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09.06.2008
 

तुमने मुझे याद किया होगा
कुसुम सिन्हा


इतने वर्षों के बाद प्रिये
इतनी दूरी आ जाने पर
क्यों मुझे आज ये लगाता है
तुमने मुझे याद किया होगा
फिर मेरा नाम लिया होगा?

आँगन के पेड़ पर बैठी वह
कोयल कू कू बोली होगी
पीले गुलाब की झाड़ी में
कोई फूल नया आया होगा

सुरम साँझ की वेला में
काले घर घिर आए होंगे
औचक की याद मेरी दिल में
बिजली सी कौंध उठी होगी

मस्ती में झूमती पुरवाई
इठला-इठला चलती होगी
पीली सरसों को चूम चूम
मतवाली हो उठती होगी

जीवन की भागा भागी में
संघर्षों की आप धापी में
तुम याद अचानक आए जब
आँसू भर आए आँखों में

मेरी हर धड़कन में आज
अनजानी कसक जगी है जब
ऐसा क्यों लगता है मुझको
तुमने मुझे याद किया होगा
फिर मेरा नाम लिया होगा?


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