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| 01.16.2009 |
| भरम पाला था मैंने कवि कुलवंत सिंह |
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भरम पाला था मैंने प्यार दो तो प्यार मिलता है ।
यहाँ मतलब के सब मारे न सच्चा यार मिलता है । लुटा दो जां भले अपनी न छोड़ें खून पी लेंगे, जिसे देखो छुपा के हाथ में तलवार मिलता है । बहा लो देखकर आँसू न जग में पोंछता कोई, दिखा दो अश्क दुनिया को तो बस धिक्कार मिलता है । नहीं मैं चाहता दुनिया मुझे अब थोड़ा जीने दो, मिटाकर खुद को देखो तो भी बस अंगार मिलता है । मैं पागल हूँ जो दुनिया में सभी को अपना कहता हूँ, खफ़ा यह मुझसे हैं उनका मुझे दीदार मिलता है । मुखौटा देख लो पहना यहाँ हर आदमी नकली डराना दूसरे को हो सदा तैयार मिलता है । |
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