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ISSN 2292-9754

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03.06.2017


प्रीत का आचमन

करना होगा प्रिये प्रीत का आचमन,
मन हमारा भी पावन ये हो जाएगा,
बज उठे गर कहीं बाँस की बाँसुरी,
सूखे मौसम में सावन ये हो जाएगा।

एक कोने में घर के दीया रख दिया,
हमने कैसे तमस की कहानी लिखी,
तोड़कर फेंक डाले है काँटे सभी,
घर के आँगन में इक रातरानी लिखी,
रात की मन्त्रणा से ये हल मिल गया,
मन विरह गीत वाहन ये हो जाएगा,
करना होगा प्रिय.......................।

ताल-सरगम बिना साज सूना सा है,
ज़िंदगी बिन सुरों के, भला क्या हुई,
काल खंडो में कितनी, व्यथाएँ दबी,
कौन जाने कि उनकी वजह क्या हुई,
हार लेकर ये दिल "हार" बैठा है ख़ुद,
तुम कहो बस, तुम्हारा ये हो जाएगा,
करना होगा प्रिय.......................।

सज उठे स्वर्ग सी घर की चारों दिशा,
जब कोई नूर चेहरे पे आ जाएगा,
सींच दी जाएगी प्रीत की हर फसल,
नेह का जल कोई मीत बरसाएगा,
पूर्ण - आहुति दूँगा तेरे साथ में,
संग सफल मेरा जीवन ये हो जाएगा,
करना होगा प्रिय.......................।


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