हवाओं में ऐसी ख़ुशबू पहले कभी न थी कुसुम सिन्हा
हवाओं में ऐसी ख़ुशबू पहले कभी न थी ये चाल बहकी बहकी पहले कभी न थी ज़ुल्फ़ ने खुलके उसका चेहरा छुपा लिया घटा आसमा पे ऐसी पहले कभी न थी आँखें तरस रहीं हैं दीदार को उनके दिल में तो ऐसी बेबसी पहले कभी न थी फूलों पे रख दिए हैं शबनम ने कैसे मोती फूलों पे ऐसी रौनक पहले कभी न थी यादों की दस्तकों ने दरे दिल को खटखटाया आती थी याद पहले पर ऐसी कभी न थी