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| 01.16.2009 |
| मुसाफ़िर कवि कुलवंत सिंह |
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यह दुनिया एक रंगमंच है
मुसाफ़िर आते हैं, अपना किरदार निभाते हैं फिर चले जाते हैं । सब अपना अपना रंग दिखा जाते हैं कुछ अच्छे, कुछ बुरे काम कर जाते हैं। कुछ हीर-रांझा, लैला-मजनू जैसा प्यार कर जाते हैं। कुछ धर्मगुरू शंकराचार्य बन अद्वैत और विश्वास दे जाते हैं । कुछ नानक, बुद्ध, ईसा, पैगंबर बन मानवता को दिशा दे जाते हैं । कुछ राणा प्रताप, शिवाजी, गुरू गोविंद बन दीनों को जुल्मियों से बचा जाते हैं । कुछ नादिर, गॊरी, तैमूर बन देश को लूट ले जाते हैं । कुछ आर्यभट्ट, भास्कर बन खगोल बना जाते हैं । कुछ चरक, सुश्रुत बन चिकित्सा को आयाम दे जाते हैं । कुछ अशोक, चंद्रगुप्त, आकबर बन देश को जोड़ जाते हैं । कुछ औरंगजेब, मीर जाफ़र, जयचंद्र बन देश को तोड़ जाते हैं । कुछ गांधी, विवेकानंद बन ऎसे कर्म कर जाते हैं, कि अपने पीछे, अपने पदचिन्हों को छोड़ जाते हैं । कुछ भक्ति में लीन हो जाते हैं मीरा बन कृष्ण को पा जाते हैं । कुछ समाज सुधारक बन राम मोहन राय और कबीर बन जाते हैं । कुछ मदर टेरेसा बन दूसरों की सेवा अपना लेते हैं । उनमें ही ईश्वर और खुशी ढ़ूंढ़ खुद को भूल जाते हैं । कुछ भगत, आजाद, बोस बन देश पर निछावर हो जाते हैं । कुछ तेलगी, हर्षद, वीरप्प्न बन देश को ही चूस जाते हैं । कुछ युवाओं के आइकान बन किंग-खान, बिग- बी बन जाते हैं । कुछ पागलपन की हद तक गिर अपनों की पीठ में छुरा घोंप जाते हैं । कुछ हैवान बन जाते हैं कुछ शैतान बन जाते हैं कुछ बेईमान बन जाते हैं कुछ सम्मान पा जाते हैं । कुछ विज्ञान से यान बना जाते हैं कुछ जीवन को रोशन कर जाते हैं । कुछ मानवता को तबाह करने परमाणु बम गिरा जाते हैं । कोई खुन बहाता है कोई खून चूसता है । कोई धर्म, देश, जाति पर खून निछावर कर जाता है । यह दुनिया एक रंगमंच है मुसाफ़िर आते हैं, अपना किरदार निभाते हैं फिर चले जाते हैं । |
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