैत्रीपूर्ण संबंध थे। स्मेर्ड्याकोव मिरगी रोग से पीड़ित था। वह भीतर ही भीतर कारामाज़ोव बंधुओं का प्रतिस्पर्धी और प्रतिद्वंद्वी भी था। उसके मन में पिता पाव्लोविच के प्रति भी प्रतिहिंसा की भावना तीव्र थी। वास्तव में पाव्लोविच और ग्रुशेंका के संबंधों तथा दिमित्री और पाव्लोविच के बीच संपत्ति के विवादों में स्मेर्ड्याकोव की महत्वपूर्ण भूमिका थी। स्मेर्ड्याकोव स्वयं को कारामाज़ोव बंधुओं के मध्य उपेक्षित एवं अपमानित अनुभव करता था। वह घोर मनोवैज्ञानिक ग्लानि और हताशा की मन:थिति में रहता था जिस कारण उसे अक्सर मिरगी के दौरे पड़ते थे। वह ईवान को परोक्ष रूप से पिता के प्रति हिंसात्मक वार की योजना को व्यक्त तो करता है किन्तु ईवान इसे गंभीरता से नहीं लेता। दिमित्री के ख़िलाफ़ हत्या के मुकदमे के दौरान एक रात स्मेर्ड्याकोव नशे की हालत में ईवान के सम्मुख पिता की हत्या क़बूल कर लेता है। वह स्वीकार करता है कि पिता पाव्लोविच की हत्या उसी ने की है। ईवान उसे दिमित्री को कारावास की सज़ा से बचाने के लिए अदालत में अपने अपराध को स्वीकार करने के लिए अनुरोध करता है। किन्तु मानसिक अशांति और अपराध बोध से पीड़ित स्मेर्ड्याकोव उस रात आत्महत्या कर लेता है। दिमित्री को बचाने की एक मात्र आशा समाप्त हो जाती है। ईवान का प्रयत्न विफल हो जाता है। कारागार में बंद दिमित्री, केटेरीना से मिलने की इच्छा व्यक्त करता है। केटेरीना अंत में अपनी गवाही पर पश्चाताप करती है और दिमित्री के प्रति अपने प्रेम को स्वीकार करती है। दिमित्री भी केटेरीनी के प्रति मन में बसे प्रेम को स्वीकार करता है हालाँकि दोनों का जीवन दो भिन्न लोगों के साथ प्रेम के बंधन में बँध चुका था।

एलेक्सी दिमित्री को निर्दोष मानता है इसीलिए वह उसे सज़ा से बचाने की योजना बनाता है। वह ईवान और केटेरीना के साथ मिलकर दिमित्री को जेल से बाहर निकालने का उपाय सोचता है। ईवान और एलेक्सी, साइबेरिया के लिए रवाना होते समय जेल के परहरेदारों और सैनिकों की सहायता से क़ैदियों के क़ाफ़िले से दिमित्री को अलग कर, उसे ग्रुशेंका के साथ अमेरिका भेजने का प्रबंध कर देते हैं। एलेक्सी क्योंकि न्यायप्रिय और धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था इसलिए वह इस कार्य को अपराध नहीं मानता क्योंकि दिमित्री निर्दोष था। दिमित्री, ग्रुशेंका के साथ कुछ वर्षों के लिए रूस छोड़ने के लिए तैयार हो जाता है किन्तु वह अपने नए रूप और नई पहचान के साथ रूस लौट आने का अपना निश्चय भी व्यक्त कर देता है। वे दोनों रूस से दूर नहीं रह सकते थे।

यह ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास की मूलकथा है। किन्तु इस मूलकथा के साथ अनेक उपकथाएँ भी साथ चलती हैं, जो दिमित्री, ग्रुशेंका, केटेरीना, ईवान और एलेक्सी के जीवन को प्रभावित करती हैं। विशेषकर स्मेर्ड्याकोव और ईवान के अंतरंग संबंध, धर्म, न्याय और आस्तिकता-नास्तिकता तथा अध्यात्मवाद के संबंध में ईवान एवं एलेक्सी की बहसें उपन्यास में बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं। ग़ौरतलब है कि दोस्तोयेव्स्की के दोनों उपन्यास, क्राइम एंड पनिशमेंट और ब्रदर्स कारामाज़ोव में कथानायक हत्या के आरोपी हैं। क्राइम एंड पनिशमेंट का नायक दो वृद्धाओं की हत्या करके महीनों, कानून से बचता हुआ, अपने अपराध को छिपाकर, भटकता रहता है किन्तु प्रतिपल वह अपराध बोध से ग्रस्त होकर असहनीय आंतरिक पीड़ा को भोगता है। ब्रदर्स कारामाज़ोव का नायक दिमित्री पितृहत्या के दंड से अपने आप को नहीं बचा पाता जब कि वह हत्यारा नहीं है, परंतु वह पिता की हत्या का प्रयत्न तो करता ही है।

ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास ने उस समय के अनेकों साहित्यकारों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों को प्रभावित किया, जिनमें प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं- अलबर्ट आइंस्टीन (1879-1955), जर्मन दार्शनिक मार्टिन हाईडेगर (1889-1976) और सिगमंड फ्रायड (1856-1939) आदि। ये सभी दोस्तोयेव्स्की और ब्रदर्स कारामाज़ोव के प्रशंसक थे। सिगमंड फ्रायड ने इसे विश्व की एक महान और कालजयी रचना कहा। सुप्रसिद्ध अस्तित्ववादी जर्मन लेखक फ्रेंज काफ़्का (1883-1924) ने अपने लेखन पर दोस्तोयेव्स्की के प्रत्यक्ष प्रभाव को स्वीकारा है। वे अपनी और दोस्तोयेव्स्की की वैचारिक समानता के लिए दोस्तोयेव्स्की को अपना रक्त संबंधी घोषित करते हैं। पिता और पुत्रों में व्याप्त घृणात्मक संबंधों को काफ़्का ने भी अपनी कहानियों में दोस्तोयेव्स्की जैसा ही चित्रित किया है, इस दृष्टि से काफ़्का की "द जजमेंट" कहानी उल्लेखनीय है। लियो टॉल्स्टाय (1828-1910) ने भी दोस्तोयेव्स्की के रचना कौशल की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने स्वीकार किया कि ब्रदर्स कारामाज़ोव ने उन पर गहरा प्रभाव छोड़ा, दोस्तोयेव्स्की ने इस उपन्यास में अविस्मरणीय दृश्यों का सृजन किया। टॉल्स्टाय ने अपने जीवन काल में ही दोस्तोयेव्स्की की महानता को स्वीकार किया।

ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास को सिनेमा में परिवर्तित करने का संकल्प हॉलीवुड के मूक सिनेमा युग (1915) में ही प्रारम्भ हो गया। सन् 1915 से 2014 के बीच इस उपन्यास पर अनेकों फिल्में अंग्रेज़ी, रूसी और अन्य भाषाओं में निर्मित हुईं। भारत में मलयालम भाषा (इयोबिंते पुस्तकम) में सन् 2014 में इस उपन्यास पर फ़िल्म बनी जो बहुचर्चित हुई। इसके साथ ही इस उपन्यास को टीवी धारावाहिक और रंगमंचीय नाटक के रूप में रूसी और अन्य भाषाओं में अपार लोकप्रियता हासिल हुई। हॉलीवुड में सन् 1958 में रिचर्ड ब्रुक्स के निर्देशन में अंग्रेज़ी में निर्मित ‘द ब्रदर्स कारामाज़ोव" फ़िल्म ने इस उपन्यास को विश्व सिनेमा में अभूतपूर्व लोकप्रियता प्रदान की। इस फ़िल्म की लोकप्रियता और सफलता में इसके कलाकारों का योगदान प्रमुख था। । उस समय के महान अभिनेता यूल-ब्रिनर ने दिमित्री की भूमिका में समूचे फ़िल्म जगत को आकर्षित किया। इनके साथ ग्रुशेंका के रूप में मेरिया शेल, केटेरीना की भूमिका क्लेयर ब्लूम, फ़्योदोर पाव्लोविच के लिए ली जे कॉब, एलेक्सी के लिए विलियम शैटनर, इवान की भूमिका में रिचर्ड बेसहर्ट आदि के अभिनय ने इस उपन्यास को अमरता प्रदान की। इस महाकाय उपन्यास को 145 मिनटों की फ़िल्म में रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म में उपन्यास की मूलकथा को ही चित्रित किया गया अर्थात पिता और उसके तीनों पुत्रों के बीच व्याप्त अंतर्कलह ही फ़िल्म का मूल कथ्य है। इसके साथ पिता और पुत्र के त्रिकोणात्मक प्रेम की संवेदनशीलता को प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारा गया है। फ़िल्म का सबसे आकर्षक और मर्मस्पर्शी हिस्सा दिमित्री पर हत्या के आरोप में अदालत में चलने वाली बहस है। अदालत में दिमित्री को हत्यारा सिद्ध करने के लिए विभिन्न पात्रों की गवाही दर्शकों को रोमांचित कराते हैं। ग्रुशेंका और केटेरीना के वाद-प्रतिवाद, एलेक्सी की दार्शनिकता और ईवान के निहिलिस्टिक विचार आदि फ़िल्म को सघनता प्रदान करते हैं। ग्रुशेंका और केटेरीना की ख़ूबसूरती दर्शकों को प्रभावित करती है। वस्तुत: यह एक संवादप्रधान और फ़िल्म है जिसमें सारी घटनाएँ बंद कमरों में ही घटित होती हैं। ब्रदर्स कारामाज़ोव फ़िल्म में दास्तोयेव्स्की का कालजयी उपन्यास जीवित हो उठा है। ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास का रूसी समाज पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा, क्योंकि यह उपन्यास तत्कालीन रूसी जीवन में व्याप्त वर्ग-वैषम्य को रेखांकित करता है। इस उपन्यास के माध्यम से दोस्तोयेव्स्की ने अपने दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों को भी स्पष्ट किया है। फ़िल्म और उपन्यास दोनों में पिता और पुत्र के एक ही स्त्री से प्रेम की जटिलता को अतिशय संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस गतिरोध को तोड़कर, इस विषम स्थिति को सुलझाना लेखक के लिए बहुत बड़ी चुनौती थी जिसे दोस्तोयेव्स्की ने युगीन संदर्भ में सुलझाया है। ब्रदर्स कारामाज़ोव उपन्यास और फ़िल्म दोनों विश्व साहित्य और सिनेमा की अमूल्य धरोहर हैं।


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