| अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली |
![]() |
मुख्य पृष्ठ |
| 01.16.2009 |
| माँ शारदा की वंदना
कुलवंत सिंह |
|
वर दे... वर दे. .. वर दे ।
शतदल अंक शोभित वर दे । मधुर मनोहर वीणा लहरी, राग स्रोत की छ्टा है छ्हरी, कण कण आभा अरुण सुनहरी, तान हृदय में परिमित गहरी । उर में मेरे करुण भाव भर दे । वर दे ... वर दे .. वर दे । शतदल अंक शोभित वर दे । तरू दल पर किसलय डोले, पीहू पीहू पपीहा बोले, मलय तरंगित ले हिंडोले, आशीष शारदा मन पट खोले । काव्य किलोल कर मधुरिम कर दे । वर दे ... वर दे .. वर दे । शतदल अंक शोभित वर दे । द्विज विस्मित कलरव विस्मृत, सुरभि मंजरी दिगंत विस्तृत, नाचे मयूर झूमे प्रकृति, अंब वागेश्वरी संगीत निनादित । गीतों में मेरे रस छंद ताल भर दे । वर दे ... वर दे .. वर दे । शतदल अंक शोभित वर दे । |
| अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें
|