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| 01.16.2009 |
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लबों पे |
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लबों पे ये हल्की सी लाली जो छायी । ख़ुदा ने नवाज़ा करम से है हमको, हथेली पे सच रख मै चलता हूँ लेकर, धरा है पटी पापियों के कदम से, बशर हर यहाँ बोल मीठा ही चाहे, हमें कह के अपना न तुम यूँ सताओ गिरे शाख से फूल जब कोई टूटे, |
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