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ISSN 2292-9754

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10.15.2016


आशा की किश्ती

आशा की किश्ती को
हम ले चले हैं
हिम्मत की पतवार से
वक़्त की विपरीत धारा में
नहीं पता हमें
पाएँगे मंज़िल
यह फिर
हो जाएँगे शिकार
लालच, बेईमानी, ख़ुदगर्ज़ी
के पत्थरों का
और डूब जाएँगे
अपनी ही आशा के
दरिया के भँवर में।


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