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05.31.2008
 
बसन्त फिर आनेवाला है
कुसुम सिन्हा

लगता है बसन्त फिर आनेवाला है
कली कली को फूल बनानेवाला है

सूखी मुरझाई अमराई में फिर मौसम
बौरों की मधुगंध लुटानेवाला है

गुन गुन के मीठे स्वर में गाकर भँवरा
फूलों के दिल में प्यार जगानेवाला है

झाँक रहे हैं डाल डाल नूतन किसलय
पतझर को मधुमास बनानेवाला है

हवा बहकती है मादक से मौसम में
फिर पिया मिलन की आस जगानेवाला है

काटे नहीं कटती थी जो अँधियारी रातें
उनमें मीठे ख़्वाब दिखानेवाला है

कही अनकही रह गई जो कितनी बातें
प्रिय को बसन्त सब बात बतानेवाला है

 

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