श्री पंचमी एम.ए. शर्मा ’सेहर’
रंग रंग के फूल खिले छटा अद्भुत अनुपम मधुमास मनाता भँवरा भी इठलाये कली-कली हरदम
तितलियों के रंग लिए फूलों की मंद सुगंध लिए मतवाले अरमान जगे दिल में इक उमंग लिए
चहक उठी धरा चहुँ ओर संगीतमय मंद समीर बहा उठ जाग मानव भोर हुई संग ले गुलाल अबीर यहाँ
सरस्वती बरसाए वरदान नदियों ने कल-कल गीत गाया कोयल का पंचम सुर पहचान ऋतुराज बसंत है आया !!!