अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली मुख्य पृष्ठ
07.05.2008
 
शव भक्षी
कुमार लव

कहीँ कुछ लाशें
मिल जाएँ थोक में,
आ जाते हैं वहीँ
ये अजीब से मकोड़े।

इन लाशों से
बनाते हैं अपना मुकुट
राज करने के लिए
भविष्य की लाशों पर।

कुछ ही दिनों में
ग़ायब हो जाता है
लाशों का ढेर.
रह जाते हैं मकोड़े
सिर्फ़ मकोड़े
इंतज़ार में...!


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें