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09.06.2008
 

मोती बरसाता है सावन
कुसुम सिन्हा


श्याम मेघवाले अम्बर से
लहर लहर कर छहर छहर
मोती बरसाता है सावन
मन हर्षाती कुछ लहराती
कुछ गाती चलती मस्त पवन
मोती बरसाता है सावन

सोंधी मिट्टी की खुशबू से
तन मन हो उठा सराबोर
कोयल पेड़ों पर कूक उठी
आमों पर भी आ गई बौर
तन मन पुलकाता है सावन

आस पास मँडराते भँवरे
फूलों पर गुन गुन गाते हैं
कलियों के कोमल तन मन में
कोई प्यास जगाता है सावन
चंचल चंचल सा है सावन

अलसाई सोई सी धरती
है जग पड़ी अँगड़ाई ले
झाँकने लगे बीजों से अंकुर
खेतों में आया जवजीवन
नव प्राण फूँकता है सावन

शान्त पड़े जीवन में लो
बज उठी प्रीत की बाँसुरिया
बूँदों की रिमझिम गीतों से
गुंजित हो उठा है तन मन
लहराता आता है सावन


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