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07.05.2008
 
आशा
कुमार लव

          भीतर तुम्हारे,
(हाँ, वहीं!!)
मैं करीब महसूस करता हूँ-
ईश्वर के
(जाने जिंदा हैं भी या नहीं)

          और तुमने,
धीरे-धीरे चुरा ली
मेरी आवाज़,
(हाँ, कभी मेरे पास भी थी वह!)

          यहाँ से निकलने का
एक रास्ता जानता हूँ,
पर
अभी तो सारी ज़िंदगी बाकी है।
(हाँ, अब भी यही लगता है)


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