लक्ष्मीनारायण गुप्ता

कविता
ऑल इज़ वैल
कैसे उड़ें गगन
पूर्वाभास
भवसागर से अच्छा होगा
श्रमेव जयते
हम आम आदमी
हम भी कैसे..