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ISSN 2292-9754

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05.17.2017


श्रद्धांजलि

घूँघट उठाते ही वो अचानक ज़ोर से हँस पड़ा।

नेहा चौंक गयी, "क्या हुआ?"

"भूतनी लग रही हो पूरी, गर्मी से मेकअप पिघल गया है, शायद?"

"भूतनी लग रही हूँ तो शादी क्यों की फिर," नेहा ने थोड़ा रूठकर मुँह घुमा लिया।

"अरे नहीं, वो क्या है कि बचपन से तुम तो परी जैसी दिखती थी, आज भूतनी जैसी दिखी तो हँसी छूट गई," उसने मज़ाक किया।

"आप बचपन से जानते हो मुझे?" उसने आश्चर्य से पूछा।

"हाँ, स्कूल में फोर्थ क्लास से प्लस टू तक एक ही क्लास में थे हम, बस सेक्शन अलग थे। पीरियड ब्रेक में देखते थे तुम्हें छुपकर।"

"चल झूठा कहीं का!! फिर कभी कुछ कहा क्यूँ नहीं?"

"संजू की वजह से, कहता था कि - मैंने पहले देखा है तो मेरी हुई वो!"

"हट!!! संजू तो मुझे देख कर ही रास्ता बदल देता था।"

"अरे तूम नही जानती थी उसको, बड़ा कमीना था, बस तुम्हे देखकर शरमाता था।"

"फिर कहाँ है आजकल वो?"

"मत पूछ यार, बड़ी दर्द भरी कहानी है।"

"अब बात निकली है तो बता भी दो।"

"संजू बिना बाप का था, 12वीं के बाद माँ भी चल बसी। सब-कुछ बेच-बाच कर बहन की शादी की और रोज़ी-रोज़गार के लिए सीआरपीएफ़ में भर्ती हो गया था। शादी को चार साल हो गए हैं ढाई साल की बिटिया और चार महीने का एक बेटा है। पिछले महीने नक्सली हमले में शहीद हो गया, गया था मैं अंतिम यात्रा में, एकदम जापानी गुड़िया जैसी बिटिया है उसकी। भाभी आजकल बच्चा गोदी में लेकर सरकारी पैसे के चक्कर में भाग-दौड़ कर रही है। बेटी वहीं उसके बड़े पापा के पास है।"

"ओह! बहुत बुरा हुआ।"

"अच्छा छोड़ो ये सब, आज हमारी सुहागरात है, बत्ती बुझाओ, हम प्रोग्राम शुरू करते हैं," उसने नेहा को बाँहों में भरना चाहा लेकिन वो छिटक गई।

"पहले मेरा गिफ़्ट निकालो।"

बन्दा पूरी तैयारी से था, झट से जेब में हाथ डालकर सोने की हार पेश कर दिया।

नेहा ने कोई उत्साह नहीं दिखाया तो उसने पूछा, "तो क्या चाहिए बाबा?"

नेहा ने धीरे से कहा, "क्या हम संजू की बिटिया को रख लें, जब तक उसके परिवार में सब कुछ ठीक नहीं हो जाता।"

"अरे! ये भी कोई पूछने की बात है पगली, मैं कल ही भाभी से बात करता हूँ," ये कहते हुए उसने नेहा को बाँहों में ले लिया।


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