कुसुम सिन्हा


कविता

आ गया मधुमास
आज फिर
काश हृदय पत्थर का होता
चाँद हर रोज़
तुमने मुझे याद किया होगा
प्रिय तुम मेरी कविता हो
फूलों को हँसते देखा है
बसन्त फिर आने वाला है

मोती बरसाता है सावन
ये हवा

कहानी

बहके पाँव

दीवान

ऐसे तुम मुझको बेरुख़ी से
ये किस कुसूर की सज़ा
हवाओं में ऐसी ख़ुशबू पहले