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| 05.31.2008 |
| काश हृदय पत्थर का होता कुसुम सिन्हा |
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पाकर चोट न झरते आँसू हृदय बनाकर यदि वो ईश्वर निर्विकार सह लेता सुख दुख पीड़ा का अभिशाप दिया जो विरहन चकई की चीखें सुन काश हृदय पत्थर का होता .... |
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