ये किस कुसूर की सज़ा मुझे दी है तुमने कुसुम सिन्हा
ये किस कुसूर की सज़ा मुझे दी है तुमने मेरी आँखों में इक नदी छुपा दी है तुमने हवा चले न चले हरदम दहकती रहती है मेरे दिल में ये कैसी आग लगा दी है तुमने आँखें झरती हैं तुम्हें याद करने से पहले मेरे दिल में ये कैसी चाह जगा दी है तुमने मौत के नाम से ही डर लगा करता था मुझे हर साँस में मरने की सज़ा दी है तुमने