मेरी अँतड़ियों में केंचुए रेंग रहे हैं, एक छोर से दूसरे तक, सोखते हुए सब कुछ मेरे भीतर का।
शायद इसीलिए इतना खोखला हो चला हूँ, भीतर। और भरने को इतना ज्यादा खाता हूँ।
पर ये केंचुए इतना सोख रहे हैं कि साफ करने को भी उँगलियाँ डालनी पड़ती हैं, भीतर...
बड़े नाखूनों से कट जाता है मलाशय और खून फूट पड़ता है।